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घरद्वार हाथोंहाथ बिक रही चेरी
Updated Tue, 08 May 2018 09:09 PM IST
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चेरी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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चेरी फसल के प्रति बढ़ रहा बागवानों का रुझान
अनिल कंवर
कुमारसैन (रामपुर बुशहर)।
क्षेत्र में आजकल चेरी का सीजन जोरों पर है। सेब उत्पादकों का रुझान भी चेरी की ओर बढ़ रहा है। इस वर्ष फसल कम होने से बागवानों को इसके बेहतर दाम मिल रहे हैं। सेब उत्पादक क्षेत्रों में चेरी ने अपनी जगह बना ली है। सेब की तुलना में चेरी उत्पादन में खर्च कम और आमदनी अधिक होती है।
मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चेरी का सीजन शुरू हो चुका है। बागवानों को इसके घरद्वार पर बेहतर दाम मिल रहे हैं। मौसम की बेरुखी के चलते इस बार चेरी का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। बीते वर्षों के मुकाबले चेरी की फसल आधे से भी कम हुई है। चेरी के खरीदार बागवानों को घरद्वार पर ही अच्छे दाम दे रहे हैं, जिससे बागवानों को चेरी मंडी नहीं भेजनी पड़ रही। बागवानों को घरद्वार पर ही चेरी का दाम प्रति डिब्बा (एक किलो) 150 से 250 रुपये तक मिल रहा है। बागबानों को एनएच किनारे स्टॉल में भी अच्छे दाम मिल रहे हैं। क्षेत्र के कोटगढ़, भुट्टी, कुमारसैन, भड़गांव, बगारी, बाहली, छबिशी और सांगरी आदि क्षेत्रों में चेरी का सीजन जोरों पर है। बागवान विकास कंवर, जॉनी भंडारी, दलीप ठाकुर, सुनील ठाकुर, विनोद ठाकुर, राकेश मेहता, सुरेश, वरुण, मनोज चौहान आदि का कहना है कि सेब की तुलना में चेरी उत्पादन में खर्च कम और आमदनी अधिक है। उधर, खरीदार निशांत धर्मा, विकास जिष्टू ने बताया कि चेरी के दाम 150 से 250 रुपये तक दिए जा रहे हैं। बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष चेरी की फसल कम हुई है और इसके दामों में उछाल आने की उम्मीद है।
अनिल कंवर
कुमारसैन (रामपुर बुशहर)।
क्षेत्र में आजकल चेरी का सीजन जोरों पर है। सेब उत्पादकों का रुझान भी चेरी की ओर बढ़ रहा है। इस वर्ष फसल कम होने से बागवानों को इसके बेहतर दाम मिल रहे हैं। सेब उत्पादक क्षेत्रों में चेरी ने अपनी जगह बना ली है। सेब की तुलना में चेरी उत्पादन में खर्च कम और आमदनी अधिक होती है।
मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चेरी का सीजन शुरू हो चुका है। बागवानों को इसके घरद्वार पर बेहतर दाम मिल रहे हैं। मौसम की बेरुखी के चलते इस बार चेरी का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। बीते वर्षों के मुकाबले चेरी की फसल आधे से भी कम हुई है। चेरी के खरीदार बागवानों को घरद्वार पर ही अच्छे दाम दे रहे हैं, जिससे बागवानों को चेरी मंडी नहीं भेजनी पड़ रही। बागवानों को घरद्वार पर ही चेरी का दाम प्रति डिब्बा (एक किलो) 150 से 250 रुपये तक मिल रहा है। बागबानों को एनएच किनारे स्टॉल में भी अच्छे दाम मिल रहे हैं। क्षेत्र के कोटगढ़, भुट्टी, कुमारसैन, भड़गांव, बगारी, बाहली, छबिशी और सांगरी आदि क्षेत्रों में चेरी का सीजन जोरों पर है। बागवान विकास कंवर, जॉनी भंडारी, दलीप ठाकुर, सुनील ठाकुर, विनोद ठाकुर, राकेश मेहता, सुरेश, वरुण, मनोज चौहान आदि का कहना है कि सेब की तुलना में चेरी उत्पादन में खर्च कम और आमदनी अधिक है। उधर, खरीदार निशांत धर्मा, विकास जिष्टू ने बताया कि चेरी के दाम 150 से 250 रुपये तक दिए जा रहे हैं। बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष चेरी की फसल कम हुई है और इसके दामों में उछाल आने की उम्मीद है।
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