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रामपुर उपमंडल के ग्रामीणों को कैसे मिलेगा बेहतर उपचार?
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ नहीं, मरीज बेहाल
केवल कागजों में चल रहा दुर्गम क्षेत्र काशापाट और लबाना सदाना स्वास्थ्य केंद्र
ग्रामीण 50-60 किलोमीटर दूर रामपुर पहुंच कर उपचार करवाने को मजबूर
गुलजारी लाल डमालू
डंसा (रामपुर बुशहर)। प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रह रही जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लाख दावे करे, लेकिन धरातल में इन दावों की सरेआम पोल खुल रही है। रामपुर विकास खंड की विभिन्न पंचायतों में स्थित आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र सुविधाओं का सच दर्शा रहे हैं, यहां स्टाफ की कमी के चलते ग्रामीण खासे परेशान हैं, लेकिन ग्रामीणों की सुनवाई न तो सरकार कर रही है और न ही आयुर्वेदिक विभाग।
रामपुर विकास खंड की 31 पंचायतों में प्रदेश सरकार ने आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र तो खोल दिए, लेकिन ये स्वास्थ्य केंद्र बिना स्टाफ के ग्रामीणों का मुंह चिढ़ा रहे हैं। खंड के चार आयुर्वेदिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डंसा, लालसा, शिंगला और रचोली में स्टाफ की कमी है। यहां न तो डॉक्टर हैं और न ही फार्मासिस्ट। इन पंचायतों में सैकड़ों लोग रोजाना उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं, लेकिन मरीजों को यहां उपचार सुविधा नहीं मिलती और उन्हें छोटी सी बीमारी होने पर भी कई किलोमीटर दूर रामपुर या दूसरी जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। यही नहीं उपमंडल के दुर्गम क्षेत्र काशापाट और 15/20 क्षेत्र की लबाना सदाना पंचायत स्थित स्वास्थ्य केंद्र केवल कागजों में ही चल रहे हैं, जबकि इन केंद्रों में स्टाफ तक नहीं है। सरकार और आयुर्वेदिक विभाग ग्रामीणों के स्वास्थ्य को लेकर कितना सजग है, इसका अंदाजा इन स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचकर लगा सकते हैं।
डंसा पंचायत प्रधान पदमा कुमारी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में रिक्त पदों को लेकर कई मर्तबा सरकार और विभाग के धिकारियों को प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन पदों को भरने में सरकार नाकाम साबित हो रही है।
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क्षेत्र के लोगों दौलत राम, बंसी लाल, अजय कुमार, गुरजीत, सुंदर सिंह, बालानंद शर्मा, तारा चंद, शिशु पाल, घनश्याम, छतर सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और आयुर्वेदिक विभाग से जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त पड़े पदों को भरने की मांग की है।
उधर, आयुर्वेद उपमंडल अधिकारी रोहिणी ने माना कि स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की कमी है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त पड़े स्टाफ की कमी को लेकर विभाग के अधिकारियों को समय समय पर सूचित किया जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही रिक्त पदों पर स्टाफ की तैनाती होगी।
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केवल कागजों में चल रहा दुर्गम क्षेत्र काशापाट और लबाना सदाना स्वास्थ्य केंद्र
ग्रामीण 50-60 किलोमीटर दूर रामपुर पहुंच कर उपचार करवाने को मजबूर
गुलजारी लाल डमालू
डंसा (रामपुर बुशहर)। प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रह रही जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लाख दावे करे, लेकिन धरातल में इन दावों की सरेआम पोल खुल रही है। रामपुर विकास खंड की विभिन्न पंचायतों में स्थित आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र सुविधाओं का सच दर्शा रहे हैं, यहां स्टाफ की कमी के चलते ग्रामीण खासे परेशान हैं, लेकिन ग्रामीणों की सुनवाई न तो सरकार कर रही है और न ही आयुर्वेदिक विभाग।
रामपुर विकास खंड की 31 पंचायतों में प्रदेश सरकार ने आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र तो खोल दिए, लेकिन ये स्वास्थ्य केंद्र बिना स्टाफ के ग्रामीणों का मुंह चिढ़ा रहे हैं। खंड के चार आयुर्वेदिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डंसा, लालसा, शिंगला और रचोली में स्टाफ की कमी है। यहां न तो डॉक्टर हैं और न ही फार्मासिस्ट। इन पंचायतों में सैकड़ों लोग रोजाना उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं, लेकिन मरीजों को यहां उपचार सुविधा नहीं मिलती और उन्हें छोटी सी बीमारी होने पर भी कई किलोमीटर दूर रामपुर या दूसरी जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। यही नहीं उपमंडल के दुर्गम क्षेत्र काशापाट और 15/20 क्षेत्र की लबाना सदाना पंचायत स्थित स्वास्थ्य केंद्र केवल कागजों में ही चल रहे हैं, जबकि इन केंद्रों में स्टाफ तक नहीं है। सरकार और आयुर्वेदिक विभाग ग्रामीणों के स्वास्थ्य को लेकर कितना सजग है, इसका अंदाजा इन स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचकर लगा सकते हैं।
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डंसा पंचायत प्रधान पदमा कुमारी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में रिक्त पदों को लेकर कई मर्तबा सरकार और विभाग के धिकारियों को प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन पदों को भरने में सरकार नाकाम साबित हो रही है।
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क्षेत्र के लोगों दौलत राम, बंसी लाल, अजय कुमार, गुरजीत, सुंदर सिंह, बालानंद शर्मा, तारा चंद, शिशु पाल, घनश्याम, छतर सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और आयुर्वेदिक विभाग से जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त पड़े पदों को भरने की मांग की है।
उधर, आयुर्वेद उपमंडल अधिकारी रोहिणी ने माना कि स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की कमी है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त पड़े स्टाफ की कमी को लेकर विभाग के अधिकारियों को समय समय पर सूचित किया जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही रिक्त पदों पर स्टाफ की तैनाती होगी।