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मिड-डे मील वर्करों को मिले 6300 रुपये वेतन
Updated Thu, 08 Feb 2018 09:36 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुमारसैन (रामपुर बुशहर)। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन खंड इकाई कुमारसैन की बैठक वीरवार को कुमासैन में हुई। बैठक को संबोधित करते हुए सीटू क्षेत्रीय कमेटी सचिव कुलदीप और इकाई सचिव जगदीश ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2009 के बाद अभी तक मिड-डे मील वर्करों के वेतन में बढ़ोतरी नहीं की है। हालांकि, केंद्र की मोदी सरकार ने सत्ता में आने पर अच्छे दिनों का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के 3 वर्ष बाद भी 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया। साथ ही सभी योजना कर्मियों को मजदूरों की श्रेणी में लाया जाएगा, न्यूनतम वेतन दिया जाएगा, मेडिकल सुविधा दी जाएगी, पेंशन सुविधा दी जाएगी, इन सभी फैसलों को लागू न करके मिड डे मील योजना को ठेके पर दे कर वेदांता और इस्कान को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। मिड डे मील वर्कर्स इन समस्याओं और अपनी मांगों को लेकर सरकार से मांग कर रहे हैं। इसमें न्यूनतम वेतन 6300, नौकरी से निकालने की 25 बच्चों की शर्त को हटाकर प्रत्येक स्कूल में 2 मिड डे मील वर्कर नियुक्त करने, वर्करों को छुट्टियां देने, 10 महीने की बजाय 12 महीने का वेतन देने, योजना को ठेके पर न देने की मांग करने के साथ ही कहा कि मांगों को लेकर यदि प्रदेश सरकार मिड डे मील के पक्ष में नीतियां नहीं बनाती है तो मील वर्कर यूनियन संघर्ष करेगी। इस अवसर पर टेक चंद, सरिता, ममता, राजीव, जितेंद्र, उर्मिला के अलावा कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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कुमारसैन (रामपुर बुशहर)। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन खंड इकाई कुमारसैन की बैठक वीरवार को कुमासैन में हुई। बैठक को संबोधित करते हुए सीटू क्षेत्रीय कमेटी सचिव कुलदीप और इकाई सचिव जगदीश ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2009 के बाद अभी तक मिड-डे मील वर्करों के वेतन में बढ़ोतरी नहीं की है। हालांकि, केंद्र की मोदी सरकार ने सत्ता में आने पर अच्छे दिनों का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के 3 वर्ष बाद भी 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया। साथ ही सभी योजना कर्मियों को मजदूरों की श्रेणी में लाया जाएगा, न्यूनतम वेतन दिया जाएगा, मेडिकल सुविधा दी जाएगी, पेंशन सुविधा दी जाएगी, इन सभी फैसलों को लागू न करके मिड डे मील योजना को ठेके पर दे कर वेदांता और इस्कान को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। मिड डे मील वर्कर्स इन समस्याओं और अपनी मांगों को लेकर सरकार से मांग कर रहे हैं। इसमें न्यूनतम वेतन 6300, नौकरी से निकालने की 25 बच्चों की शर्त को हटाकर प्रत्येक स्कूल में 2 मिड डे मील वर्कर नियुक्त करने, वर्करों को छुट्टियां देने, 10 महीने की बजाय 12 महीने का वेतन देने, योजना को ठेके पर न देने की मांग करने के साथ ही कहा कि मांगों को लेकर यदि प्रदेश सरकार मिड डे मील के पक्ष में नीतियां नहीं बनाती है तो मील वर्कर यूनियन संघर्ष करेगी। इस अवसर पर टेक चंद, सरिता, ममता, राजीव, जितेंद्र, उर्मिला के अलावा कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे।