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मनरेगा के कार्यों में लाएं पारदर्शिता
Updated Wed, 31 Jan 2018 09:50 PM IST
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दलाश (कुल्लू)। दलाश क्षेत्र में बुधवार को किसान सभा की बैठक आयोजित हुई। इसमें कई मुद्दों पर चर्चा की गई। किसान सभा ने सरकार पर आरोप लगाया कि मनरेगा में लोगों को काम नहीं मिल रहा और न मनरेगा के मजदूरी की अदायगी समय की जा रही है। किसान सभा ने कहा कि मनरेगा के कार्यों में पारदर्शिता लाई जाए। हिमाचल प्रदेश किसान सभा के सह सचिव देवकी नंद ने कहा कि सरकार ने मनरेगा के तहत कई योजनाएं लाई हैं। लेकिन लोगों तक ये योजनाएं पहुंच ही नहीं पाती हैं।
कहा कि मनेरगा में जो 70 हजार करोड़ रुपये का फंड देते थे, उसे 48 हजार रुपये कम कर दिया गया है, जो बहुत दुखद है। संगठन को मजबूत होना पड़ेगा। सिलिंडर की सब्सिडी अप्रैल माह के बाद खत्म हो जाएगी, जिसके लिए संगठन को मजबूती से काम करना पड़ेगा। सरकार अस्पतालों में बेड की संख्या में बढ़ोतरी कर रही है। लेकिन अस्पतालों में न डॉक्टर है और न ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं। देवकी नंद ने कहा कि दो बिल पास करने के लिए जंतर मंतर में किसानों ने धरना दिया और आज किसान आत्महत्या कर रहे हैं। इस पर सरकार चुप्पी साधे हुए है। किसानों को फसलों के उचित दाम तक नहीं मिल रहे और सरकार के बीज के दाम आसमान छू रहे हैं। प्रताप का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के लोन माफ करने की बात कही थी, जो अभी तक नहीं हुआ। वर्ष 1980 से पहले भूमिहीनों को पांच बीघा जमीन दी थी और लोगों को पट्टे पे जमीन दी गई थी। करीब 1,67,300 लोगों को जमीन मुहैया करवाई गई पर अब लोगों से वो जमीन छीनी जा रही है, क्योंकि लोगों के पट्टे गुम हो गए हैं। किसान सभा का कहना है कि सबको पांच बीघा जमीन दी जाए। जब बाबा रामदेव को जमीन दी जा सकती है तो गरीब लोगों को क्यों नहीं दी जा सकती। कहा कि यदि सरकार गरीबों को पांच बीघा जमीन देना चाहती है, तो गरीबों को पट्टा भी दिया जाना चाहिए। इस दौरान क्षेत्र भर से आए किसान और बागवान आदि मौजूद रहे।
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कहा कि मनेरगा में जो 70 हजार करोड़ रुपये का फंड देते थे, उसे 48 हजार रुपये कम कर दिया गया है, जो बहुत दुखद है। संगठन को मजबूत होना पड़ेगा। सिलिंडर की सब्सिडी अप्रैल माह के बाद खत्म हो जाएगी, जिसके लिए संगठन को मजबूती से काम करना पड़ेगा। सरकार अस्पतालों में बेड की संख्या में बढ़ोतरी कर रही है। लेकिन अस्पतालों में न डॉक्टर है और न ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं। देवकी नंद ने कहा कि दो बिल पास करने के लिए जंतर मंतर में किसानों ने धरना दिया और आज किसान आत्महत्या कर रहे हैं। इस पर सरकार चुप्पी साधे हुए है। किसानों को फसलों के उचित दाम तक नहीं मिल रहे और सरकार के बीज के दाम आसमान छू रहे हैं। प्रताप का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के लोन माफ करने की बात कही थी, जो अभी तक नहीं हुआ। वर्ष 1980 से पहले भूमिहीनों को पांच बीघा जमीन दी थी और लोगों को पट्टे पे जमीन दी गई थी। करीब 1,67,300 लोगों को जमीन मुहैया करवाई गई पर अब लोगों से वो जमीन छीनी जा रही है, क्योंकि लोगों के पट्टे गुम हो गए हैं। किसान सभा का कहना है कि सबको पांच बीघा जमीन दी जाए। जब बाबा रामदेव को जमीन दी जा सकती है तो गरीब लोगों को क्यों नहीं दी जा सकती। कहा कि यदि सरकार गरीबों को पांच बीघा जमीन देना चाहती है, तो गरीबों को पट्टा भी दिया जाना चाहिए। इस दौरान क्षेत्र भर से आए किसान और बागवान आदि मौजूद रहे।
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