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बगीचों से गायब हो रही रॉयल डिलीशियस सेब की बादशाहत
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रामपुर बुशहर। देश-विदेश में अपने शाही स्वाद के लिए मशहूर रॉयल डिलीशियस सेब अब बागवानों के बगीचों से गायब होता नजर आ रहा है। सेब बाहुल क्षेत्रों के बगीचों से रॉयल की बादशाहत धीरे धीरे समाप्त होती जा रही है। बदलते समय के साथ अब बागवानों का स्पर की विभिन्न किस्मों के सेब बगीचे तैयार करने की ओर रुझान बढ़ रहा है। ऊपरी शिमला, आउटर सिराज और जिला किन्नौर में स्पर सेब वैरायटी बागवानों की पहली पसंद बन रही है।
गौर हो कि दशकों से रॉयल डिलीशियस बगीचों में तैयार किया जाता रहा है, लेकिन बीते चार-पांच वर्षों से बागवान अब स्पर की विभिन्न वैरायटी के सेब तैयार करने में जुटे हुए हैं। रॉयल सेब के बगीचे को तैयार करने में जहां 10 से 12 वर्ष का समय लग जाता है, वहीं स्पर वैरायटी के सेब बगीचों में करीब तीन वर्ष में ही नकदी फसल तैयार होना शुरू हो जाती है। जाहिर है कि बागवानों का रुझान स्पर की ओर ही बढ़ेगा। दशकों से तैयार हो रहा रॉयल सेब देश की मार्केट में प्रति पेटी करीब 2000 से 2500 रुपये प्रति बिकता है, वहीं स्पर की प्रति पेटी के करीब 3 हजार से 4 हजार रुपये दाम बागवानों को मिल रहे हैं। इसका प्रमुख कारण यही है कि बागवानों को समय रहते ही पौधे से फल मिलना और बेहतर दाम मिलना है, जिसके कारण रॉयल सेब के पौधों को बागवान नकार रहे हैं। बीते वर्ष भी बागवानों को स्पर वैरायटी के शिमला मंडी में करीब 4400 रुपये प्रति पेटी दाम मिले थे और बागवानों को खासा आर्थिक लाभ भी मिला। हालांकि स्वाद से भरपूर रॉयल डिलीशियस सेब का दौर अब धीरे धीरे समाप्त हो रहा है।
प्रगतिशाील बागवान रणजीत ठाकुर, सुनील चौहान, दयाल कायथ, प्रेम राज, कीर्तिमान, दुष्यंत मेहता, दुर्गा प्रसाद, भीमसेन, लोकेंद्र ठाकुर ने कहा कि रॉयल की अपेक्षा स्पर वैरायटी से समय पर फसल और अधिक दाम मिल रहे हैं, जिसके चलते बागवानों की आर्थिकी मजबूत हो रही है। इसी के चलते बागवान स्पर वैरायटी के सेब को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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बॉक्स
- स्पर वैरायटी के जेरोमाइन, स्कारलेट-2 3500 से 4500 फुट की ऊंचाई, एडम, रेडविलाक्स और किंग राट 4500 से 8000 फीट की ऊंचाई पर तैयार किए जा सकते हैं। वहीं रॉयल डिलीशियस पांच हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैयार किया जाता है।
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गौर हो कि दशकों से रॉयल डिलीशियस बगीचों में तैयार किया जाता रहा है, लेकिन बीते चार-पांच वर्षों से बागवान अब स्पर की विभिन्न वैरायटी के सेब तैयार करने में जुटे हुए हैं। रॉयल सेब के बगीचे को तैयार करने में जहां 10 से 12 वर्ष का समय लग जाता है, वहीं स्पर वैरायटी के सेब बगीचों में करीब तीन वर्ष में ही नकदी फसल तैयार होना शुरू हो जाती है। जाहिर है कि बागवानों का रुझान स्पर की ओर ही बढ़ेगा। दशकों से तैयार हो रहा रॉयल सेब देश की मार्केट में प्रति पेटी करीब 2000 से 2500 रुपये प्रति बिकता है, वहीं स्पर की प्रति पेटी के करीब 3 हजार से 4 हजार रुपये दाम बागवानों को मिल रहे हैं। इसका प्रमुख कारण यही है कि बागवानों को समय रहते ही पौधे से फल मिलना और बेहतर दाम मिलना है, जिसके कारण रॉयल सेब के पौधों को बागवान नकार रहे हैं। बीते वर्ष भी बागवानों को स्पर वैरायटी के शिमला मंडी में करीब 4400 रुपये प्रति पेटी दाम मिले थे और बागवानों को खासा आर्थिक लाभ भी मिला। हालांकि स्वाद से भरपूर रॉयल डिलीशियस सेब का दौर अब धीरे धीरे समाप्त हो रहा है।
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प्रगतिशाील बागवान रणजीत ठाकुर, सुनील चौहान, दयाल कायथ, प्रेम राज, कीर्तिमान, दुष्यंत मेहता, दुर्गा प्रसाद, भीमसेन, लोकेंद्र ठाकुर ने कहा कि रॉयल की अपेक्षा स्पर वैरायटी से समय पर फसल और अधिक दाम मिल रहे हैं, जिसके चलते बागवानों की आर्थिकी मजबूत हो रही है। इसी के चलते बागवान स्पर वैरायटी के सेब को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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- स्पर वैरायटी के जेरोमाइन, स्कारलेट-2 3500 से 4500 फुट की ऊंचाई, एडम, रेडविलाक्स और किंग राट 4500 से 8000 फीट की ऊंचाई पर तैयार किए जा सकते हैं। वहीं रॉयल डिलीशियस पांच हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैयार किया जाता है।