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Rampur Bushahar News: बर्फ के बीच में शिक्षा, बच्चों की कड़ी परीक्षा

Tue, 27 Jan 2026 11:39 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 27 Jan 2026 11:39 PM IST
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Children forced to study in a foot of snow at Khanag school
वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खनाग में आग सेंकते बच्चे। संवाद
लाइव रिपोर्ट
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खनाग स्कूल में एक फुट बर्फ में पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे
. शून्य तापमान में स्कूल खुले रहने से बच्चों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा
. फिसलते हुए स्कूल पहुंचते हैं, कक्षाओं में भी ठंड से कांपते नजर आते हैं बच्चे
. लोगों की मांग, इन इलाकों के लिए अलग से शीतकालीन अवकाश नीति होनी चाहिए

हरिकृष्ण शर्मा
आनी(कुल्लू)। बर्फबारी ने जहां लोगों की परेशानी बढ़ी दी है, वहीं बर्फ के बीच में शिक्षा स्कूली बच्चों की कड़ी परीक्षा ले रही है। आनी उपमंडल के ऊंचाई पर स्थित खनाग क्षेत्र में इन दिनों बर्फबारी से हालात चिंताजनक बने हुए हैं। करीब आठ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खनाग में एक फीट तक बर्फबारी हुई है। इस बीच बच्चे रोजाना स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। इस विद्यालय में करीब 175 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि इससे जुड़ी प्राथमिक पाठशाला में लगभग 40 नौनिहाल पढ़ते हैं। सर्दी के इस प्रचंड मौसम में बर्फबारी और शून्य के आसपास तापमान के बावजूद स्कूल खुले रहने से बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह के समय बच्चे जमी हुई बर्फ पर फिसलते हुए स्कूल पहुंचते हैं और कक्षाओं में भी ठंड से कांपते नजर आते हैं। ठंड से राहत देने के लिए स्कूल प्रशासन ने आग सेंकने की अस्थायी व्यवस्था की है, लेकिन यह व्यवस्था कितने समय तक सुरक्षित और पर्याप्त रहेगी।। खासकर, प्राथमिक पाठशाला के छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति और भी अधिक मुश्किल बनी हुई है। अत्यधिक ठंड में लंबे समय तक बैठना उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। स्थिति को और गंभीर बना देती है, क्षेत्र में बार-बार बाधित होने वाली बिजली आपूर्ति। बिजली गुल होने से कक्षाओं में हीटर या अन्य वैकल्पिक साधनों का उपयोग संभव नहीं हो पाता है। इससे बच्चों और शिक्षकों दोनों को परेशानी झेलनी पड़ती है। यहां मिड-डे मील का भोजन बनाने के लिए भी वर्करों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है, जो खाना एक घंटे में बन जाता था वो चार घंटे में बन रहा है।
यहां सर्दियों में स्कूल खुले रखना नहीं न्यायसंगत
स्थानीय लोगों में पूर्व उपप्रधान बीएस राणा, पूर्व प्रधान बेली राम ठाकुर का कहना है कि निचले क्षेत्रों, जहां बर्फबारी नहीं होती, वहां सर्दियों में स्कूल खुले रखना उचित हो सकता है, लेकिन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एक जैसा निर्णय लागू करना न्यायसंगत नहीं है। उनका मानना है कि इन इलाकों के लिए अलग से शीतकालीन अवकाश नीति होनी चाहिए।
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छुट्टियां देने का उठाया था मुद्दा : लोकेंद्र
इस विषय पर आनी विधानसभा क्षेत्र के विधायक लोकेंद्र कुमार ने भी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि बीते सत्र में विधानसभा में उन्होंने सर्दियों के दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्कूलों को छुट्टियां देने का मुद्दा उठाया था। विधायक ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोपरि है और इस समस्या को वे दोबारा सरकार के समक्ष मजबूती से उठाएंगे।

वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खनाग में आग सेंकते बच्चे। संवाद

वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खनाग में आग सेंकते बच्चे। संवाद

वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खनाग में आग सेंकते बच्चे। संवाद

वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खनाग में आग सेंकते बच्चे। संवाद

वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खनाग में आग सेंकते बच्चे। संवाद

वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खनाग में आग सेंकते बच्चे। संवाद

वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खनाग में आग सेंकते बच्चे। संवाद

वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खनाग में आग सेंकते बच्चे। संवाद

वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खनाग में आग सेंकते बच्चे। संवाद

वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खनाग में आग सेंकते बच्चे। संवाद

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