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एफसीए की मंजूरी के बगैर चल रहा था कार्य, सोया रहा वन विभाग
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राजपुरा परियोजना में एफसीए की मंजूरी के
बगैर चल रहा था कार्य, सोया रहा वन विभाग
अवैध रूप से तैयार हुए बीयर साइट, टनल, ओपन चैनल, क्रशर और लेबर के ढारे
परियोजना के लिए बनी 80 प्रतिशत सड़क अवैध, माता मंगला काली की जमीन भी शामिल
परियोजना ने आठ बीघा भूमि पर किया अवैध कब्जा, राजस्व और वन विभाग की टीम कर रही जांच
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर। एक ओर सर्वोच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश में हो रहे वनों के कटान को रोकने के लिए कड़े नियम लागू कर रहा है, लेकिन इसके ठीक विपरीत प्रदेश में निर्माणाधीन विद्युत परियोजना इन सभी नियमों को ठेंगा दिखा कर कार्य रही है। बावजूद इसके इस पर रोक लगाने में प्रशासन, वन विभाग और संबंधित महकमे पंगु साबित हो रहे हैं। शुक्रवार को रामपुर उपमंडल की भड़ावली और तकलेच पंचायत में निर्माणाधीन 9.9 मेगावाट राजपुरा हाइड्रो परियोजना निर्माण की जांच को गई टीम ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। कंपनी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर परियोजना का निर्माण किया जा रहा है, जिस पर कार्रवाई करने में प्रशासन और वन विभाग नाकाम साबित हो रहे हैं।
गौर हो कि एफसीए की मंजूरी के बगैर राजपुरा परियोजना का कार्य चल रहा था। इसको लेकर स्थानीय पंचायतों के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने शिकायत प्रशासन और वन विभाग से की। जिसके बाद वन विभाग और राजस्व विभाग की टीम संयुक्त रूप से राजपुरा परियोजना निर्माण की जांच को मौके पर पहुंची। जांच के दौरान अवैध रूप से तैयार हुई बीयर साइट, टनल, ओपन चैनल, डंपिंग साइट, क्रशर और लेबर के ढारे सामने आए हैं। परियोजना के लिए बनी करीब तीन किलोमीटर सड़क का 80 प्रतिशत हिस्सा वन भूमि में है, जिसकी मंजूरी वन विभाग से नहीं ली गई है। यही नहीं लालसा पंचायत की माता मंगला काली की जमीन परियोजना निर्माण में शामिल की गई है, जबकि मंदिर और धार्मिक संस्थान कानूनी रूप से नाबालिग की श्रेणी में आते हैं। शुक्रवार को हुई जांच के दौरान करीब आठ बीघा वन भूमि पर अवैध कब्जा पाया गया है, जबकि परियोजना निर्माण के अन्य क्षेत्रों की जांच जारी है। राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम जांच कर रही है।
राजस्व विभाग रामपुर के कानूनगो आरएस राणा ने बताया कि अभी तक की हुई जांच में अधिकतर कार्य अवैध रूप से करवाए गए हैं। एफसीए की मंजूरी के लिए परियोजना ने विभाग को रिव्यू के लिए लिखा था। एफसीए की मंजूरी जो देहरादून से मिलनी थी, से पूर्व ही कंपनी द्वारा निर्माण कार्य किया जा रहा था।
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उधर, वन विभाग रामपुर के डीएफओ अशोक नेगी ने बताया कि जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जिन स्थानों पर अवैध कब्जा साबित हुआ है, वहां तुरंत प्रभाव से कार्य रोक दिया जाएगा। वन और राजस्व विभाग की टीम मौके पर डिमार्केशन कर रही है।
शुक्रवार को परियोजना निर्माण की जांच कर रही संयुक्त टीम में राजस्व विभाग के कानूनगो आरएस राणा, आरओ जयचंद, बीओ सतीश, वन रक्षक प्रदीप, पटवारी रोहिला, भड़ावली पंचायत उपप्रधान दिनेश खमराल, तकलेच पंचायत उपप्रधान कृष्ण मजटू, अनिरुद्ध सिंह बिष्ट, अजय कौशल, सतीश चाई, राजेश चौहान, अनिल चौहान सहित अन्य मौजूद रहे।
