{"_id":"141-32317","slug":"Rampur-32317-141","type":"story","status":"publish","title_hn":"तांगणू जांगलिख प्रोजेक्ट में पांचवें दिन जारी हड़ताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तांगणू जांगलिख प्रोजेक्ट में पांचवें दिन जारी हड़ताल
Rampur
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
रोहडू। तांगणू जांगलिख प्रोजेक्ट में किसानसभा की हड़ताल पांचवें दिन भी जारी रही। परियोजना में बीते पांच दिन से काम काज ठप है। परियोजना प्रबंधन व किसान सभा के बीच अभी कोई बात नहीं हो पाई है। स्थानीय ग्रामीणों ने मांगें पूरी न होने तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी है।
किसान सभा के साथ ग्रामीण बीते पांच दिन से जांगलिख में परियोजना स्थल पर धरने पर बैठे हुए हैं। मंगलवार को ग्रामीणों ने परियोजना प्रबंधन के खिलाफ धरना दिया तथा जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने परियोजना प्रबंधन पर स्थानीय लोगों की मांगाें की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। किसान सभा छौहारा इकाई के अध्यक्ष बिहारी लाल चौहान, रोहडू इकाई अध्यक्ष राजकमल जिंटा ने बताया कि पांच दिन से ग्रामीण हड़ताल पर बैठे हुए है। परियोजना का निर्माण भी बंद किया हुआ है। लेकिन परियोजना प्रबंधन ग्रामीणों के साथ कोई भी बात नहीं कर रहा है। ग्रामीणों की मांगाें को नहीं सुना जा रहा है। सुरंग निर्माण से घरों में दरारें आ गई है। घरों के नुकसान का आंकलन कर प्रभाविताें को मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। प्रभावित पंचायत में परियोजना प्रबंधन कोई भी विकास कार्य नहीं कर रही है। विकास के लिए धन की व्यवस्था नहीं हो रही है। ग्रामीणों ने कई बार परियोजना प्रबंधन से अपनी मांगें उठाई। हमेशा नजर अंदाज किया गया। अब ग्रामीणों को मजबूरन हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है। जब तक ग्रामीणों की मांगो को पुरा नहीं किया जाता है, हड़ताल जारी रहेगी।
किसान सभा के साथ ग्रामीण बीते पांच दिन से जांगलिख में परियोजना स्थल पर धरने पर बैठे हुए हैं। मंगलवार को ग्रामीणों ने परियोजना प्रबंधन के खिलाफ धरना दिया तथा जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने परियोजना प्रबंधन पर स्थानीय लोगों की मांगाें की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। किसान सभा छौहारा इकाई के अध्यक्ष बिहारी लाल चौहान, रोहडू इकाई अध्यक्ष राजकमल जिंटा ने बताया कि पांच दिन से ग्रामीण हड़ताल पर बैठे हुए है। परियोजना का निर्माण भी बंद किया हुआ है। लेकिन परियोजना प्रबंधन ग्रामीणों के साथ कोई भी बात नहीं कर रहा है। ग्रामीणों की मांगाें को नहीं सुना जा रहा है। सुरंग निर्माण से घरों में दरारें आ गई है। घरों के नुकसान का आंकलन कर प्रभाविताें को मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। प्रभावित पंचायत में परियोजना प्रबंधन कोई भी विकास कार्य नहीं कर रही है। विकास के लिए धन की व्यवस्था नहीं हो रही है। ग्रामीणों ने कई बार परियोजना प्रबंधन से अपनी मांगें उठाई। हमेशा नजर अंदाज किया गया। अब ग्रामीणों को मजबूरन हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है। जब तक ग्रामीणों की मांगो को पुरा नहीं किया जाता है, हड़ताल जारी रहेगी।
विज्ञापन