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Rampur Bushahar News: मौसम की बेरुखी ने उड़ाई बगीचों से लाली आनी-निरमंड में 60 प्रतिशत तक घटा सेब उत्पादन
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बागवान देवेंद्र शर्मा । अभियान
अभियान : सेब उत्पादन में गिरावट की आशंका अब धरातल पर दिखने लगी
लोअर और मिडल बेल्ट में अपेक्षा से कम हुआ सेब उत्पादन
हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)।
प्रदेश में इस बार सेब उत्पादन में भारी गिरावट रहने की आशंका जताई गई है, जो अब धरातल भी दिखने लगी है। मौसम की बेरुखी ने इस बार बगीचों से सेब की लाली उड़ा दी है। जिन बगीचों में सेब की 900 पेटियां का उत्पादन होता था। इस बार सिर्फ 100 से 120 तक ही सेब की पेटियां निकल पाई हैं। जिन बगीचों में सेब की 50 से 100 पेटियां निकलती थीं, उनमें इस सेब का उत्पादन बेचने लायक नहीं हुआ। आनी और निरमंड क्षेत्र में इस वर्ष सेब की 12 लाख पेटियां कम होने के आसार लगाए गए हैं। उद्यान विभाग की ओर से जारी अनुमानित फसल आकलन के अनुसार पिछले वर्ष जहां विधानसभा क्षेत्र में करीब 20 लाख सेब पेटियों का कारोबार हुआ था, वहीं इस बार यह आंकड़ा घटकर करीब 8 से 9 लाख पेटियों तक सीमित रहने का अनुमान है। ऐसे में दोनों क्षेत्रों में 60 प्रतिशत सेब की पैदावार घटने की आशंका है। हालात ऐसे हैं कि बागवानी पर हुए खर्च की भरपाई करना भी मुश्किल हो गया है। बागवानों का कहना है कि लोअर और मिडिल बेल्ट में इस बार बहुत कम सेब का उत्पादन हुआ है। सर्दियों में अपेक्षित बर्फबारी नहीं हुई, जिससे सेब के पौधों को पर्याप्त चिलिंग ऑवर्स नहीं मिल सके। इसके बाद वसंत ऋतु में तापमान में असामान्य उतार-चढ़ाव, ओलावृष्टि, तेज हवाओं और कई क्षेत्रों में बेमौसम बारिश ने फूलों और शुरुआती फलों को नुकसान पहुंचाया। निचले और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में बढ़ती गर्मी ने भी उत्पादन क्षमता को प्रभावित किया। इस कारण प्रदेश के कई प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में फल की सेटिंग कमजोर रही।
बागवानों ने कहा
-आनी के बागवान देवेंद्र शर्मा का कहना है कि पिछले वर्ष उनके सेब बगीचे से 200 से 250 पेटियां निकली थीं। इस बार 40 पेटियों में सिमट कर रह गया है।
-बागवान संजय कायथ का कहना है कि उनके बगीचे में करीब 900 सेब पेटियां निकलती थीं। इस साल महज 120 सेब पेटियां ही निकल पाई हैं। सालभर का बगीचे का खर्चा भी पूरा नहीं हुआ है।
-बागवान दिनेश कायथ का कहना है कि मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्र में उनके बगीचे से 400 सेब पेटियां निकलती थीं। इस बार महज 70 पेटियां निकलीं, जबकि सेब सीजन समाप्त हो गया है।
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बागवानी खर्च की भरपाई भी हुई मुश्किल
बागवानों ने यह भी बताया कि कम उत्पादन के कारण मंडियों तक भेजने के लिए कई बार एक पूरी गाड़ी का लोड भी तैयार नहीं हो पा रही है। बागवानों का कहना है कि इस बार उत्पादन में भारी कमी के चलते सेब से बागवानी पर हुए खर्च की भरपाई करना भी मुश्किल हो गया है, जिससे क्षेत्र के हजारों बागवान आर्थिक रूप से प्रभावित होंगे।
आनी, निरमंड में सेब की 12 लाख कम पेटियों का उत्पादन
क्षेत्र में इन दिनों सेब सीजन चरम पर है। निचले क्षेत्रों का अधिकांश सेब सीजन समाप्त हो चुका है, जबकि मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी अगले दस दिनों के भीतर तुड़ान लगभग पूरी होने की आशंका है।
इस बार लोअर और मिडिल बेल्ट में सेब की फसल काफी कम रही है। हालांकि, ऊंचाई वाले अधिकांश क्षेत्रों में कुछ स्थानों को छोड़कर फसल अपेक्षाकृत अच्छी है। विभाग ने पूरे विधानसभा क्षेत्र में कुल 8 से 9 लाख सेब पेटियों के उत्पादन का अनुमान जारी किया है। - बलवीर चौहान, विषयवाद विशेषज्ञ, बागवानी विभाग
