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Rampur Bushahar News: शिरगुल देव की तपोस्थली के रास्तों पर न साइन बोर्ड और ठहरने की कहीं व्यवस्था
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शिमला और सिरमौर की सीमा पर 11965 फीट पर स्थित चूड़धार चोटी के लिए जाते हैं तीन रास्ते
हर साल हजारों लोग चूड़धार शिरगुल देव की तपोस्थली पहुंचते हैं, देश-विदेश से आते हैं ट्रैकर भी
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। चूड़धार शिरगुल देव की तपोस्थली तक पहुंचने के लिए आज भी श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं नहीं है। चूड़धार चोटी जिला शिमला और सिरमौर की सीमा पर 11965 फीट की ऊंचाई पर स्थित शिवालिक पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी है, यहां तक पहुंचने के लिए तीन रास्ते हैं। इन रास्तों में न साइन बोर्ड हैं, न स्ट्रीट लाइटें और न ही रास्ते में कहीं ठहरने की व्यवस्था है, जिससे श्रद्धालुओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस चोटी को जड़ी-बूटियों का खजाना कहा जाता है और सुंदर अल्पाइन वनस्पतियां इन हिमालयी ढलानों को कवर करती हैं। कुदरत का सुंदर नजारा देखने के लिए यहां देश-विदेश के ट्रैकर भी पहुंचत हैं। धार्मिक स्थल चूड़धार तक पहुंचने के लिए सबसे नजदीक रास्ता जिला शिमला की तहसील चौपाल की सरांह पंचायत की मंडाह घाटी से छह किलोमीटर पैदल है। दूसरी ओर जिला सिरमौर की तहसील नौहराधार से करीब 18 किलोमीटर पैदल लोग चूड़धार पहुंचते हैं। तहसील कुपवी से भी वाया मुनालग काकरा धार दस किलोमीटर रास्ता चूड़धार के कालाबाग पहुंचता है। सरकार ने चूड़धार के समीप कालाबाग में हेलीपैड भी बना लिया। इन रास्तों में अभी तक यात्रियों और पर्यटकों की सुविधा के लिए कोई ठिकाने मंदिर तक पहुंचने से पहले नहीं हैं। रास्ते में न तो स्ट्रीट लाइटें हैं और न ही बारिश और धूप में ठहराव के लिए पर्याप्त वर्षा शालिकाएं उपलब्घ हैं। यहां रास्ते में लोगों को पीने के लिए पानी और खान-पान की भी कोई व्यवस्था नहीं है। धुंध और बारिश में रास्ता भटकने पर कई श्रद्धालुओं और पर्यटकों की तलाश के लिए पुलिस प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके बावजूद शिरगुल पहुंचने वाले इन तीनों रास्तों में पर्याप्त साइन बोर्ड और सोलर स्ट्रीट लाइट की सही व्यवस्था नहीं है। लोगों का कहना है कि चूड़धार मंदिर पहुंचने पर वहां सरायं और खानपान की पूरी व्यवस्था जरूर है, लेकिन रास्ते में सरकार की ओर से कोई पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। यहां पर हर साल हजारों लोग गर्मी के मौसम में पहुंचते हैं। इस साल 52 साल बाद आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में हजारों लोग पहुंचे थे। धार्मिक पर्व के लिए अधिकांश लोग अपने साथ पूरी तैयारी के साथ मंदिर तक पहुंचे थे। इस मंदिर की देखरेख का जिम्मा उपमंडल प्रशासन के पास रहता है।
चूड़धार मंदिर में श्रद्धालुओं के ठहरने की उचित व्यवस्था है । चूड़ेश्वर सेवा समिति की ओर से भी श्रद्धालुओं को लंगर की व्यवस्था अप्रैल से नवंबर माह के दूसरे सप्ताह तक रहती है। सर्दी में भारी बर्फबारी के कारण कपाट आधिकारिक तौर पर बंद किए जाते हैं। कोई अप्रिय घटना न हो, इसलिए बर्फबारी में दिसंबर से लेकर मार्च माह तक यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंद रहता है। मंदिर का एक रास्ता सिरमौर जिले व दो शिमला जिले के अधीन हैं। इसमें मूलभूत सुविधाओं की समय अनुसार उपलब्धता करने के प्रयास जारी है। - हेम चंद वर्मा, चूड़धार मंदिर कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम चौपाल
