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भावावैली में 24 ट्रांसफार्मर 2 कर्मचारियों के हवाले
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सुरजीत नेगी
भावानगर (किन्नौर)। राज्य बिजली बोर्ड का उदासीन रवैया किन्नौर जिले की भावावैली के ग्रामीणों और कर्मचारियों पर भारी पड़ रहा है। भावावैली में बिजली के 24 ट्रांसफार्मर मात्र दो कर्मचारियों के सहारे चल रहे हैं। मौजूदा समय में इन दो कर्मचारियों को एक जगह से दूसरी जगह बिजली लाइन दुरुस्त करने के लिए जाना पड़े तो घंटों समय लग जाता है।
जानकारी के अनुसार ये दो कर्मचारी भावावैली के 14 गांव के अलावा कंडार और साक कंडे में बिजली सप्लाई का जिम्मा संभाले हुए हैं। भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्र के चलते इन कर्मचारियों को बिजली सेवा दुरुस्त रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। भावावैली में बिजली बोर्ड के कई पद वर्षों से खाली चल रहे हैं। क्षेत्र के लोगों ने बोर्ड से विभिन्न मंचों के माध्यम से कई बार रिक्त पड़े पदों को भरने की मांग उठाई। बोर्ड द्वारा भावावैली को 20 किमी दूर कंडार से बेहद खतरनाक पहाड़ी होते हुए बिजली सप्लाई दी गई है। ऐसे में इन दो कर्मचारियों को बिजली लाइन में फॉल्ट आने पर फॉल्ट तलाश करने में पूरा दिन लग जाता है।
क्षेत्र के लोगों को मलाल है कि बोर्ड यहां स्थापित संजय परियोजना और भावा संवर्द्धन परियोजना से करोड़ों कमा कर मालामाल हो रहा हैं। वहीं उन्हें आए दिन बिजली समस्या से जूझना पड़ रहा है। समाज सेवी दौलत राम नेगी, कापनू पंचायत उपप्रधान गुलाब नेगी, किन्नौर युकां सचिव दीपक नेगी, खंड युकां सह सचिव नरेंद्र नेगी और विशेष नेगी सहित कई लोगों ने बोर्ड की लचर कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब एक कर्मचारी छुट्टी पर चला जाता है तो दूसरे कर्मचारी को अकेले ही क्षेत्र की बिजली सेवा का जिम्मा संभालना पड़ता है। भावावैली में दो वर्ष से जेई का पद खली चला हुआ है। इसके अलावा एक फोर मैन, 6 लाइन मैन, 6 एसीस्टेंट और 8 टीमेट के पद बीते कई वर्षों से रिक्त पड़े हुए हैं। इसके चलते वैली में बत्ती गुल होने की परेशानियां ग्रामीणों को झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार और बोर्ड से जल्द से जल्द स्टाफ की तैनाती की मांग उठाई है।
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इस संबंध में बिजली बोर्ड ऑपरेशन विंग के सहायक अभियंता जितेश नेगी के अनुसार भावावैली में स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए बोर्ड को कई बार पत्र लिखा गया है। बावजूद इसके यहां स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। स्टाफ की कमी होने के बावजूद भी भावावैली में नियमित बिजली सप्लाई देने का भरसक प्रयास किया जा रहा है।
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भावानगर (किन्नौर)। राज्य बिजली बोर्ड का उदासीन रवैया किन्नौर जिले की भावावैली के ग्रामीणों और कर्मचारियों पर भारी पड़ रहा है। भावावैली में बिजली के 24 ट्रांसफार्मर मात्र दो कर्मचारियों के सहारे चल रहे हैं। मौजूदा समय में इन दो कर्मचारियों को एक जगह से दूसरी जगह बिजली लाइन दुरुस्त करने के लिए जाना पड़े तो घंटों समय लग जाता है।
जानकारी के अनुसार ये दो कर्मचारी भावावैली के 14 गांव के अलावा कंडार और साक कंडे में बिजली सप्लाई का जिम्मा संभाले हुए हैं। भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्र के चलते इन कर्मचारियों को बिजली सेवा दुरुस्त रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। भावावैली में बिजली बोर्ड के कई पद वर्षों से खाली चल रहे हैं। क्षेत्र के लोगों ने बोर्ड से विभिन्न मंचों के माध्यम से कई बार रिक्त पड़े पदों को भरने की मांग उठाई। बोर्ड द्वारा भावावैली को 20 किमी दूर कंडार से बेहद खतरनाक पहाड़ी होते हुए बिजली सप्लाई दी गई है। ऐसे में इन दो कर्मचारियों को बिजली लाइन में फॉल्ट आने पर फॉल्ट तलाश करने में पूरा दिन लग जाता है।
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क्षेत्र के लोगों को मलाल है कि बोर्ड यहां स्थापित संजय परियोजना और भावा संवर्द्धन परियोजना से करोड़ों कमा कर मालामाल हो रहा हैं। वहीं उन्हें आए दिन बिजली समस्या से जूझना पड़ रहा है। समाज सेवी दौलत राम नेगी, कापनू पंचायत उपप्रधान गुलाब नेगी, किन्नौर युकां सचिव दीपक नेगी, खंड युकां सह सचिव नरेंद्र नेगी और विशेष नेगी सहित कई लोगों ने बोर्ड की लचर कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब एक कर्मचारी छुट्टी पर चला जाता है तो दूसरे कर्मचारी को अकेले ही क्षेत्र की बिजली सेवा का जिम्मा संभालना पड़ता है। भावावैली में दो वर्ष से जेई का पद खली चला हुआ है। इसके अलावा एक फोर मैन, 6 लाइन मैन, 6 एसीस्टेंट और 8 टीमेट के पद बीते कई वर्षों से रिक्त पड़े हुए हैं। इसके चलते वैली में बत्ती गुल होने की परेशानियां ग्रामीणों को झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार और बोर्ड से जल्द से जल्द स्टाफ की तैनाती की मांग उठाई है।
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इस संबंध में बिजली बोर्ड ऑपरेशन विंग के सहायक अभियंता जितेश नेगी के अनुसार भावावैली में स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए बोर्ड को कई बार पत्र लिखा गया है। बावजूद इसके यहां स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। स्टाफ की कमी होने के बावजूद भी भावावैली में नियमित बिजली सप्लाई देने का भरसक प्रयास किया जा रहा है।