{"_id":"5aaa7cdc4f1c1b71778b58ef","slug":"121521122524-rampur-bushahar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खनेरी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं चरमराईं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खनेरी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं चरमराईं
Updated Thu, 15 Mar 2018 09:39 PM IST
विज्ञापन
hospital
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुभाष सेन
रामपुर बुशहर।
चार जिलों के हजारों लोगों को स्वास्थ्य सुविधा देने वाले खनेरी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा है। सरकार चाहे कांग्रेस की रही हो या भाजपा की, स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के सिवाय मरीजों को आज तलक कुछ नहीं मिल पाया है।
जिला किन्नौर, शिमला, कुल्लू और मंडी से मरीज भले ही उम्मीद के साथ यहां पहुंचते हों लेकिन यहां डॉक्टर और सुविधाओं की कमी उन्हें निराश कर देती है। सैकड़ों किलोमीटर का सफर कर आने वाले तीमारदारों के लिए मरीजों को भर्ती करवाना मजबूरी बन जाता है। यहां से शिमला की ओर रुख करना, मतलब सैकड़ों किलोमीटर का अतिरिक्त सफर। अब यदि मरीज गरीब तबके का हो तो उसे कई दफा सोचने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में अधूरी सुविधाओं से ही मरीज का उपचार होता है। मरीजों की सुविधाओं को देखते हुए यहां नामात्र की सुविधाएं ही उपलब्ध हैं। इस अस्पताल में रोजाना 1000 के करीब ओपीडी है।
प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह के गृहक्षेत्र के अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल बेहाल है। हर बार विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस प्रत्याशी जीत दर्ज करता आया है। फिर भी यहां स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हो पाया। रामपुर के विधायक नंद लाल पूर्व में सीपीएस स्वास्थ्य रह चुके हैं लेकिन उनके कार्यकाल में भी यहां स्वास्थ्य सुविधाएं चरमराई ही रहीं। लोगों की बार-बार मांगों के बाद भी अस्पताल की लचर व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो पाया। दावों के सिवा कांग्रेस सरकार इस अस्पताल में कुछ नहीं कर पाई।
विज्ञापन
अब भाजपा के सत्तासीन होते ही एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट का भी अस्पताल से तबादला किया चुका है। मरीज निजी क्लीनिकों में लुटने को मजबूर हैं। परेशानी बताएं भी तो किसे? अस्पताल में जो सुविधा दो सौ रुपये में मिलती है, उसी सुविधा के लिए मरीजों को निजी क्लीनिकों में 700 से 800 रुपये चुकाने पड़ते हैं। यहां आए दिन एक्सरे मशीन भी जवाब दे देती है। मरीजों को फिर निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ता है। करीब दो दशक पुरानी एक्सरे मशीन से एक्सरे भी घटिया क्वालिटी के हैं। डॉक्टर फिर मरीज को एक्सरे करवाने के लिए चक्कर लगवाते हैं।
चल रहा है कमाई का धंधा
महात्मा गांधी चिकित्सा परिसर खनेरी में सेटिंग की कमाई का धंधा वर्षों से चल रहा है। पूर्व सीपीएस से लोगों ने कई मर्तबा इस मुद्दे को उठाया, लेकिन कुछ नहीं हो पाया। अस्पताल के डॉक्टरों और दवा विक्रेताओं की मिलीभक्त का भी मरीजों को शिकार होना पड़ रहा है। डॉक्टर चुनिंदा दवा विक्रेता से ही मरीज को दवा खरीदने की सलाह देते हैं। कमीशन पर आधारित गोरखधंधे पर कोई भी सरकार लगाम नहीं लगा पाई है। न ही मरीजों की सुविधा के लिए यहां जन औषधि केंद्र खुल पाया है। वर्षों पुरानी मांग के बाद वर्ष 2017 में यहां जन औषधि केंद्र खुलने को मंजूरी मिली लेकिन केंद्र के संचालन का मुद्दा ठंडे बस्ते में पड़ा है। जन औषधि केंद्र खोलने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी अभी तक मरीजों को इसकी सुविधा नहीं मिल पाई है। अस्पताल में तैनात डॉक्टर सॉल्ट का हवाला देकर सिविल सप्लाई के मेडिकल स्टोर से भी मरीजों को महंगे दामों पर दवाइयां खरीदने को विवश होना पड़ रहा है।