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हर साल हजारों लोग चूड़धार शिरगुल देव की तपोस्थली पहुंचते हैं, देश-विदेश से आते हैं ट्रैकर भी
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। चूड़धार शिरगुल देव की तपोस्थली तक पहुंचने के लिए आज भी श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं नहीं है। चूड़धार चोटी जिला शिमला और सिरमौर की सीमा पर 11965 फीट की ऊंचाई पर स्थित शिवालिक पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी है, यहां तक पहुंचने के लिए तीन रास्ते हैं। इन रास्तों में न साइन बोर्ड हैं, न स्ट्रीट लाइटें और न ही रास्ते में कहीं ठहरने की व्यवस्था है, जिससे श्रद्धालुओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस चोटी को जड़ी-बूटियों का खजाना कहा जाता है और सुंदर अल्पाइन वनस्पतियां इन हिमालयी ढलानों को कवर करती हैं। कुदरत का सुंदर नजारा देखने के लिए यहां देश-विदेश के ट्रैकर भी पहुंचत हैं। धार्मिक स्थल चूड़धार तक पहुंचने के लिए सबसे नजदीक रास्ता जिला शिमला की तहसील चौपाल की सरांह पंचायत की मंडाह घाटी से छह किलोमीटर पैदल है। दूसरी ओर जिला सिरमौर की तहसील नौहराधार से करीब 18 किलोमीटर पैदल लोग चूड़धार पहुंचते हैं। तहसील कुपवी से भी वाया मुनालग काकरा धार दस किलोमीटर रास्ता चूड़धार के कालाबाग पहुंचता है। सरकार ने चूड़धार के समीप कालाबाग में हेलीपैड भी बना लिया। इन रास्तों में अभी तक यात्रियों और पर्यटकों की सुविधा के लिए कोई ठिकाने मंदिर तक पहुंचने से पहले नहीं हैं। रास्ते में न तो स्ट्रीट लाइटें हैं और न ही बारिश और धूप में ठहराव के लिए पर्याप्त वर्षा शालिकाएं उपलब्घ हैं। यहां रास्ते में लोगों को पीने के लिए पानी और खान-पान की भी कोई व्यवस्था नहीं है। धुंध और बारिश में रास्ता भटकने पर कई श्रद्धालुओं और पर्यटकों की तलाश के लिए पुलिस प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके बावजूद शिरगुल पहुंचने वाले इन तीनों रास्तों में पर्याप्त साइन बोर्ड और सोलर स्ट्रीट लाइट की सही व्यवस्था नहीं है। लोगों का कहना है कि चूड़धार मंदिर पहुंचने पर वहां सरायं और खानपान की पूरी व्यवस्था जरूर है, लेकिन रास्ते में सरकार की ओर से कोई पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। यहां पर हर साल हजारों लोग गर्मी के मौसम में पहुंचते हैं। इस साल 52 साल बाद आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में हजारों लोग पहुंचे थे। धार्मिक पर्व के लिए अधिकांश लोग अपने साथ पूरी तैयारी के साथ मंदिर तक पहुंचे थे। इस मंदिर की देखरेख का जिम्मा उपमंडल प्रशासन के पास रहता है।
चूड़धार मंदिर में श्रद्धालुओं के ठहरने की उचित व्यवस्था है । चूड़ेश्वर सेवा समिति की ओर से भी श्रद्धालुओं को लंगर की व्यवस्था अप्रैल से नवंबर माह के दूसरे सप्ताह तक रहती है। सर्दी में भारी बर्फबारी के कारण कपाट आधिकारिक तौर पर बंद किए जाते हैं। कोई अप्रिय घटना न हो, इसलिए बर्फबारी में दिसंबर से लेकर मार्च माह तक यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंद रहता है। मंदिर का एक रास्ता सिरमौर जिले व दो शिमला जिले के अधीन हैं। इसमें मूलभूत सुविधाओं की समय अनुसार उपलब्धता करने के प्रयास जारी है। - हेम चंद वर्मा, चूड़धार मंदिर कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम चौपाल
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