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जोनागे स्कूल में डर के साये में शिक्षा ग्रहण कर रहे नौनिहाल
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अमर उजाला ब्यूरो
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सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर में प्रशासन और शिक्षा विभाग की अनदेखी जोनागे स्कूल के छात्रों पर भारी पड़ सकती है। प्राथमिक स्कूल जोनागे की हालत वर्षों से जर्जर बनी हुई है, भवन की हालत सुधारने में प्रशासन और शिक्षा विभाग नाकाम रहे हैं। यहां वर्षों से खतरों के साये में दर्जनों नौनिहाल शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। दिसंबर 2018 में स्कूल का निरीक्षण करने के बाद एसडीएम ने भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया था और इसे डिस्मेंटल करने के निर्देश दिए थे, लेकिन प्रशासन के निर्देशों की लगातार अनदेखी हो रही है। यदि ऐसे में कोई हादसा पेश आए तो उसके लिए शिक्षा विभाग और प्रशासन सीधे तौर पर जिम्मेवार होगा। विभाग की अनदेखी को लेकर विद्यार्थियों के अभिभावकों में खासा रोष है।
जिला किन्नौर की प्राथमिक पाठशाला जोनागे भवन की हालत जर्जर है। दर्जनों स्कूली छात्र-छात्राएं करीब 4 वर्षों डर के साये में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। एसएमसी अध्यक्ष आनंद कुमार ने बताया कि एसएमसी और ग्रामीण स्कूल भवन को डिसमेंटल कर पुन: निर्माण की मांग उठाते रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस है। क्षेत्र के नन्हें मुन्ने छात्र-छात्राओं को जर्जर भवन के बरामदे में बैठकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। एसडीएम भावानगर घनश्याम दास शर्मा ने भी जर्जर भवन का जायजा लेकर उसे असुरक्षित घोषित करने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन उनके निर्देशों की भी अनदेखी की गई है। जोनागे सोशल वेलफेयर एवं स्पोर्ट्स क्लब उपाध्यक्ष प्रवीण कुमार नेगी, सचिव दीपक कुमार नेगी, कोषाध्यक्ष जयकृष्ण नेगी, वरिष्ठ सलाहकार फूला सुख नेगी, सुंदर चंद नेगी, सरजनी नेगी, शुक्र देवी नेगी, कृष्ण कुमार नेगी, दौलत नेगी और शिवा नेगी सहित कई अन्य अभिभावकों ने प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से समय रहते इस जर्जर भवन की हालत सुधारने की मांग की है।
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उधर, प्रारंभिक शिक्षा उप निदेशक किन्नौर अशोक नेगी ने कहा कि स्कूल भवन को डिसमेंटल संबंधी दस्तावेज शिक्षा विभाग के कार्यालय नहीं पहुंचे हैं। जल्द ही इस संबंध में कागजी औपचारिकताएं पूरी कर दी जाएंगी।
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