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सांगला वैली के किसान काले जीरे की करें खेती: हरीद्र कुमार
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कृषि विश्व विद्यालय पालमपुर के जैवीक कृषि प्राकृतिक खेत विभाग के सौजन्य सांगला में आयोजित कार्य
- फोटो : RAMPUR-HP
सांगला (किन्नौर)। कृषि विश्व विद्यालय पालमपुर के जैविक कृषि प्राकृतिक खेत विभाग ने जनजातीय उपयोजना के तहत कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें कृषि विश्व विद्यालय पालमपुर के प्रोफेसर हरिंद्र कुमार चौधरी कुलपति बतौर मुख्यातिथि मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित सांगला वैली के बागवानों और कृषकों को सेब की खेती के साथ-साथ कालाजीरा के खेती को अपनाने का भी आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यहां पर कालाजीरा की खेती को अपनाकर जिले के बागवान आर्थिकी को मजबूत कर सकते हैं।
जापान की सहयोग से कालाजीरा के अनुसंधान के लिए 30 लाख की परियोजना स्वीकृत हुई हैं जबकि वही केसर की खेती के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार से 70 लाख की स्वीकृति मिल चुकी है। इस पर जल्द ही कार्य शुरू किया जाएगा। अनुसंधान केंद्र कुप्पा में भी जल्द जागरूकता शिविर का आयोजन किया जाएगा। कार्यशाला के दौरान बागवानी वैज्ञानिक डॉ. रमेश राणा कार्यशाला में उपस्थित बागवानों को सेब के विभिन्न बीमारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
खासकर सेब के बगीचों में फैल रही स्कैब, स्केल, माइट, वूली एफिड सहित कई अन्य बीमारियों के रोकथाम के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. देशराज चौधरी ने सब्जियों की खेती के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि यहां के बागवान और कृषक ब्रोकली, लेट्यूज, कद्दू और मटर सहित कई अन्य तरह के सब्जियों को उगाने पर बल दिया हैं।
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डॉ. वीके सूद ने सभी बागवानों को बगीचों में आसानी से उगाए जाने वाले चारा घास का महत्व भी बताया। इससे लोग अधिक से अधिक उगाकर सर्दियों में सूखे चारे के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
शिविर में सांगला वैली के आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों से पहुंचे बागवानों को एक दराट और कुटी भी वितरित की गई। इस अवसर पर डॉ. प्रवीण लता चौधरी, डॉ. एसपी दीक्षित, डॉ. सतीश पाल, डॉ. मनदीप शर्मा, डॉ. वीके सूद, डॉ. पूनम, डॉ. देविना शर्मा, डॉ. एनडी नेगी, डॉ. फरहान भट्ट ,डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. आरके मित्तल, कुलपति सचिव सुरेंद्र कुमार नेगी, प्रधान बटसेरी प्रदीप नेगी, पूर्व उपप्रधान सांगला भूपेश नेगी सहित सांगला वैली के आधा दर्जन से अधिक बागवानों और कृषकों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।
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जापान की सहयोग से कालाजीरा के अनुसंधान के लिए 30 लाख की परियोजना स्वीकृत हुई हैं जबकि वही केसर की खेती के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार से 70 लाख की स्वीकृति मिल चुकी है। इस पर जल्द ही कार्य शुरू किया जाएगा। अनुसंधान केंद्र कुप्पा में भी जल्द जागरूकता शिविर का आयोजन किया जाएगा। कार्यशाला के दौरान बागवानी वैज्ञानिक डॉ. रमेश राणा कार्यशाला में उपस्थित बागवानों को सेब के विभिन्न बीमारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
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खासकर सेब के बगीचों में फैल रही स्कैब, स्केल, माइट, वूली एफिड सहित कई अन्य बीमारियों के रोकथाम के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. देशराज चौधरी ने सब्जियों की खेती के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि यहां के बागवान और कृषक ब्रोकली, लेट्यूज, कद्दू और मटर सहित कई अन्य तरह के सब्जियों को उगाने पर बल दिया हैं।
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डॉ. वीके सूद ने सभी बागवानों को बगीचों में आसानी से उगाए जाने वाले चारा घास का महत्व भी बताया। इससे लोग अधिक से अधिक उगाकर सर्दियों में सूखे चारे के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
शिविर में सांगला वैली के आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों से पहुंचे बागवानों को एक दराट और कुटी भी वितरित की गई। इस अवसर पर डॉ. प्रवीण लता चौधरी, डॉ. एसपी दीक्षित, डॉ. सतीश पाल, डॉ. मनदीप शर्मा, डॉ. वीके सूद, डॉ. पूनम, डॉ. देविना शर्मा, डॉ. एनडी नेगी, डॉ. फरहान भट्ट ,डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. आरके मित्तल, कुलपति सचिव सुरेंद्र कुमार नेगी, प्रधान बटसेरी प्रदीप नेगी, पूर्व उपप्रधान सांगला भूपेश नेगी सहित सांगला वैली के आधा दर्जन से अधिक बागवानों और कृषकों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।