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लोअर और मिडल बेल्ट में अपेक्षा से कम हुआ सेब उत्पादन
हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)।
प्रदेश में इस बार सेब उत्पादन में भारी गिरावट रहने की आशंका जताई गई है, जो अब धरातल भी दिखने लगी है। मौसम की बेरुखी ने इस बार बगीचों से सेब की लाली उड़ा दी है। जिन बगीचों में सेब की 900 पेटियां का उत्पादन होता था। इस बार सिर्फ 100 से 120 तक ही सेब की पेटियां निकल पाई हैं। जिन बगीचों में सेब की 50 से 100 पेटियां निकलती थीं, उनमें इस सेब का उत्पादन बेचने लायक नहीं हुआ। आनी और निरमंड क्षेत्र में इस वर्ष सेब की 12 लाख पेटियां कम होने के आसार लगाए गए हैं। उद्यान विभाग की ओर से जारी अनुमानित फसल आकलन के अनुसार पिछले वर्ष जहां विधानसभा क्षेत्र में करीब 20 लाख सेब पेटियों का कारोबार हुआ था, वहीं इस बार यह आंकड़ा घटकर करीब 8 से 9 लाख पेटियों तक सीमित रहने का अनुमान है। ऐसे में दोनों क्षेत्रों में 60 प्रतिशत सेब की पैदावार घटने की आशंका है। हालात ऐसे हैं कि बागवानी पर हुए खर्च की भरपाई करना भी मुश्किल हो गया है। बागवानों का कहना है कि लोअर और मिडिल बेल्ट में इस बार बहुत कम सेब का उत्पादन हुआ है। सर्दियों में अपेक्षित बर्फबारी नहीं हुई, जिससे सेब के पौधों को पर्याप्त चिलिंग ऑवर्स नहीं मिल सके। इसके बाद वसंत ऋतु में तापमान में असामान्य उतार-चढ़ाव, ओलावृष्टि, तेज हवाओं और कई क्षेत्रों में बेमौसम बारिश ने फूलों और शुरुआती फलों को नुकसान पहुंचाया। निचले और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में बढ़ती गर्मी ने भी उत्पादन क्षमता को प्रभावित किया। इस कारण प्रदेश के कई प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में फल की सेटिंग कमजोर रही।
बागवानों ने कहा
-आनी के बागवान देवेंद्र शर्मा का कहना है कि पिछले वर्ष उनके सेब बगीचे से 200 से 250 पेटियां निकली थीं। इस बार 40 पेटियों में सिमट कर रह गया है।
-बागवान संजय कायथ का कहना है कि उनके बगीचे में करीब 900 सेब पेटियां निकलती थीं। इस साल महज 120 सेब पेटियां ही निकल पाई हैं। सालभर का बगीचे का खर्चा भी पूरा नहीं हुआ है।
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-बागवान दिनेश कायथ का कहना है कि मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्र में उनके बगीचे से 400 सेब पेटियां निकलती थीं। इस बार महज 70 पेटियां निकलीं, जबकि सेब सीजन समाप्त हो गया है।
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बागवानी खर्च की भरपाई भी हुई मुश्किल
बागवानों ने यह भी बताया कि कम उत्पादन के कारण मंडियों तक भेजने के लिए कई बार एक पूरी गाड़ी का लोड भी तैयार नहीं हो पा रही है। बागवानों का कहना है कि इस बार उत्पादन में भारी कमी के चलते सेब से बागवानी पर हुए खर्च की भरपाई करना भी मुश्किल हो गया है, जिससे क्षेत्र के हजारों बागवान आर्थिक रूप से प्रभावित होंगे।
आनी, निरमंड में सेब की 12 लाख कम पेटियों का उत्पादन
क्षेत्र में इन दिनों सेब सीजन चरम पर है। निचले क्षेत्रों का अधिकांश सेब सीजन समाप्त हो चुका है, जबकि मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी अगले दस दिनों के भीतर तुड़ान लगभग पूरी होने की आशंका है।
इस बार लोअर और मिडिल बेल्ट में सेब की फसल काफी कम रही है। हालांकि, ऊंचाई वाले अधिकांश क्षेत्रों में कुछ स्थानों को छोड़कर फसल अपेक्षाकृत अच्छी है। विभाग ने पूरे विधानसभा क्षेत्र में कुल 8 से 9 लाख सेब पेटियों के उत्पादन का अनुमान जारी किया है। - बलवीर चौहान, विषयवाद विशेषज्ञ, बागवानी विभाग

बागवान देवेंद्र शर्मा । अभियान

बागवान देवेंद्र शर्मा । अभियान