{"_id":"69565d9cf53bdf5aa801c4c5","slug":"controversy-erupts-over-rss-event-in-kanam-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1034-151392-2026-01-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: कानम में आरएसएस के कार्यक्रम पर विवाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: कानम में आरएसएस के कार्यक्रम पर विवाद
विज्ञापन
देवसभा अध्यक्ष और कांग्रेस प्रवक्ता ने किया बहिष्कार का एलान
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)।
किन्नौर के कानम गांव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से आयोजित धर्म सम्मेलन को लेकर विरोध शुरू हो गया है। कानम देवसभा के अध्यक्ष तंजीन वांगचु और किन्नौर कांग्रेस प्रवक्ता केसर नेगी ने इस आयोजन को राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए इसका पूर्ण बहिष्कार किया है। देवसभा अध्यक्ष तंजीन वांगचु ने कहा कि देवता साहिब डाबला और देव परंपरा का किसी भी राजनीतिक विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक लोगों की ओर से देवता साहिब को जबरन राजनीति में घसीटा जा रहा है। वांगचु ने कहा देवसभा के 50 प्रतिशत से अधिक सदस्य इस कार्यक्रम का बहिष्कार कर चुके हैं। उन्हाेंने पुजारी और ग्रामीणों से आह्वान किया है कि बिना सर्वसम्मति के देवता साहिब को ऐसे आयोजनों में शामिल न किया जाए। वहीं, जनजातीय परिषद के सदस्य केसर नेगी ने कहा कि बौद्ध बहुल क्षेत्रों में सुनियोजित तरीके से धार्मिक आस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कानम बौद्ध दर्शन का प्राचीन केंद्र है और यहां राजनीतिक विचारधारा को थोपना संस्कृति के खिलाफ है। नेगी ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के बजाय बाहरी भीड़ जुटाई गई है और भाजपा से जुड़े कुछ लोग इसे अहम का मुद्दा बनाकर गांव की शांति भंग कर रहे हैं। उन्होंने किन्नौर वासियों से आह्वान किया है कि वे अपनी विशिष्ट संस्कृति और धर्मनिरपेक्ष भावना को बचाने के लिए ऐसे आयोजनों का विरोध करें।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)।
किन्नौर के कानम गांव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से आयोजित धर्म सम्मेलन को लेकर विरोध शुरू हो गया है। कानम देवसभा के अध्यक्ष तंजीन वांगचु और किन्नौर कांग्रेस प्रवक्ता केसर नेगी ने इस आयोजन को राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए इसका पूर्ण बहिष्कार किया है। देवसभा अध्यक्ष तंजीन वांगचु ने कहा कि देवता साहिब डाबला और देव परंपरा का किसी भी राजनीतिक विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक लोगों की ओर से देवता साहिब को जबरन राजनीति में घसीटा जा रहा है। वांगचु ने कहा देवसभा के 50 प्रतिशत से अधिक सदस्य इस कार्यक्रम का बहिष्कार कर चुके हैं। उन्हाेंने पुजारी और ग्रामीणों से आह्वान किया है कि बिना सर्वसम्मति के देवता साहिब को ऐसे आयोजनों में शामिल न किया जाए। वहीं, जनजातीय परिषद के सदस्य केसर नेगी ने कहा कि बौद्ध बहुल क्षेत्रों में सुनियोजित तरीके से धार्मिक आस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कानम बौद्ध दर्शन का प्राचीन केंद्र है और यहां राजनीतिक विचारधारा को थोपना संस्कृति के खिलाफ है। नेगी ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के बजाय बाहरी भीड़ जुटाई गई है और भाजपा से जुड़े कुछ लोग इसे अहम का मुद्दा बनाकर गांव की शांति भंग कर रहे हैं। उन्होंने किन्नौर वासियों से आह्वान किया है कि वे अपनी विशिष्ट संस्कृति और धर्मनिरपेक्ष भावना को बचाने के लिए ऐसे आयोजनों का विरोध करें।