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पुनर्रोपण कार्य में बरतें एहतियात
Updated Sun, 07 Jan 2018 10:24 PM IST
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रोहड़ू। बगीचे के पुनर्रोपण कार्य में एहतियात बरतना बागवानों के लिए आवश्यक है। नए पौधे रोपने के लिए गड्ढे बनाने का कार्य चल रहा है। पुराने बगीचे की मिट्टी में विभिन्न प्रकार की फफूंद व जीवाणु होते हैं। इससे नए पौधे का विकास नहीं हो पाता है। बागवानी विशेषज्ञ पुनर्रोपण से पहले मिट्टी का उपचार करने की सलाह दे रहे हैं।
सेब के पौधों की उम्र बढ़ने के साथ आंशिक व संपूर्ण रूप से पुनर्रोपण की आवश्यकता होती है। प्राय: देखा गया है कि जब सेब के पुराने पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाए जाते हैं, तो उनकी अपेक्षाकृत वृद्धि कम होती है। कई बार ऐसे पौधे दो से तीन वर्षों के पश्चात या फल आने की स्थिति से पूर्व ही मर जाते हैं। इस समस्या के कई मुख्य कारण हैं। पुराने बगीचे व पौधों की मिट्टी में विभिन्न प्रकार के फफूंद व जीवाणु अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। ये फफूंद व जीवाणु पुनर्रोपित पौधों की बारीक जड़ों द्वारा पौषक तत्वों को खींचने की क्षमता को कम करते हैं। इससे पौधों की वृद्धि कम होती है। इसके अलावा भूमि में पोषक तत्वों का असंतुलित होना, पीएच प्रतिक्रिया का अम्लीय होना, बागीचे में पुराने पौधों की जड़ों के सड़ने के कारण वृक्ष विषाणुओं का अधिक मात्रा में होना भी पुनर्रोपण में बाधक बनता है।
पुराने पौधों की जड़ों को जलाएं : आगर
उद्यान विकास अधिकारी डॉ. आगर दास ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए बागीचे में पुराने पौधों की जड़ों को पूर्ण रूप से निकालकर जला दें, ताकि जैविक रोगजनक व वृक्ष विषाणुओं के प्रभाव कम हो सके। नए गड्ढों को पुराने पौधे के स्थान से थोड़ा हटकर बनाएं। नए पौधे लगाने के लिए तीन फीट गहरा व तीन फीट चौड़ा गड्ढा करीब दो माह पहले बनाना चाहिए। गड्ढे में गली सड़ी गोबर की केंचुआ खाद मिलाएं। एक किलो सुपर फास्फेट, 200 ग्राम मैलथियान मिलाकर स्वस्थ व मजबूत जड़ों वाले पौधों को लगाएं। विशेषज्ञों की सलाह लेने के बाद ही पुराने बागीचे के साथ नए पौधे को रोपने का कार्य किया जाना चाहिए।
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सेब के पौधों की उम्र बढ़ने के साथ आंशिक व संपूर्ण रूप से पुनर्रोपण की आवश्यकता होती है। प्राय: देखा गया है कि जब सेब के पुराने पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाए जाते हैं, तो उनकी अपेक्षाकृत वृद्धि कम होती है। कई बार ऐसे पौधे दो से तीन वर्षों के पश्चात या फल आने की स्थिति से पूर्व ही मर जाते हैं। इस समस्या के कई मुख्य कारण हैं। पुराने बगीचे व पौधों की मिट्टी में विभिन्न प्रकार के फफूंद व जीवाणु अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। ये फफूंद व जीवाणु पुनर्रोपित पौधों की बारीक जड़ों द्वारा पौषक तत्वों को खींचने की क्षमता को कम करते हैं। इससे पौधों की वृद्धि कम होती है। इसके अलावा भूमि में पोषक तत्वों का असंतुलित होना, पीएच प्रतिक्रिया का अम्लीय होना, बागीचे में पुराने पौधों की जड़ों के सड़ने के कारण वृक्ष विषाणुओं का अधिक मात्रा में होना भी पुनर्रोपण में बाधक बनता है।
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पुराने पौधों की जड़ों को जलाएं : आगर
उद्यान विकास अधिकारी डॉ. आगर दास ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए बागीचे में पुराने पौधों की जड़ों को पूर्ण रूप से निकालकर जला दें, ताकि जैविक रोगजनक व वृक्ष विषाणुओं के प्रभाव कम हो सके। नए गड्ढों को पुराने पौधे के स्थान से थोड़ा हटकर बनाएं। नए पौधे लगाने के लिए तीन फीट गहरा व तीन फीट चौड़ा गड्ढा करीब दो माह पहले बनाना चाहिए। गड्ढे में गली सड़ी गोबर की केंचुआ खाद मिलाएं। एक किलो सुपर फास्फेट, 200 ग्राम मैलथियान मिलाकर स्वस्थ व मजबूत जड़ों वाले पौधों को लगाएं। विशेषज्ञों की सलाह लेने के बाद ही पुराने बागीचे के साथ नए पौधे को रोपने का कार्य किया जाना चाहिए।
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