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मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ मजदूर गरजे
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मजदूर विरोधी नीतियों को लेकर झाकड़ी में प्रदर्शन करते सीटू के कार्यकर्ता।
- फोटो : RAMPUR-HP
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रामपुर बुशहर। मजदूर विरोधी नीतियों और लंबित मांगों को लेकर मजदूरों ने अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए। सीटू के बैनर तले कार्य स्थलों पर मजदूरों ने रोष जताया।
रामपुर, झाकड़ी, ज्यूरी, बायल, नाथपा, कोटागाड, बिथल, दत्तनगर, कोटला और निरमंड सहित कई अन्य स्थानों पर मजदूरों ने कार्यस्थलों पर विरोध प्रदर्शन किया। वे केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।
सीटू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, सीटू राज्य उपाध्यक्ष बिहारी सेवगी, जिला कमेटी सदस्य राजेश और नरेंद्रर देष्टा ने कहा कि श्रम कानूनों को खत्म कर बनाई गईं मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं के खिलाफ, न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये देने, आंगनबाड़ी, मिड डे मील और आशा वर्कर को सरकारी कर्मचारी घोषित करने, हरियाणा की तर्ज पर वेतन देने, फिक्स टर्म, ठेका, पार्टटाइम, टेम्परेरी और कॉन्ट्रेक्ट रोजगार पर अंकुश लगाने, आठ के बजाय बारह घंटे ड्यूटी करने के खिलाफ और कोरोन काल में हुई करोड़ों मजदूरों की छंटनी को लेकर प्रदेश भर में प्रदर्शन किए गए। वहीं बेरोजगारी, हर आयकर मुक्त परिवार को 7500 रुपये की आर्थिक मदद, मजदूरों के वेतन में कटौती, ईपीएफ और ईएसआई की राशि में कटौती, किसान विरोधी तीन कानूनों और बिजली विधेयक 2020 के खिलाफ मजदूर सड़कों पर उतरे।
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इस मौके पर फुला देवी, अनसोया, सुमित्रा, सीता राम, नूपराम, संतोष, शेर सिंह, बलू राम, चूड़ा राम, गंगा राम, चंद्र शर्मा, खिमे राम, बेली राम, रीता, जसबीर, हरीश, प्रेम सिंघानिया, राकेश, जितेंद्र, सुरेंद्र, प्रदीप, मोहन, विकेश, कैलाश, कबीर, मंगत राम, पोविंद्र शर्मा, देवेंद्र, मंजू, मनीता, सुमारी, राम दास, जगदीश और अशोक सहित कई अन्य मौजूद रहे।
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रामपुर, झाकड़ी, ज्यूरी, बायल, नाथपा, कोटागाड, बिथल, दत्तनगर, कोटला और निरमंड सहित कई अन्य स्थानों पर मजदूरों ने कार्यस्थलों पर विरोध प्रदर्शन किया। वे केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।
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सीटू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, सीटू राज्य उपाध्यक्ष बिहारी सेवगी, जिला कमेटी सदस्य राजेश और नरेंद्रर देष्टा ने कहा कि श्रम कानूनों को खत्म कर बनाई गईं मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं के खिलाफ, न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये देने, आंगनबाड़ी, मिड डे मील और आशा वर्कर को सरकारी कर्मचारी घोषित करने, हरियाणा की तर्ज पर वेतन देने, फिक्स टर्म, ठेका, पार्टटाइम, टेम्परेरी और कॉन्ट्रेक्ट रोजगार पर अंकुश लगाने, आठ के बजाय बारह घंटे ड्यूटी करने के खिलाफ और कोरोन काल में हुई करोड़ों मजदूरों की छंटनी को लेकर प्रदेश भर में प्रदर्शन किए गए। वहीं बेरोजगारी, हर आयकर मुक्त परिवार को 7500 रुपये की आर्थिक मदद, मजदूरों के वेतन में कटौती, ईपीएफ और ईएसआई की राशि में कटौती, किसान विरोधी तीन कानूनों और बिजली विधेयक 2020 के खिलाफ मजदूर सड़कों पर उतरे।
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इस मौके पर फुला देवी, अनसोया, सुमित्रा, सीता राम, नूपराम, संतोष, शेर सिंह, बलू राम, चूड़ा राम, गंगा राम, चंद्र शर्मा, खिमे राम, बेली राम, रीता, जसबीर, हरीश, प्रेम सिंघानिया, राकेश, जितेंद्र, सुरेंद्र, प्रदीप, मोहन, विकेश, कैलाश, कबीर, मंगत राम, पोविंद्र शर्मा, देवेंद्र, मंजू, मनीता, सुमारी, राम दास, जगदीश और अशोक सहित कई अन्य मौजूद रहे।