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बगैर चल रहा था कार्य, सोया रहा वन विभाग
अवैध रूप से तैयार हुए बीयर साइट, टनल, ओपन चैनल, क्रशर और लेबर के ढारे
परियोजना के लिए बनी 80 प्रतिशत सड़क अवैध, माता मंगला काली की जमीन भी शामिल
परियोजना ने आठ बीघा भूमि पर किया अवैध कब्जा, राजस्व और वन विभाग की टीम कर रही जांच
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर। एक ओर सर्वोच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश में हो रहे वनों के कटान को रोकने के लिए कड़े नियम लागू कर रहा है, लेकिन इसके ठीक विपरीत प्रदेश में निर्माणाधीन विद्युत परियोजना इन सभी नियमों को ठेंगा दिखा कर कार्य रही है। बावजूद इसके इस पर रोक लगाने में प्रशासन, वन विभाग और संबंधित महकमे पंगु साबित हो रहे हैं। शुक्रवार को रामपुर उपमंडल की भड़ावली और तकलेच पंचायत में निर्माणाधीन 9.9 मेगावाट राजपुरा हाइड्रो परियोजना निर्माण की जांच को गई टीम ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। कंपनी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर परियोजना का निर्माण किया जा रहा है, जिस पर कार्रवाई करने में प्रशासन और वन विभाग नाकाम साबित हो रहे हैं।
गौर हो कि एफसीए की मंजूरी के बगैर राजपुरा परियोजना का कार्य चल रहा था। इसको लेकर स्थानीय पंचायतों के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने शिकायत प्रशासन और वन विभाग से की। जिसके बाद वन विभाग और राजस्व विभाग की टीम संयुक्त रूप से राजपुरा परियोजना निर्माण की जांच को मौके पर पहुंची। जांच के दौरान अवैध रूप से तैयार हुई बीयर साइट, टनल, ओपन चैनल, डंपिंग साइट, क्रशर और लेबर के ढारे सामने आए हैं। परियोजना के लिए बनी करीब तीन किलोमीटर सड़क का 80 प्रतिशत हिस्सा वन भूमि में है, जिसकी मंजूरी वन विभाग से नहीं ली गई है। यही नहीं लालसा पंचायत की माता मंगला काली की जमीन परियोजना निर्माण में शामिल की गई है, जबकि मंदिर और धार्मिक संस्थान कानूनी रूप से नाबालिग की श्रेणी में आते हैं। शुक्रवार को हुई जांच के दौरान करीब आठ बीघा वन भूमि पर अवैध कब्जा पाया गया है, जबकि परियोजना निर्माण के अन्य क्षेत्रों की जांच जारी है। राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम जांच कर रही है।
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राजस्व विभाग रामपुर के कानूनगो आरएस राणा ने बताया कि अभी तक की हुई जांच में अधिकतर कार्य अवैध रूप से करवाए गए हैं। एफसीए की मंजूरी के लिए परियोजना ने विभाग को रिव्यू के लिए लिखा था। एफसीए की मंजूरी जो देहरादून से मिलनी थी, से पूर्व ही कंपनी द्वारा निर्माण कार्य किया जा रहा था।
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उधर, वन विभाग रामपुर के डीएफओ अशोक नेगी ने बताया कि जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जिन स्थानों पर अवैध कब्जा साबित हुआ है, वहां तुरंत प्रभाव से कार्य रोक दिया जाएगा। वन और राजस्व विभाग की टीम मौके पर डिमार्केशन कर रही है।
शुक्रवार को परियोजना निर्माण की जांच कर रही संयुक्त टीम में राजस्व विभाग के कानूनगो आरएस राणा, आरओ जयचंद, बीओ सतीश, वन रक्षक प्रदीप, पटवारी रोहिला, भड़ावली पंचायत उपप्रधान दिनेश खमराल, तकलेच पंचायत उपप्रधान कृष्ण मजटू, अनिरुद्ध सिंह बिष्ट, अजय कौशल, सतीश चाई, राजेश चौहान, अनिल चौहान सहित अन्य मौजूद रहे।