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रामपुर में केंद्र सरकार के खिलाफ सीटू का प्रदर्शन
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रामपुर बुशहर। हिमाचल किसान सभा और सीटू ने केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ शनिवार को रामपुर, नीरथ और दत्तनगर में विरोध-प्रदर्शन किया। इसमें मजदूर विरोधी, किसान विरोधी, जन विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक सहित राष्ट्र विरोधी विनाशकारी नीतियों का जमकर विरोध किया गया।
इस दौरान सीटू शिमला जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, बिहारी सेवगी, नील दत्त शर्मा, देवेंद्र और कपिल ने कहा कि देश की सरकार ने सभी लोगों के जीवन, आजीविका और देश की अर्थव्यवस्था को आपदा की कगार तक संकट में डाल दिया है। अब संघर्ष न केवल लोगों के अधिकारों और आजीविका जीवन बचाने के लिए है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक व्यवस्था को उस आपदा और विनाश से बचाने के लिए है।
वर्ष 2021 में कोविड महामारी की दूसरी लहर के दो से तीन महीनों के दौरान 23 करोड़ श्रमिकों की आय प्रचलित वैधानिक न्यूनतम वेतन स्तर जो पहले से ही मानव अस्तित्व के मानक से नीचे है, से बहुत नीचे पहुंच गया। प्रदर्शन के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी गई कि मजदूरों और किसानों की मांगें, जिसमें सभी का इलाज मुफ्त में किया जाए और महंगाई पर अंकुश लगाया जाए।
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इसके अलावा सबको मुफ्त में वैैक्सीन, महामारी चलने तक 10 किलो प्रति व्यक्ति मुफ्त राशन, प्रत्येक परिवार को 7500 रु प्रतिमाह आर्थिक मदद, मनरेगा वर्कर को 700 रुपये दिहाड़ी और 200 दिन का रोजगार, मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं और बिजली संशोधन विधेयक 2021 को निरस्त करने की मांग उठाई गई।
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इस दौरान सीटू शिमला जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, बिहारी सेवगी, नील दत्त शर्मा, देवेंद्र और कपिल ने कहा कि देश की सरकार ने सभी लोगों के जीवन, आजीविका और देश की अर्थव्यवस्था को आपदा की कगार तक संकट में डाल दिया है। अब संघर्ष न केवल लोगों के अधिकारों और आजीविका जीवन बचाने के लिए है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक व्यवस्था को उस आपदा और विनाश से बचाने के लिए है।
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वर्ष 2021 में कोविड महामारी की दूसरी लहर के दो से तीन महीनों के दौरान 23 करोड़ श्रमिकों की आय प्रचलित वैधानिक न्यूनतम वेतन स्तर जो पहले से ही मानव अस्तित्व के मानक से नीचे है, से बहुत नीचे पहुंच गया। प्रदर्शन के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी गई कि मजदूरों और किसानों की मांगें, जिसमें सभी का इलाज मुफ्त में किया जाए और महंगाई पर अंकुश लगाया जाए।
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इसके अलावा सबको मुफ्त में वैैक्सीन, महामारी चलने तक 10 किलो प्रति व्यक्ति मुफ्त राशन, प्रत्येक परिवार को 7500 रु प्रतिमाह आर्थिक मदद, मनरेगा वर्कर को 700 रुपये दिहाड़ी और 200 दिन का रोजगार, मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं और बिजली संशोधन विधेयक 2021 को निरस्त करने की मांग उठाई गई।