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रामपुर कॉलेज में पीटीए अध्यक्ष की नियुक्त पर सवाल
Updated Tue, 21 Nov 2017 09:55 PM IST
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रामपुर बुशहर। पीजी कॉलेज रामपुर में पीटीए के गठन पर विवाद खड़ा हो गया। एक ही व्यक्ति के बार-बार अध्यक्ष पद पर ताजपोशी को लेकर सवाल उठाए। इसके अलावा कॉलेज में पीटीए फंड के तौर पर वसूली गई 400 रुपये प्रति छात्र राशि पर प्रश्न उठ रहे हैं। यही नहीं अध्यक्ष के विरोध में पीटीए में शामिल शिक्षकों ने भी खिलाफत कर ली है और स्वयं को पीटीए से अलग कर दिया है। पीटीए अध्यक्ष कितनी बार अध्यक्ष बन सकता है, इसका नियम नहीं बनाया गया।
कॉलेज पीटीए की बैठक मंगलवार को थी। इसमें कॉलेज के आय व्यय पर चर्चा और नई कार्यकारिणी का भी गठन किया जाना था। हैरानी की बात है कि कॉलेज में अध्ययनरत करीब 4800 विद्यार्थियों में से सिर्फ 80 छात्रों के अभिभावक ही बैठक में आए। पिछले चार साल से एक ही व्यक्ति अध्यक्ष बनाया जा रहा है। इसका प्रमुख कारण यही माना जा रहा है कि गिनती के सदस्यों को पीटीए बैठक की सूचना व्यक्तिगत तौर पर दे दी जाती है, जिससे अध्यक्ष पद पर किसी और की ताजपोशी न हो पाए। पीटीए बैठक की सूचना देने के लिए कोई ठोस व्यवस्था कॉलेज प्रशासन आज तक नहीं कर पाया। वर्तमान समय में स्कूलों में अगर पीटीए बैठक बुलाई जाती है तो बच्चों के अभिभावकों के मोबाइल पर इसका संदेश भेजा जाता है, जबकि कॉलेज में ऐसी व्यवस्था नहीं है। व्यवस्था से पीटीए के गठन में पारदर्शिता भी बनी रहती है। कॉलेज प्रशासन की इस लापरवाही के चलते चुनिंदा सदस्य ही कॉलेज की पीटीए में पहुंच पाते हैं। कॉलेज पीटीए बैठक में मौजूद कुछ सदस्यों ने व्यवस्था की कमियां उजागर की। साथ ही व्यवस्था में सुधार लाने की जरूरत भी महसूस की। पिछली बार छात्रों से पीटीए फंड के रूप में 400 रुपये की राशि वसूलने पर भी आपत्ति जताई गई। सदस्य जानना चाहते थे कि प्रति छात्र जो 400 रुपये की राशि वसूली गई है, उसे कहां खर्च किया इसका ब्यौरा बैठक में दिया जाए। इस मामले को कॉलेज प्रबंधन ने गोलमोल जवाब देकर दबा दिया। शिक्षक जीवन मसोई, योजना ठाकुर और राजन नेगी ने विरोध में कार्यकारिणी से अपना नाम वापस लेने की घोषणा कर दी है। फैसला लिया गया है कि पीटीए की बैठक से जो अभिभावक गैर मौजूद रहे, उनसे 200 रुपये प्रति अभिभावक जुर्माना वसूला जाए। इसे पीटीए फंड में जमा कर दिया जाए।
छात्रों को व्यक्तिगत तौर पर देते हैं जानकारी : पीसी कश्यप
कॉलेज प्राचार्य पीसी कश्यप कहते हैं कि पीटीए की नई कार्यकारिणी का गठन किया है। शिक्षकों को भी मनाने की कोशिश की जाएगी। छात्रों को व्यक्तिगत तौर पर पीटीए बैठक के संबंध में जानकारी के लिए स्लिप भी दी जाती है। इसके बावजूद अभिभावक बैठक में नहीं आते।
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कॉलेज पीटीए की बैठक मंगलवार को थी। इसमें कॉलेज के आय व्यय पर चर्चा और नई कार्यकारिणी का भी गठन किया जाना था। हैरानी की बात है कि कॉलेज में अध्ययनरत करीब 4800 विद्यार्थियों में से सिर्फ 80 छात्रों के अभिभावक ही बैठक में आए। पिछले चार साल से एक ही व्यक्ति अध्यक्ष बनाया जा रहा है। इसका प्रमुख कारण यही माना जा रहा है कि गिनती के सदस्यों को पीटीए बैठक की सूचना व्यक्तिगत तौर पर दे दी जाती है, जिससे अध्यक्ष पद पर किसी और की ताजपोशी न हो पाए। पीटीए बैठक की सूचना देने के लिए कोई ठोस व्यवस्था कॉलेज प्रशासन आज तक नहीं कर पाया। वर्तमान समय में स्कूलों में अगर पीटीए बैठक बुलाई जाती है तो बच्चों के अभिभावकों के मोबाइल पर इसका संदेश भेजा जाता है, जबकि कॉलेज में ऐसी व्यवस्था नहीं है। व्यवस्था से पीटीए के गठन में पारदर्शिता भी बनी रहती है। कॉलेज प्रशासन की इस लापरवाही के चलते चुनिंदा सदस्य ही कॉलेज की पीटीए में पहुंच पाते हैं। कॉलेज पीटीए बैठक में मौजूद कुछ सदस्यों ने व्यवस्था की कमियां उजागर की। साथ ही व्यवस्था में सुधार लाने की जरूरत भी महसूस की। पिछली बार छात्रों से पीटीए फंड के रूप में 400 रुपये की राशि वसूलने पर भी आपत्ति जताई गई। सदस्य जानना चाहते थे कि प्रति छात्र जो 400 रुपये की राशि वसूली गई है, उसे कहां खर्च किया इसका ब्यौरा बैठक में दिया जाए। इस मामले को कॉलेज प्रबंधन ने गोलमोल जवाब देकर दबा दिया। शिक्षक जीवन मसोई, योजना ठाकुर और राजन नेगी ने विरोध में कार्यकारिणी से अपना नाम वापस लेने की घोषणा कर दी है। फैसला लिया गया है कि पीटीए की बैठक से जो अभिभावक गैर मौजूद रहे, उनसे 200 रुपये प्रति अभिभावक जुर्माना वसूला जाए। इसे पीटीए फंड में जमा कर दिया जाए।
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छात्रों को व्यक्तिगत तौर पर देते हैं जानकारी : पीसी कश्यप
कॉलेज प्राचार्य पीसी कश्यप कहते हैं कि पीटीए की नई कार्यकारिणी का गठन किया है। शिक्षकों को भी मनाने की कोशिश की जाएगी। छात्रों को व्यक्तिगत तौर पर पीटीए बैठक के संबंध में जानकारी के लिए स्लिप भी दी जाती है। इसके बावजूद अभिभावक बैठक में नहीं आते।
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