{"_id":"5c9ba2ddbdec22146453768a","slug":"155370372818-rampur-hp-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्रशर मालिकों ने रातों रात खोल कर गायब कर दी मशीनरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्रशर मालिकों ने रातों रात खोल कर गायब कर दी मशीनरी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रोहडू। अवैध तरीके से रोहडू उपमंडल में चल रहे दर्जन भर स्टोन क्रशरों पर खनन विभाग ने छापेमारी शुरू कर दी है। खबर छापने के बाद कार्रवाई की भनक लगने पर क्रशर मालिकों ने मशीनों को रातों रात खोल कर पत्थर क्रश करने का काम रोक दिया। छापेमारी के दौरान खनन अधिकारी को एक भी स्टोन क्रशर चालू हालत में नहीं मिला है
छापेमारी के बाद पुख्ता हो गया है कि यहां पर दूरदराज गांव में अलग-अलग स्थानों पर सभी स्टोन क्रशर अवैध रूप से लगे हैं। इनके मालिक भी अधिकांश ठेकेदार ही हैं। खनन विभाग को अब इसकी पुख्ता सूचना हो चुकी है। क्रशरों के लिए पत्थर वन भूमि से निकाल जा रहे थे। वन विभाग के अधिकारी भी अभी तक मामले को अनदेखा करते रहे है। सवाल उठ रहे हैं कि वन विभाग के फील्ड अधिकारी अभी तक स्टोन क्रशर लगने के बाद वन भूमि पर हो रहे खनन को क्यों अनदेखा करते रहे हैं। मामला सामने आने के बाद डीएफओ रोहडू भी कार्रवाई की तैयारी में हैं।
जिला खनन अधिकारी के बयान भी संदेह के घेरे में
रोहडू उपमंडल में दर्जन भर अवैध क्रशर का खुलासा होने के बाद जिला खनन अधिकारी शैलेजा चौधरी इनको वैध होने के तर्क दे रही थीं। सोमवार को उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में बताया था कि सभी क्रशर लगाने को लोक निर्माण विभाग के माध्यम से अनुमति मिली है। उसके बाद लोक निर्माण विभाग ने अनुमति देने की बात पर इनकार किया। अब खनन विभाग ही इसकी जांच कर रहा है। यानी जिला खनन अधिकारी के बयान भी संदेह के दायरे में है। पिछले सप्ताह जिला खनन अधिकारी रोहड़ू क्षेत्र का दौरा कर चुकी हैं। उनको कुछ अवैध क्रशरों की भी सूचना थी।
विज्ञापन
क्रशर की मशीनरी अधूरी व खुली पड़ी मिली
खनन अधिकारी कमलेश भारद्वाज ने बताया कि उनके पास अभी तक ऐसे स्टोन क्रशर की कोई सूचना नहीं थी। सूचना के बाद दो दिनों से लगातार छापेमारी जारी है। सभी क्रशर दूरदराज के गांव में जरूर मिले लेकिन वहां पर किसी प्रकार के क्रश किए पत्थर नहीं मिले। उन्होंने कहा कुछ स्थानों पर क्रशर की मशीनरी अधूरी व खुली पड़ी मिली है।
विज्ञापन
छापेमारी के बाद पुख्ता हो गया है कि यहां पर दूरदराज गांव में अलग-अलग स्थानों पर सभी स्टोन क्रशर अवैध रूप से लगे हैं। इनके मालिक भी अधिकांश ठेकेदार ही हैं। खनन विभाग को अब इसकी पुख्ता सूचना हो चुकी है। क्रशरों के लिए पत्थर वन भूमि से निकाल जा रहे थे। वन विभाग के अधिकारी भी अभी तक मामले को अनदेखा करते रहे है। सवाल उठ रहे हैं कि वन विभाग के फील्ड अधिकारी अभी तक स्टोन क्रशर लगने के बाद वन भूमि पर हो रहे खनन को क्यों अनदेखा करते रहे हैं। मामला सामने आने के बाद डीएफओ रोहडू भी कार्रवाई की तैयारी में हैं।
विज्ञापन
जिला खनन अधिकारी के बयान भी संदेह के घेरे में
रोहडू उपमंडल में दर्जन भर अवैध क्रशर का खुलासा होने के बाद जिला खनन अधिकारी शैलेजा चौधरी इनको वैध होने के तर्क दे रही थीं। सोमवार को उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में बताया था कि सभी क्रशर लगाने को लोक निर्माण विभाग के माध्यम से अनुमति मिली है। उसके बाद लोक निर्माण विभाग ने अनुमति देने की बात पर इनकार किया। अब खनन विभाग ही इसकी जांच कर रहा है। यानी जिला खनन अधिकारी के बयान भी संदेह के दायरे में है। पिछले सप्ताह जिला खनन अधिकारी रोहड़ू क्षेत्र का दौरा कर चुकी हैं। उनको कुछ अवैध क्रशरों की भी सूचना थी।
विज्ञापन
क्रशर की मशीनरी अधूरी व खुली पड़ी मिली
खनन अधिकारी कमलेश भारद्वाज ने बताया कि उनके पास अभी तक ऐसे स्टोन क्रशर की कोई सूचना नहीं थी। सूचना के बाद दो दिनों से लगातार छापेमारी जारी है। सभी क्रशर दूरदराज के गांव में जरूर मिले लेकिन वहां पर किसी प्रकार के क्रश किए पत्थर नहीं मिले। उन्होंने कहा कुछ स्थानों पर क्रशर की मशीनरी अधूरी व खुली पड़ी मिली है।