नहीं मिला ट्रॉमा सेंटर
आए दिन हो रहे हादसों के शिकार मरीज यहां उपचार के लिए आते हैं। इसके बावजूद अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर का निर्माण नहीं किया गया। चार जिलों में दर्जनों ऐसे हादसे पेश आ चुके हैं, जिनमें मरीज को त्वरित उपचार न मिलने के कारण अकाल मौत का शिकार होना पड़ा है। अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर तो बन रहा है, लेकिन कछुआ गति से निर्माण चला है। काम की धीमी गति से लगा रहा है कि काम शायद अगले दस वर्षों में पूरा होगा। तब तक पीड़ितों को शिमला के चक्कर लगाने होंगे। करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये से ट्रॉमा सेंटर बन रहा है।
करीब 100 पद रिक्त
डेढ़ वर्ष से यहां आंखों के मरीजों के लिए डॉक्टर नहीं है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को शिमला के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इस समय में डॉक्टरों सहित स्टाफ के रिक्त पदों का आंकड़ा 100 के पार पहुंचने वाला है। अस्पताल में एक एमएस, 10 मेडिकल ऑफिसर, एक स्किन स्पेशलिस्ट, 1 रेडियोलॉजिस्ट, 9 फार्मासिस्ट, मैट्रन, वार्ड सिस्टर और स्टाफ नर्स के एक-एक पद, 2 एएनएम, 3 लैब तकनीशियन, 2 ओटीए, 1 अकाउंटेंट, 1 स्टोरकीपर, 2 एनओ, 1 धोबी, 25 स्वीपर, 1 डेंटल मैकेनिक, 2 किचन ब्वॉय, 15 पद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, रेफरेक्शनिस्ट, ईसीजी टैक, इलेक्ट्रिशन, एमएचएस, एफएचएस, प्लमर, लैब ऐसिस्टेंट, मेडिकल रिकॉर्ड कीपर, गैस मैकेनिक, फिजियोथैरेपिस्ट के एक-एक पद और कुक मेट के दो पद रिक्त हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का क्या आलम है?
इस बारे में खनेरी अस्पताल के एमएस सुनील शर्मा ने बताया कि अस्पताल में स्टाफ की कमी को लेकर समय-समय पर सरकार और विभागाधिकारियों को सूचित किया जाता है। अस्पताल के खाली पदों को लेकर विधान सभा में भी मुद्दा उठाया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही रिक्त पड़े पदों को भरा जाएगा।
विज्ञापन
रामपुर बुशहर।
चार जिलों के हजारों लोगों को स्वास्थ्य सुविधा देने वाले खनेरी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा है। सरकार चाहे कांग्रेस की रही हो या भाजपा की, स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के सिवाय मरीजों को आज तलक कुछ नहीं मिल पाया है।
जिला किन्नौर, शिमला, कुल्लू और मंडी से मरीज भले ही उम्मीद के साथ यहां पहुंचते हों लेकिन यहां डॉक्टर और सुविधाओं की कमी उन्हें निराश कर देती है। सैकड़ों किलोमीटर का सफर कर आने वाले तीमारदारों के लिए मरीजों को भर्ती करवाना मजबूरी बन जाता है। यहां से शिमला की ओर रुख करना, मतलब सैकड़ों किलोमीटर का अतिरिक्त सफर। अब यदि मरीज गरीब तबके का हो तो उसे कई दफा सोचने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में अधूरी सुविधाओं से ही मरीज का उपचार होता है। मरीजों की सुविधाओं को देखते हुए यहां नामात्र की सुविधाएं ही उपलब्ध हैं। इस अस्पताल में रोजाना 1000 के करीब ओपीडी है।
विज्ञापन
प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह के गृहक्षेत्र के अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल बेहाल है। हर बार विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस प्रत्याशी जीत दर्ज करता आया है। फिर भी यहां स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हो पाया। रामपुर के विधायक नंद लाल पूर्व में सीपीएस स्वास्थ्य रह चुके हैं लेकिन उनके कार्यकाल में भी यहां स्वास्थ्य सुविधाएं चरमराई ही रहीं। लोगों की बार-बार मांगों के बाद भी अस्पताल की लचर व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो पाया। दावों के सिवा कांग्रेस सरकार इस अस्पताल में कुछ नहीं कर पाई।
