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मौसम का बदला रुख सेब के लिए नुकसानदायक
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रोहड़ू। क्षेत्र में करीब एक महीने तक मौसम गर्म रहने के बाद अब आए दिन हो रही बारिश से तानमान में काफी गिरावर्ट आई है। मौसम के लगातार बदल रहे तेवर सेब उत्पादन के लिए नुकसान दायक रहने के संकेत हैं। बागवानी विशेषज्ञाें की मानें तो जल्द तापमान में बढ़ोतरी नहीं हुई तो सेब सीजन से पहले फल विकास पूरा नहीं होगा। विशेषज्ञ खराब मौसम को सेब उत्पादन के लिए नुकसान दायक मान रहे हैं।
मार्च और अप्रैल के महीने में तापमान में बढ़ोतरी के बाद फिर ठंड होने से बागवानी विशेषज्ञ सेब के फलों को विकसित होने के लिए अनुकूल नहीं मान रहे। विशेषज्ञों की मानें तो अब जमीन में नमी पूरी हो चुकी है। इसलिए मई से जुलाई तक गर्मी रहना जरूरी है। मौसम गर्म रहने के कारण सेब के फलों का पूरा विकास होता है। कम तापमान में फल का विकास थम जाता है। लगातार खराब मौसम के कारण सेब के पौधों में बीमारी के संक्रमण की अधिक संभावनाएं रहती हैं। फल विकास रुका तो सेब का अनुमानित उत्पादन भी कम होगा।
बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि तीन-चार दिन से शाम के समय लगातार बारिश और बूंदाबांदी से तापमान कम हो रहा है। ऐसे में फलों का विकास देर तक चलने के कारण सेब तुड़ान का काम भी देरी से शुरू होता है। उनका कहना है कि बारिश के बाद सेब के पौधों में पतझड़ रोग के संक्रमण आने की पूरी संभावना रहती है। उनका कहना है कि इसलिए मौसम साफ होने के बाद बागवान बगीचों में पतझड़ रोग के संक्रमण को रोकने के लिए उद्यान विभाग की ओर से जारी की गई सारिणी के अनुसार दवाइयों का छिड़काव करें। उन्होंने कहा कि बागवान सेब के पौधों में विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार दवाइयों का छिड़काव करे। गलत दवाई का छिड़काव फल और पौधे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
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गौर रहे कि तीन-चार दिन से शिमला जिले से सेब बाहुल क्षेत्र में कई जगहों पर ओलावृष्टि से बागवानों को भारी नुकसान हुआ है, जबकि पहले लोग सूखे से जूझ रहे थे। अब शाम के समय हर दिन बारिश के कारण तापमान लगातार गिर रहा है। ऐसे में फल का विकास रुक गया तो नई परेशानी खड़ी होने वाली है। पहले सूखे और अब खराब मौसम में ओलावृष्टि की संभावना बागवानों के लिए चुनौती खड़ी करती रही है।
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मार्च और अप्रैल के महीने में तापमान में बढ़ोतरी के बाद फिर ठंड होने से बागवानी विशेषज्ञ सेब के फलों को विकसित होने के लिए अनुकूल नहीं मान रहे। विशेषज्ञों की मानें तो अब जमीन में नमी पूरी हो चुकी है। इसलिए मई से जुलाई तक गर्मी रहना जरूरी है। मौसम गर्म रहने के कारण सेब के फलों का पूरा विकास होता है। कम तापमान में फल का विकास थम जाता है। लगातार खराब मौसम के कारण सेब के पौधों में बीमारी के संक्रमण की अधिक संभावनाएं रहती हैं। फल विकास रुका तो सेब का अनुमानित उत्पादन भी कम होगा।
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बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि तीन-चार दिन से शाम के समय लगातार बारिश और बूंदाबांदी से तापमान कम हो रहा है। ऐसे में फलों का विकास देर तक चलने के कारण सेब तुड़ान का काम भी देरी से शुरू होता है। उनका कहना है कि बारिश के बाद सेब के पौधों में पतझड़ रोग के संक्रमण आने की पूरी संभावना रहती है। उनका कहना है कि इसलिए मौसम साफ होने के बाद बागवान बगीचों में पतझड़ रोग के संक्रमण को रोकने के लिए उद्यान विभाग की ओर से जारी की गई सारिणी के अनुसार दवाइयों का छिड़काव करें। उन्होंने कहा कि बागवान सेब के पौधों में विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार दवाइयों का छिड़काव करे। गलत दवाई का छिड़काव फल और पौधे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
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गौर रहे कि तीन-चार दिन से शिमला जिले से सेब बाहुल क्षेत्र में कई जगहों पर ओलावृष्टि से बागवानों को भारी नुकसान हुआ है, जबकि पहले लोग सूखे से जूझ रहे थे। अब शाम के समय हर दिन बारिश के कारण तापमान लगातार गिर रहा है। ऐसे में फल का विकास रुक गया तो नई परेशानी खड़ी होने वाली है। पहले सूखे और अब खराब मौसम में ओलावृष्टि की संभावना बागवानों के लिए चुनौती खड़ी करती रही है।