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Rampur Bushahar News: हथियारों से लैस देवलुओं ने किया पारंपरिक नृत्य
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उज्जैन मेले में नाचते देवताओं के गुर। संवाद
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रनोल में पारंपरिक उज्जैन मेला संपन्न
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे
देव मिलन और पारंपरिक नृत्य देखने हजारों लोग पहुंचे रनोल, तीन दिन चला मेहमान नवाजी का दौर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। रनोल में आयोजित तीन दिवसीय पारंपरिक उज्जैन मेला रविवार को संपन्न हो गया। मेले में पारंपरिक वेशभूषा में सजे देवलुओं का हथियारों के साथ नृत्य और देवी-देवताओं का मिलन मुख्य आकर्षण रहा। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी मेले में विशेष रूप से शिरकत की।
हर तीसरे वर्ष आयोजित होने वाले इस मेले में रामपुर के सेरी मझाली से देवता खंटू महाराज और रनोल के देवता खंटू महाराज शामिल हुए। इसके अलावा गुमना से किलबालु देवता और रनोल के किलबालु देवता भी मेले में मौजूद रहे। मेले का आयोजन दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग मिलकर करते हैं।
देवता खंटू महाराज रनोल के सानिध्य में आयोजित मेले में देवलुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में हथियारों से लैस होकर पुरातन रीति-रिवाजों और कथाओं का मंचन किया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर देवलुओं ने नृत्य प्रस्तुत किया। देवताओं के मिलन और पारंपरिक नृत्य को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मेले में पहुंचे। स्थानीय लोगों ने भी नृत्य कर मेले का आनंद लिया। तीन दिनों तक रनोल में मेहमान नवाजी का दौर चलता रहा।
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देवता खंटू महाराज के मोतमीन दीवान मेहता ने बताया कि उज्जैन मेले का आयोजन हर तीसरे वर्ष पुरातन परंपराओं के अनुसार किया जाता है। मेले में रामपुर के सेरी मझाली से देवता खंटू महाराज विशेष रूप से पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि मेले में सभी क्षेत्रवासी उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।
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लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे
देव मिलन और पारंपरिक नृत्य देखने हजारों लोग पहुंचे रनोल, तीन दिन चला मेहमान नवाजी का दौर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। रनोल में आयोजित तीन दिवसीय पारंपरिक उज्जैन मेला रविवार को संपन्न हो गया। मेले में पारंपरिक वेशभूषा में सजे देवलुओं का हथियारों के साथ नृत्य और देवी-देवताओं का मिलन मुख्य आकर्षण रहा। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी मेले में विशेष रूप से शिरकत की।
हर तीसरे वर्ष आयोजित होने वाले इस मेले में रामपुर के सेरी मझाली से देवता खंटू महाराज और रनोल के देवता खंटू महाराज शामिल हुए। इसके अलावा गुमना से किलबालु देवता और रनोल के किलबालु देवता भी मेले में मौजूद रहे। मेले का आयोजन दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग मिलकर करते हैं।
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देवता खंटू महाराज रनोल के सानिध्य में आयोजित मेले में देवलुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में हथियारों से लैस होकर पुरातन रीति-रिवाजों और कथाओं का मंचन किया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर देवलुओं ने नृत्य प्रस्तुत किया। देवताओं के मिलन और पारंपरिक नृत्य को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मेले में पहुंचे। स्थानीय लोगों ने भी नृत्य कर मेले का आनंद लिया। तीन दिनों तक रनोल में मेहमान नवाजी का दौर चलता रहा।
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देवता खंटू महाराज के मोतमीन दीवान मेहता ने बताया कि उज्जैन मेले का आयोजन हर तीसरे वर्ष पुरातन परंपराओं के अनुसार किया जाता है। मेले में रामपुर के सेरी मझाली से देवता खंटू महाराज विशेष रूप से पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि मेले में सभी क्षेत्रवासी उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।