विज्ञापन
अब भाजपा के सत्तासीन होते ही एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट का भी अस्पताल से तबादला किया चुका है। मरीज निजी क्लीनिकों में लुटने को मजबूर हैं। परेशानी बताएं भी तो किसे? अस्पताल में जो सुविधा दो सौ रुपये में मिलती है, उसी सुविधा के लिए मरीजों को निजी क्लीनिकों में 700 से 800 रुपये चुकाने पड़ते हैं। यहां आए दिन एक्सरे मशीन भी जवाब दे देती है। मरीजों को फिर निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ता है। करीब दो दशक पुरानी एक्सरे मशीन से एक्सरे भी घटिया क्वालिटी के हैं। डॉक्टर फिर मरीज को एक्सरे करवाने के लिए चक्कर लगवाते हैं।
चल रहा है कमाई का धंधा
महात्मा गांधी चिकित्सा परिसर खनेरी में सेटिंग की कमाई का धंधा वर्षों से चल रहा है। पूर्व सीपीएस से लोगों ने कई मर्तबा इस मुद्दे को उठाया, लेकिन कुछ नहीं हो पाया। अस्पताल के डॉक्टरों और दवा विक्रेताओं की मिलीभक्त का भी मरीजों को शिकार होना पड़ रहा है। डॉक्टर चुनिंदा दवा विक्रेता से ही मरीज को दवा खरीदने की सलाह देते हैं। कमीशन पर आधारित गोरखधंधे पर कोई भी सरकार लगाम नहीं लगा पाई है। न ही मरीजों की सुविधा के लिए यहां जन औषधि केंद्र खुल पाया है। वर्षों पुरानी मांग के बाद वर्ष 2017 में यहां जन औषधि केंद्र खुलने को मंजूरी मिली लेकिन केंद्र के संचालन का मुद्दा ठंडे बस्ते में पड़ा है। जन औषधि केंद्र खोलने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी अभी तक मरीजों को इसकी सुविधा नहीं मिल पाई है। अस्पताल में तैनात डॉक्टर सॉल्ट का हवाला देकर सिविल सप्लाई के मेडिकल स्टोर से भी मरीजों को महंगे दामों पर दवाइयां खरीदने को विवश होना पड़ रहा है।
नहीं मिला ट्रॉमा सेंटर
आए दिन हो रहे हादसों के शिकार मरीज यहां उपचार के लिए आते हैं। इसके बावजूद अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर का निर्माण नहीं किया गया। चार जिलों में दर्जनों ऐसे हादसे पेश आ चुके हैं, जिनमें मरीज को त्वरित उपचार न मिलने के कारण अकाल मौत का शिकार होना पड़ा है। अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर तो बन रहा है, लेकिन कछुआ गति से निर्माण चला है। काम की धीमी गति से लगा रहा है कि काम शायद अगले दस वर्षों में पूरा होगा। तब तक पीड़ितों को शिमला के चक्कर लगाने होंगे। करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये से ट्रॉमा सेंटर बन रहा है।
करीब 100 पद रिक्त
डेढ़ वर्ष से यहां आंखों के मरीजों के लिए डॉक्टर नहीं है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को शिमला के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इस समय में डॉक्टरों सहित स्टाफ के रिक्त पदों का आंकड़ा 100 के पार पहुंचने वाला है। अस्पताल में एक एमएस, 10 मेडिकल ऑफिसर, एक स्किन स्पेशलिस्ट, 1 रेडियोलॉजिस्ट, 9 फार्मासिस्ट, मैट्रन, वार्ड सिस्टर और स्टाफ नर्स के एक-एक पद, 2 एएनएम, 3 लैब तकनीशियन, 2 ओटीए, 1 अकाउंटेंट, 1 स्टोरकीपर, 2 एनओ, 1 धोबी, 25 स्वीपर, 1 डेंटल मैकेनिक, 2 किचन ब्वॉय, 15 पद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, रेफरेक्शनिस्ट, ईसीजी टैक, इलेक्ट्रिशन, एमएचएस, एफएचएस, प्लमर, लैब ऐसिस्टेंट, मेडिकल रिकॉर्ड कीपर, गैस मैकेनिक, फिजियोथैरेपिस्ट के एक-एक पद और कुक मेट के दो पद रिक्त हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का क्या आलम है?
इस बारे में खनेरी अस्पताल के एमएस सुनील शर्मा ने बताया कि अस्पताल में स्टाफ की कमी को लेकर समय-समय पर सरकार और विभागाधिकारियों को सूचित किया जाता है। अस्पताल के खाली पदों को लेकर विधान सभा में भी मुद्दा उठाया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही रिक्त पड़े पदों को भरा जाएगा।