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जानलेवा स्पॉट बन रहा रूतरंग
Updated Tue, 09 Jan 2018 07:22 PM IST
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सांगला (किन्नौर)। किन्नौर जिले की कड़छम-रूतरंग सड़क की 13 वर्ष बीतने के बाद भी कोई सुध नहीं ली जा रही है। रूतरंग में सड़क के 600 मीटर हिस्से में हमेशा भूस्खलन का खतरा बना रहता है। सड़क के किनारे रेलिंग और पैरापिट नहीं है। लोगों को जान जोखिम में डाल कर इस स्पॉट को पार करना पड़ रहा है। यह वही क्षेत्र है जहां कई लोगों की जानें जा चुकी हैं और दर्जनों वाहनों को क्षति पहुंच चुकी है।
पिछले 13 सालों से सरकारें आती और जाती रही पर किसी ने भी इस सड़क पर होने वाले भूस्खलन को रोकने के लिए स्थायी समाधान नहीं किया। सत्ता में जयराम सरकार के काबिज होते ही लोगों को उम्मीद जगी है कि अब इस सड़क के खतरनाक हिस्से को सुधारा जाएगा। जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल सांगला को जोड़ने वाली कड़छम-सांगला सड़क के रूतरंग के पास करीब 600 मीटर सड़क पर सफर करना किसी बड़े खतरे से कम नही हैं। सड़क पर अब तक दो दर्जन से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं और एक दर्जन से अधिक वाहनों को भी क्षति पहुंची है। 21 अगस्त 2014 को सड़क पर एक निजी बस के दुर्घटनाग्रस्त होने से एक साथ 23 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 20 लोग घायल हो गए। वर्ष 2010 को रूतरंग के पास ही एक पर्यटक के वाहन के पर पत्थर गिरने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस स्थान पर आए दिन भूस्खलन होता रहता है। बरसात में समस्या और भी बढ़ जाती है। बावजूद इसके सरकार और लोक निर्माण विभाग इस खतरनाक स्पॉट को ठीक करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। 6 जुलाई 2005 को बास्पा नदी में आई प्रलयकारी बाढ़ से रूतरंग में 600 मीटर सड़क क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद किसी भी सरकार ने मार्ग को ठीक करने की पहल नहीं की। सांगला वैली के प्रमोद नेगी, दिव्या नेगी, राजेश नेगी, अरुण नेगी, सुरजीत नेगी, पवन नेगी, देवीदयाल नेगी ने सड़क की मिट्टी जांच कर भूस्खलन को रोकने के लिए कारगर कदम उठाने की मांग की है। उधर, लोक निर्माण विभाग सांगला के एसडीओ सचिन नड्डा ने कहा कि सड़क की हालात को सुधारने के लिए विभाग गंभीर है। जल्द ही जांच के बाद मार्ग को दुरुस्त करने का कार्य शुरू किया जाएगा।
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पिछले 13 सालों से सरकारें आती और जाती रही पर किसी ने भी इस सड़क पर होने वाले भूस्खलन को रोकने के लिए स्थायी समाधान नहीं किया। सत्ता में जयराम सरकार के काबिज होते ही लोगों को उम्मीद जगी है कि अब इस सड़क के खतरनाक हिस्से को सुधारा जाएगा। जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल सांगला को जोड़ने वाली कड़छम-सांगला सड़क के रूतरंग के पास करीब 600 मीटर सड़क पर सफर करना किसी बड़े खतरे से कम नही हैं। सड़क पर अब तक दो दर्जन से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं और एक दर्जन से अधिक वाहनों को भी क्षति पहुंची है। 21 अगस्त 2014 को सड़क पर एक निजी बस के दुर्घटनाग्रस्त होने से एक साथ 23 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 20 लोग घायल हो गए। वर्ष 2010 को रूतरंग के पास ही एक पर्यटक के वाहन के पर पत्थर गिरने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस स्थान पर आए दिन भूस्खलन होता रहता है। बरसात में समस्या और भी बढ़ जाती है। बावजूद इसके सरकार और लोक निर्माण विभाग इस खतरनाक स्पॉट को ठीक करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। 6 जुलाई 2005 को बास्पा नदी में आई प्रलयकारी बाढ़ से रूतरंग में 600 मीटर सड़क क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद किसी भी सरकार ने मार्ग को ठीक करने की पहल नहीं की। सांगला वैली के प्रमोद नेगी, दिव्या नेगी, राजेश नेगी, अरुण नेगी, सुरजीत नेगी, पवन नेगी, देवीदयाल नेगी ने सड़क की मिट्टी जांच कर भूस्खलन को रोकने के लिए कारगर कदम उठाने की मांग की है। उधर, लोक निर्माण विभाग सांगला के एसडीओ सचिन नड्डा ने कहा कि सड़क की हालात को सुधारने के लिए विभाग गंभीर है। जल्द ही जांच के बाद मार्ग को दुरुस्त करने का कार्य शुरू किया जाएगा।
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