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करोड़ों की आमदन के बावजूद मंदिर में नहीं बना लंगर भवन
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अमर उजाला ब्यूरो
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ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। देश भर में विख्यात ऐतिहासिक मां भीमाकाली मंदिर सराहन में लंगर हॉल न होने से भंडारा बनाने वालों के साथ और खाने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सराहन में सैकड़ों साल पुराने मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को बारिश और धूप में खुले आसमान के नीचे बैठ कर लंगर बनाना और खाना पड़ता है।
वीरवार को भी सराहन मंदिर में किसी भक्त ने श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था की गई थी, लेकिन लोगों को तेज धूप में तिरपाल के नीचे लंगर का प्रसाद ग्रहण करना पड़ा। वहीं लंगर का इंतजार कर रहे लोगों को कड़ी धूप सहन करनी पड़ी।
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गौरतलब है कि करोड़ों की आमदन की बावजूद भीमाकाली मंदिर ट्रस्ट सराहन के मुख्य मंदिर में आज तक एक लंगर भवन का निर्माण नहीं करवा सका। हालांकि न्यास के पास सराहन, श्राईकोटी सहित कई मंदिरों और रामपुर में बने कांप्लेक्स से करोड़ों की आमदनी होती है। बावजूद इसके मां भीमाकाली मुख्य मंदिर सराहन में देश-विदेश और दूर-दूर से पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए भवन निर्माण का कार्य सिरे नहीं चढ़ पाया है।
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वहीं वीरवार को सराहन में भंडारा खाने पहुंचे संजय कुमार, सुशील कुमार, राम सिंह, मंगल सेन, राजेश्वर, सुषमा, नेहा, प्रोमिला और पवना के अनुसार सराहन मंदिर इतना बड़ा मंदिर होने के बावजूद यहां पर आज तक मंदिर न्यास की ओर से भंडारा बनाने और खाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। धूप, बारिश और बर्फबारी में श्रद्धालुओं को बाहर खुले आसमान के नीचे बैठना पड़ता है।
वहीं इस संबंध में भीमाकाली मंदिर न्यास उपाध्यक्ष एवं एसडीएम रामपुर नरेंद्र चौहान और मंदिर न्यास के मंदिर अधिकारी बालक राम नेगी के अनुसार लंगर भवन की अनुमान लागत स्वीकृति के लिए शिमला भेजी गई है। मंजूरी मिलते ही लंगर भवन का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।