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जनजातीय भवन में होगी पार्किंग, हाल सुविधा
Updated Wed, 03 Jan 2018 06:22 PM IST
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शिलान्यास
- फोटो : अमर उजाला ब्यूराे
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रामपुर बुशहर। जनजातीय भवन के लिए नए बजट में प्रावधान किया जाएगा। इस भवन को एक साल के भीतर पूरा किया जाएगा। जनजातीय विकास और कृषि मंत्री रामलाल मारकंडा ने कहा कि इस भवन में बहुउद्देश्यीय हाल और वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनजातीय भवन की नई ड्राइंग तैयार कर सरकार के पास भेजी जाए।
जनजातीय क्षेत्रों के लोगों की सुविधा के लिए प्रस्तावित जनजातीय भवन का पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 14 नवंबर 2011 में शिलान्यास किया था। तीन जनवरी 2018 को भी जनजातीय भवन त्रिशंकु बना हुआ है। इन भवन के निर्माण पर कोई राशि खर्च नहीं की जा सकी है। जनजातीय भवन के लिए सरकार ने 50 हजार की राशि भी स्वीकृत की थी। लेकिन यह राशि खर्च नहीं होने से लैप्स हो गई। शिलान्यास कार्यक्रम में तत्कालीन विधायक तेजवंत भी मौजूद थे। बताते हैं कि यह भवन उस समय 63.30 लाख में बनना था और अब इसे बनाने पर कम से कम पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे। तत्कालीन धूमल सरकार ने ढाई बीघा भूमि प्रस्तावित कर रखी थी और विभाग के नाम पर जमीन स्थानांतरित भी कर दी गई थी। धीरे-धीरे समय और सरकार भी बदली। लेकिन जनजातीय भवन का निर्माण नहीं हो सका। प्रदेश के दो जिलों खासकर किन्नौर और लाहौल स्पीति के ग्रामीण लोगों को जनजातीय भवन का सबसे ज्यादा लाभ मिलना था। ये दोनों जिले सर्दियों में बर्फबारी के बाद पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाते हैं। यहां के लोगों को अपने घरों के लिए लौटना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में रामपुर में जनजातीय भवन के निर्माण की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। चार मंजिला जनजातीय भवन बनाना प्रस्तावित था और दो मंजिल की बेसमेंट थी। इसमें कमरे और डोर मेटरी का निर्माण किया जाना था। भाजपा सरकार के बाद जनजातीय भवन भी राजनीतिक का शिकार बन गया और यह प्रोजेक्ट अधर में पड़ गया।
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जनजातीय क्षेत्रों के लोगों की सुविधा के लिए प्रस्तावित जनजातीय भवन का पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 14 नवंबर 2011 में शिलान्यास किया था। तीन जनवरी 2018 को भी जनजातीय भवन त्रिशंकु बना हुआ है। इन भवन के निर्माण पर कोई राशि खर्च नहीं की जा सकी है। जनजातीय भवन के लिए सरकार ने 50 हजार की राशि भी स्वीकृत की थी। लेकिन यह राशि खर्च नहीं होने से लैप्स हो गई। शिलान्यास कार्यक्रम में तत्कालीन विधायक तेजवंत भी मौजूद थे। बताते हैं कि यह भवन उस समय 63.30 लाख में बनना था और अब इसे बनाने पर कम से कम पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे। तत्कालीन धूमल सरकार ने ढाई बीघा भूमि प्रस्तावित कर रखी थी और विभाग के नाम पर जमीन स्थानांतरित भी कर दी गई थी। धीरे-धीरे समय और सरकार भी बदली। लेकिन जनजातीय भवन का निर्माण नहीं हो सका। प्रदेश के दो जिलों खासकर किन्नौर और लाहौल स्पीति के ग्रामीण लोगों को जनजातीय भवन का सबसे ज्यादा लाभ मिलना था। ये दोनों जिले सर्दियों में बर्फबारी के बाद पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाते हैं। यहां के लोगों को अपने घरों के लिए लौटना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में रामपुर में जनजातीय भवन के निर्माण की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। चार मंजिला जनजातीय भवन बनाना प्रस्तावित था और दो मंजिल की बेसमेंट थी। इसमें कमरे और डोर मेटरी का निर्माण किया जाना था। भाजपा सरकार के बाद जनजातीय भवन भी राजनीतिक का शिकार बन गया और यह प्रोजेक्ट अधर में पड़ गया।
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