{"_id":"6187f4827196153627726d1a","slug":"congress-leader-depak-meheta-meat-with-rakesh-tiket-rampur-hp-news-sml389512973","type":"story","status":"publish","title_hn":"कांग्रेस नेता दीपक राठौर ने राकेश टिकैत से की मुलाकात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कांग्रेस नेता दीपक राठौर ने राकेश टिकैत से की मुलाकात
विज्ञापन
कांग्रेस नेता दीपक राठौर राकेश टिकैत से मुलाकात करते हुए
- फोटो : RAMPUR-HP
रामपुर बुशहर। हिमाचल प्रदेश में बागवानों और किसानों की ज्वलंत समस्याओं और केंद्र सरकार की किसान, बागवानों के शोषण और चंद पूंजीपतियों के फायदे के लिए तीन काले कृषि कानून बनाए गए हैं। इसका राजीव गांधी पंचायतीराज प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक दीपक राठौर ने विरोध किया है। इसको लेकर राठौर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत से गाजीपुर बॉर्डर में जाकर मिले।
उन्होंने कहा कि बागवानों और किसानों की मेहनत का फायदा किसान, बागवानों को कम और पूंजीपति मित्रों को ज्यादा मिले, इस मंशा से बनाए गए तीनों काले कृषि कानूनों का विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक ये काले कानून वापस नहीं लिए जाते। राठौर ने कहा कि बीमा कंपनियों के प्राकृतिक आपदा से बागवानों और किसानों को होने वाले नुकसान का भुगतान न करना, मंडी मध्यस्थता योजना के अंतर्गत मिलने वाली राहत का न मिलना, मनमर्जी से किसानों और बागवानी उत्पादों की कीमतें तय करना, खाद, बीज और जेनेरिक दवाओं पर सब्सिडी न देना, नकली दवाओं, समय पर उत्पादों की पेमेंट न होना आदि बहुत सी ऐसी समस्याएं है, जिसे लेकर किसान और बागवान चिंतित हैं।
सरकार जबरदस्ती काले कृषि कानूनों को थोपकर किसानों और बागवानों को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के किसानों और बागवानों ने उपचुनाव में भाजपा को करारा जवाब दिया है और अगर सरकार कृषि कानूनों वापस नहीं लेेती है, तो आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की एकतरफा जीत निश्चित है।
विज्ञापन
उन्होंने किसान नेता राकेश टिकैत को हिमाचल आने का निमंत्रण भी दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया है। गौर हो कि राजीव गांधी पंचायती राज संगठन हिमाचल प्रदेश संयोजक दीपक राठौर के नेतृत्व में 28 दिसंबर 2020 से 8 दिसंबर 2021 तक रिज मैदान शिमला से धर्मशाला तक की 320 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली गई थी, जो कि तीन काले कृषि कानूनों के विरोध में थी।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि बागवानों और किसानों की मेहनत का फायदा किसान, बागवानों को कम और पूंजीपति मित्रों को ज्यादा मिले, इस मंशा से बनाए गए तीनों काले कृषि कानूनों का विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक ये काले कानून वापस नहीं लिए जाते। राठौर ने कहा कि बीमा कंपनियों के प्राकृतिक आपदा से बागवानों और किसानों को होने वाले नुकसान का भुगतान न करना, मंडी मध्यस्थता योजना के अंतर्गत मिलने वाली राहत का न मिलना, मनमर्जी से किसानों और बागवानी उत्पादों की कीमतें तय करना, खाद, बीज और जेनेरिक दवाओं पर सब्सिडी न देना, नकली दवाओं, समय पर उत्पादों की पेमेंट न होना आदि बहुत सी ऐसी समस्याएं है, जिसे लेकर किसान और बागवान चिंतित हैं।
विज्ञापन
सरकार जबरदस्ती काले कृषि कानूनों को थोपकर किसानों और बागवानों को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के किसानों और बागवानों ने उपचुनाव में भाजपा को करारा जवाब दिया है और अगर सरकार कृषि कानूनों वापस नहीं लेेती है, तो आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की एकतरफा जीत निश्चित है।
विज्ञापन
उन्होंने किसान नेता राकेश टिकैत को हिमाचल आने का निमंत्रण भी दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया है। गौर हो कि राजीव गांधी पंचायती राज संगठन हिमाचल प्रदेश संयोजक दीपक राठौर के नेतृत्व में 28 दिसंबर 2020 से 8 दिसंबर 2021 तक रिज मैदान शिमला से धर्मशाला तक की 320 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली गई थी, जो कि तीन काले कृषि कानूनों के विरोध में थी।