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सफेद चूणी रोग से बगीचे बचाएं
Updated Sun, 20 May 2018 07:36 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू।
पाउडरी मिल्डियू (सफेद चूर्णी) रोग से बगीचों व सेब की पौधशालों को बचाना जरूरी है। यह रोग अधिकतर नई पत्तियों, कलियों, हरी टहनियों पर लगता है। रोग के फैलने से पौधे का विकास रुक जाता है तथा फल की गुणवत्ता खत्म हो जाती है।
रोग से ग्रसित पत्तियों पर सफेद पाउडर के धब्बे ऊपर तथा नीचे दोनों सतह पर उभरते हैं। रोग पत्तियों व डंडियों से बढ़ते हुए नई हरी टहनियों तक फैल जाता है। इससे संक्रमित पत्तियां मुड़कर सख्त हो जाती है। अधिक संक्रमण होने पर प्रभावित पत्तियां समय से पहले ही झड़ जाती है। रोग ग्रस्त शाखाओं की बढ़ोतरी रुक जाती है। संक्रमित कलियां फल पैदा करने में सक्षम नहीं होती है। ज्यादा संक्रमित टहनियां शीघ्र मर जाती हैं। आरंभ में टहनियों पर सफेद रंग का चूर्ण दिखाई देता है, जो बाद में बदलकर गहरे भूरे रंग का हो जाता है। सेब की परागण किस्में इस रोग से अधिक प्रभावित होती हैं। यह रोग पौधशाला में भी सबसे अधिक पनपता है।
रोग ग्रस्त टहनियां स्वयं हटाएं : कुशाल
उद्यान विकास अधिकारी डॉ. कुशाल मेहता ने बताया कि फफूंदी नाशकों के छिड़काव से फलदार पौधों में रोग की रोकथाम नहीं की जा सकती है। रोकथाम के लिए बागवानों को पौधे से रोग ग्रसित टहनियों को स्वयं हटाना होगा। पौधशालाओं में विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार फफूंदी नाशकों का छिड़काव किया जा सकता है। रोग की रोकथाम समय पर करना आवश्यक है। रोग के अधिक फैलने से पौधे व फल का विकास रुक जाता है।
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रोहड़ू।
पाउडरी मिल्डियू (सफेद चूर्णी) रोग से बगीचों व सेब की पौधशालों को बचाना जरूरी है। यह रोग अधिकतर नई पत्तियों, कलियों, हरी टहनियों पर लगता है। रोग के फैलने से पौधे का विकास रुक जाता है तथा फल की गुणवत्ता खत्म हो जाती है।
रोग से ग्रसित पत्तियों पर सफेद पाउडर के धब्बे ऊपर तथा नीचे दोनों सतह पर उभरते हैं। रोग पत्तियों व डंडियों से बढ़ते हुए नई हरी टहनियों तक फैल जाता है। इससे संक्रमित पत्तियां मुड़कर सख्त हो जाती है। अधिक संक्रमण होने पर प्रभावित पत्तियां समय से पहले ही झड़ जाती है। रोग ग्रस्त शाखाओं की बढ़ोतरी रुक जाती है। संक्रमित कलियां फल पैदा करने में सक्षम नहीं होती है। ज्यादा संक्रमित टहनियां शीघ्र मर जाती हैं। आरंभ में टहनियों पर सफेद रंग का चूर्ण दिखाई देता है, जो बाद में बदलकर गहरे भूरे रंग का हो जाता है। सेब की परागण किस्में इस रोग से अधिक प्रभावित होती हैं। यह रोग पौधशाला में भी सबसे अधिक पनपता है।
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रोग ग्रस्त टहनियां स्वयं हटाएं : कुशाल
उद्यान विकास अधिकारी डॉ. कुशाल मेहता ने बताया कि फफूंदी नाशकों के छिड़काव से फलदार पौधों में रोग की रोकथाम नहीं की जा सकती है। रोकथाम के लिए बागवानों को पौधे से रोग ग्रसित टहनियों को स्वयं हटाना होगा। पौधशालाओं में विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार फफूंदी नाशकों का छिड़काव किया जा सकता है। रोग की रोकथाम समय पर करना आवश्यक है। रोग के अधिक फैलने से पौधे व फल का विकास रुक जाता है।
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