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नारायण देवता बटसेरी के स्वर्ग प्रवास निकलते ही घरों में 5 दिन चलेगा मेला

Mon, 14 Jan 2019 10:03 PM IST
ASHOK CHAUHAN ashok chauhan
Updated Mon, 14 Jan 2019 10:03 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर के बटसेरी गांव में सभ्यता और संस्कृति को संजोए रखने सहित आपसी भाईचारे के पवित्र रिश्तों को बरकरार रखने वाला प्रसिद्ध उतरेनी मेला सूर्य देव के उतराईनी के साथ शुरू हुआ। दशकों से इस पौराणिक और परंपरागत मेले को सभी ग्रामवासी बड़े जोश के साथ मनाते हैं। हर वर्ष 13 जनवरी के मध्यरात्रि को ग्रामीण लोग अपने ईष्ट देवता बद्री नारायण, विष्णु नारायण और तपो नारायण के देवालय में हाजिरी भरते हैं।
तीनों देवताओं के स्वर्ग प्रवास से पूर्व ग्रामीण मंदिर में इकट्ठे होकर पूरे 15 दिनों तक क्षेत्र की सुख शांति के लिए भेंट चढ़ाते हैं। उसके बाद वाद्य यंत्रों की धुनों पर और पूजा-अर्चना के साथ स्वर्ग प्रवास के लिए ग्रामीणों द्वार विदाई दी जाती है। स्वर्ग प्रवास जाने से पूर्व गांव के दो नाबालिग नवयुवकों को चुनकर मेले की पूरी जिम्मेवारी की बागडोर उनके हाथों में सौंपकर देवता स्वर्ग प्रवास पर निकलते हैं। उसके बाद मंदिरों के कपाट एक माह के लिए बंद हो जाते हैं। करीब एक माह तक कोई भी धार्मिक अनुष्ठान नहीं होता।
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स्वर्ग प्रवास के तुरंत बाद ग्रामीण देवताओं की ओर से चुने गए दो बालकों का शुद्धिकरण कर ईष्ट देवता स्वरूप मानते हैं। पांच दिनों तक चलने वाले प्रसिद्ध मेला उतरेनी का आगाज होता है। यह विशेष पर्व गांव के प्रत्येक कुटुंबों के घरों से आरंभ होता है। दोनों देव स्वरूपी नाबालिगों की देखभाल के लिए बाकायदा एक महिला और पुरुष की नियुक्ति की जाती है, जिनका कार्य उन बालकों को किन्नौरी पारंपरिक वेशभूषा पहनाकर पौराणिक संस्कृति से अवगत करवाना होता है। इस विशेष पर्व के दौरान इन बालकों को मात्र 2 से 3 घंटे सोने का अवसर पर मिलता है। अधिकांश समय उनको बारी-बारी से ग्रामीणों के घरों के ऊपरी कोनों में देव स्वरूपी मानकर विराजमान किया जाता है।
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वहीं सभी ग्रामीण उक्त दो देव स्वरूपों के साथ उतरेनी मेले का गायन ‘आएलो जोन लाए लो आए लो योंना हेलेमा योस’ के साथ कार्यक्रम का आगाज करते हैं। यदि इस पर्व के दौरान बर्फ पड़े तो मेले में चार चांद लग जाते हैं। बर्फबारी का होना शुभ माना जाता है। पर्व के अंतिम दिन ग्रामीण दोनों बालकों के साथ सामूहिक रूप से सुख शांति और समृद्धि के लिए गांव के चारों ओर भ्रमण करते हैं। दोनों बालकों को काफी आवभगत के साथ गांव के प्रत्येक घरों से विदाई दी जाती है। बद्री नारायण मंदिर कमेटी के मोतमीन संजीव लोक्टस, माथैस यशवंत सिंह शानटेशटो, कायथ भगवान सिंह रेपाल्टो और पुजारी दया कृष्णन दुध्यान के अनुसार हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विशेष पर्व को मनाने के लिए ग्रामीण दस दिन पूर्व से ही तैयारियों में जुट जाते हैं। जिले के सभी देवी-देवता अब एक माह के स्वर्ग प्रवास पर निकल चुके हैं।
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