{"_id":"5c4f27f7bdec2273a74cf8fa","slug":"154869156517-rampur-hp-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"15 दिन के स्वर्ग प्रवास के बाद वापस लौटे देवता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
15 दिन के स्वर्ग प्रवास के बाद वापस लौटे देवता
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुमारसैन(रामपुर बुशहर)। कोटगढ़ क्षेत्र के आराध्य देवता चतुर्मुख अपने 15 दिन के स्वर्ग प्रवास से सोमवार को लौटे। इस दौरान देवता के 15 दिन के प्रवास के समाप्त होने के बाद देवता साहिब के आगमन के लिए मंदिर परिसर मे सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
सोमवार को सर्व प्रथम मंदिर में विधिवत पूजा पाठ के साथ देवता के आगमन के कार्यक्रम का आगाज किया गया। यहां पंहुचे सैकड़ों लोगों ने देवता साहिब के दर्शन किए। अपने गूर के माध्यम से देवता साहिब ने बताया कि इस वर्ष अच्छी फसल के संकेत हैं, वही पूरे वर्ष भर क्षेत्र में सुख समृद्धि बनी रहेगी। वहीं इंद्र देवता भी समय-समय पर अच्छी फसल के लिए मेहरबान रहेंगे।
देव पंरपरा के अनुसार माना जाता है कि अपने स्वर्ग प्रवास में गए देवी-देवता अपने क्षेत्र की सुख समृद्धि और अच्छी फसल होने का भरपूर प्रयास करते हैं। माना जाता है कि जब देवी देवता अपने 15 दिन के स्वर्ग प्रवास पर होते हैं तो क्षेत्र में किसी भी घर और मंदिर में पूजा पाठ नहीं होता। 15 दिन बाद जब देवता साहिब अपने क्षेत्र लौटते है तो पूजा पाठ आरंभ किया जाता है। इस दौरान देवता चुतर्मुख मैलन के मंदिर में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भंडारे के माध्यम से देवता का प्रसाद भी ग्रहण किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
सोमवार को सर्व प्रथम मंदिर में विधिवत पूजा पाठ के साथ देवता के आगमन के कार्यक्रम का आगाज किया गया। यहां पंहुचे सैकड़ों लोगों ने देवता साहिब के दर्शन किए। अपने गूर के माध्यम से देवता साहिब ने बताया कि इस वर्ष अच्छी फसल के संकेत हैं, वही पूरे वर्ष भर क्षेत्र में सुख समृद्धि बनी रहेगी। वहीं इंद्र देवता भी समय-समय पर अच्छी फसल के लिए मेहरबान रहेंगे।
विज्ञापन
देव पंरपरा के अनुसार माना जाता है कि अपने स्वर्ग प्रवास में गए देवी-देवता अपने क्षेत्र की सुख समृद्धि और अच्छी फसल होने का भरपूर प्रयास करते हैं। माना जाता है कि जब देवी देवता अपने 15 दिन के स्वर्ग प्रवास पर होते हैं तो क्षेत्र में किसी भी घर और मंदिर में पूजा पाठ नहीं होता। 15 दिन बाद जब देवता साहिब अपने क्षेत्र लौटते है तो पूजा पाठ आरंभ किया जाता है। इस दौरान देवता चुतर्मुख मैलन के मंदिर में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भंडारे के माध्यम से देवता का प्रसाद भी ग्रहण किया।
विज्ञापन