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Rampur Bushahar News: जन प्रतिनिधि चुनने के लिए नहीं मिला अधिकार, पांच पंचायतों में मिला दिए 300 परिवार
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विभाग ने सीधे ही जनता को थोप दी पंचायतें, नगर
पंचायत रद्द होने के बाद बिना जनप्रतिनिधि 300 से ज्यादा परिवार
इन परिवारों की पंचायत चुनावों में भूमिका नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी( कुल्लू)। आनी कस्बे के 300 से ज्यादा परिवारों के लोगों ने न तो पंचायत चुनाव में भाग लिया और न ही अपने पसंदीदा जन प्रतिनिधि को चुनने का मौका मिल सका। सरकार ने दो वर्ष पूर्व इन परिवारों को पांच अलग-अलग पंचायतों नम्होंग, कराणा-1, बखनाओं, कुंगश और आनी में शामिल होने का फरमान जारी कर दिया। बेशक, नगर पंचायत के गठन की अधिसूचना रद्द होने का कारण दिक्कतें पेश आई हों, लेकिन वर्तमान में आलम यह है कि दो सालों से उक्त परिवार लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भागीदारी निभाए बिना ही पंचायतों का हिस्सा बने हुए हैं। इन परिवारों ने न तो वार्ड सदस्यों को चुना है, न ही पंचायत के प्रधान और उप प्रधान बनाने में अपना लोकतांत्रिक योगदान दिया है। लेकिन इन परिवारों को पंचायत के नियम कायदे मानने को मजबूर होना पड़ रहा है।
पंचायत में मतदान नहीं किया फिर भी पंचायत का हिस्सा
आनी कस्बे के लोगों ने पंचायत के लिए अंतिम बार वर्ष 2015 में मतदान किया था। इसके बाद वर्ष 2020 में नगर पंचायत के गठन के बाद लोगों ने नगर पंचायत में जन प्रतिनिधि चुने। वर्ष 2022 में अधिसूचना रद्द होने के बाद लोगों पर उन पंचायतों में शामिल किया गया, जिसके जन प्रतिनिधि चुनने में आनी कस्बे के लोगों का कोई योगदान नहीं है। आनी कस्बे के लोग बिना मतदान किए पंचायतों में शामिल किए गए हैं। अधिकतर लोगों के अभी तक जॉब कार्ड भी नहीं बन पाए हैं, क्योंकि पूर्व में बने इनके मनरेगा जॉब कार्ड भी निष्क्रिय हो गए हैं। ऐसे में जनता अपने-आप को असहाय महसूस कर रही है। जनता को आस थी कि नगर पंचायत निरस्त होने के बाद कस्बे में रहने वाले लोग लोकतांत्रिक तरीके से अपना नेता चुनते, ताकि कस्बे वासी गर्व से अपने नेता के माध्यम से अपने कार्यों को करवा सकें। इसके विपरीत जनता को उनके नेता थोपे गए हैं।
हर जगह मतदान हुआ है, लेकिन आनी कस्बे की जनता को बिना मतदान के ही उनके नेता थोपे गए हैं। आनी की जनता को लावारिस समझा गया है। - शशि मल्होत्रा, पूर्व पार्षद, आनी
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आनी की जनता के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। कस्बे की जनता परेशान हैं, कोई कार्य नहीं हो रहे हैं। जबरदस्ती जनता को पंचायतें थोपी गई हैं। -लोकेंद्र कुमार, विधायक, आनी विधानसभा क्षेत्र
नगर पंचायत निरस्त होने के बाद सरकार ने कस्बे की जनता को पुरानी पंचायतों में मर्ज किया है। पांचों पंचायतों में सम्मलित जनता के कार्य संबंधित पंचायतें ही देखेंगी। मनरेगा जॉब कार्ड के लिए कस्बे वासी अपनी संबंधित पंचायतों में आवेदन कर अपने जॉब कार्ड बनवा लें। - विनोद कटोच, कार्यकारी बीडीओ आनी
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पंचायत रद्द होने के बाद बिना जनप्रतिनिधि 300 से ज्यादा परिवार
इन परिवारों की पंचायत चुनावों में भूमिका नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी( कुल्लू)। आनी कस्बे के 300 से ज्यादा परिवारों के लोगों ने न तो पंचायत चुनाव में भाग लिया और न ही अपने पसंदीदा जन प्रतिनिधि को चुनने का मौका मिल सका। सरकार ने दो वर्ष पूर्व इन परिवारों को पांच अलग-अलग पंचायतों नम्होंग, कराणा-1, बखनाओं, कुंगश और आनी में शामिल होने का फरमान जारी कर दिया। बेशक, नगर पंचायत के गठन की अधिसूचना रद्द होने का कारण दिक्कतें पेश आई हों, लेकिन वर्तमान में आलम यह है कि दो सालों से उक्त परिवार लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भागीदारी निभाए बिना ही पंचायतों का हिस्सा बने हुए हैं। इन परिवारों ने न तो वार्ड सदस्यों को चुना है, न ही पंचायत के प्रधान और उप प्रधान बनाने में अपना लोकतांत्रिक योगदान दिया है। लेकिन इन परिवारों को पंचायत के नियम कायदे मानने को मजबूर होना पड़ रहा है।
पंचायत में मतदान नहीं किया फिर भी पंचायत का हिस्सा
आनी कस्बे के लोगों ने पंचायत के लिए अंतिम बार वर्ष 2015 में मतदान किया था। इसके बाद वर्ष 2020 में नगर पंचायत के गठन के बाद लोगों ने नगर पंचायत में जन प्रतिनिधि चुने। वर्ष 2022 में अधिसूचना रद्द होने के बाद लोगों पर उन पंचायतों में शामिल किया गया, जिसके जन प्रतिनिधि चुनने में आनी कस्बे के लोगों का कोई योगदान नहीं है। आनी कस्बे के लोग बिना मतदान किए पंचायतों में शामिल किए गए हैं। अधिकतर लोगों के अभी तक जॉब कार्ड भी नहीं बन पाए हैं, क्योंकि पूर्व में बने इनके मनरेगा जॉब कार्ड भी निष्क्रिय हो गए हैं। ऐसे में जनता अपने-आप को असहाय महसूस कर रही है। जनता को आस थी कि नगर पंचायत निरस्त होने के बाद कस्बे में रहने वाले लोग लोकतांत्रिक तरीके से अपना नेता चुनते, ताकि कस्बे वासी गर्व से अपने नेता के माध्यम से अपने कार्यों को करवा सकें। इसके विपरीत जनता को उनके नेता थोपे गए हैं।
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हर जगह मतदान हुआ है, लेकिन आनी कस्बे की जनता को बिना मतदान के ही उनके नेता थोपे गए हैं। आनी की जनता को लावारिस समझा गया है। - शशि मल्होत्रा, पूर्व पार्षद, आनी
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आनी की जनता के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। कस्बे की जनता परेशान हैं, कोई कार्य नहीं हो रहे हैं। जबरदस्ती जनता को पंचायतें थोपी गई हैं। -लोकेंद्र कुमार, विधायक, आनी विधानसभा क्षेत्र
नगर पंचायत निरस्त होने के बाद सरकार ने कस्बे की जनता को पुरानी पंचायतों में मर्ज किया है। पांचों पंचायतों में सम्मलित जनता के कार्य संबंधित पंचायतें ही देखेंगी। मनरेगा जॉब कार्ड के लिए कस्बे वासी अपनी संबंधित पंचायतों में आवेदन कर अपने जॉब कार्ड बनवा लें। - विनोद कटोच, कार्यकारी बीडीओ आनी