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मिड डे मील वर्करों को 6750 रुपये न्यूनतम वेतन मिले प्रतिमाह : यूनियन
Updated Sat, 13 Oct 2018 09:57 PM IST
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मिड डे मील वर्करों को मिले 6750 रुपये न्यूनतम वेतन : यूनियन
19 नवंबर को दिल्ली में मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ खोलेंगे मोर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ब्लॉक इकाई रामपुर संबंधित सीटू की बैठक विश्राम गृह में ब्लॉक अध्यक्ष गौतम सैन की अध्यक्षता में हुई। बैठक को संबोधित करते हुए ब्लॉक अध्यक्ष गौतम सैन और सीटू क्षेत्रीय कमेटी सचिव कुलदीप ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार मजदूरों के अच्छे दिन का वादा कर सत्ता में आई थी, लेकिन न तो वर्तमान भाजपा सरकार और न ही पूर्व की केंद्र सरकार की ओर से 2009 के बाद अभी तक मिड डे मील के मजदूरों का 1 रुपया तक नहीं बढ़ाया गया।
यूनियन ने मिड डे मील वर्कर को न्यूनतम 6750 रुपये वेतन प्रतिमाह, हरियाणा की तर्ज पर 12 माह का वेतन, एक वर्कर के साथ हेल्पर, छुट्टियों का प्रावधान, पेंशन और ग्रेच्युटी की सुविधा, 25 बच्चों की शर्त को हटाया जाए और स्कूलों को बंद न करने की पुरजोर मांग सरकार के समक्ष रखी है। वहीं, उन्होंने चेताते कि यदि प्रदेश सरकार ने मिड डे मील वर्करों की मांगों को पूरा नहीं किया तो यूनियन सरकार के खिलाफ संघर्ष तेज करेगी।
यूनियन ने कहा कि 2012 में हुए 45वें श्रम सम्मेलन में माना था कि मिड डे मील वर्करों को मजदूरों की श्रेणी में लाया जाएगा। न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और मेडिकल सुविधा दी जाएगी, लेकिन मोदी सरकार मिड डे मील के बजट में लगातार कटौती कर इस योजना को समाप्त करने का काम कर रही है। मिड डे मील योजना को निजी हाथों में देकर हजारों मजदूरों के रोजगार को छीन कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का काम प्रदेश सरकार की ओर से किया जा रहा है। मिड डे मील ब्लॉक इकाई अपनी मांगों को लेकर 19 नवंबर को वर्करों की दिल्ली में हो रही विशाल रैली में अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेगी। इस अवसर पर पार्वती, सत्या देव, सुरेश कुमार, राम देवी, कमलेश, पार्वती, बिमला, संतोष, आशा, सीता, संतोष, आशा, पुष्पा सहित कई अन्य मौजूद रहे।
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19 नवंबर को दिल्ली में मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ खोलेंगे मोर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ब्लॉक इकाई रामपुर संबंधित सीटू की बैठक विश्राम गृह में ब्लॉक अध्यक्ष गौतम सैन की अध्यक्षता में हुई। बैठक को संबोधित करते हुए ब्लॉक अध्यक्ष गौतम सैन और सीटू क्षेत्रीय कमेटी सचिव कुलदीप ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार मजदूरों के अच्छे दिन का वादा कर सत्ता में आई थी, लेकिन न तो वर्तमान भाजपा सरकार और न ही पूर्व की केंद्र सरकार की ओर से 2009 के बाद अभी तक मिड डे मील के मजदूरों का 1 रुपया तक नहीं बढ़ाया गया।
यूनियन ने मिड डे मील वर्कर को न्यूनतम 6750 रुपये वेतन प्रतिमाह, हरियाणा की तर्ज पर 12 माह का वेतन, एक वर्कर के साथ हेल्पर, छुट्टियों का प्रावधान, पेंशन और ग्रेच्युटी की सुविधा, 25 बच्चों की शर्त को हटाया जाए और स्कूलों को बंद न करने की पुरजोर मांग सरकार के समक्ष रखी है। वहीं, उन्होंने चेताते कि यदि प्रदेश सरकार ने मिड डे मील वर्करों की मांगों को पूरा नहीं किया तो यूनियन सरकार के खिलाफ संघर्ष तेज करेगी।
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यूनियन ने कहा कि 2012 में हुए 45वें श्रम सम्मेलन में माना था कि मिड डे मील वर्करों को मजदूरों की श्रेणी में लाया जाएगा। न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और मेडिकल सुविधा दी जाएगी, लेकिन मोदी सरकार मिड डे मील के बजट में लगातार कटौती कर इस योजना को समाप्त करने का काम कर रही है। मिड डे मील योजना को निजी हाथों में देकर हजारों मजदूरों के रोजगार को छीन कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का काम प्रदेश सरकार की ओर से किया जा रहा है। मिड डे मील ब्लॉक इकाई अपनी मांगों को लेकर 19 नवंबर को वर्करों की दिल्ली में हो रही विशाल रैली में अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेगी। इस अवसर पर पार्वती, सत्या देव, सुरेश कुमार, राम देवी, कमलेश, पार्वती, बिमला, संतोष, आशा, सीता, संतोष, आशा, पुष्पा सहित कई अन्य मौजूद रहे।
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