{"_id":"59f606734f1c1bd0538ba0a9","slug":"101509295731-rampur-bushahar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देवताओं के साथ लोगों ने डाली नाटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देवताओं के साथ लोगों ने डाली नाटी
Updated Sun, 29 Oct 2017 10:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भावानगर (किन्नौर)।
किन्नौर जिले के भावावैली के विभिन्न गांवों में इन दिनों ऐतिहासिक फुल्याच मेला धूमधाम से मनाया जा रहा है। क्षेत्र के लोग अपने-अपने देवालय में तीन दिन तक अपने ईष्ट देवी-देवताओं के साथ नाटी डाली। भावावैली के कटगांव महेश्वर मंदिर, कामशू नारायण मंदिर काफनू और नाग देवता मंदिर यांगपा में ग्रामीणों ने रविवार को फुल्याच मेला हर्षोल्लास से मनाया। ग्रामीणों ने ईष्ट देवता के सामने शीश नवाया और सुख समृद्धि की कामना की।
किन्नौर जिले में मेले और त्यौहार साल भर मनाए जाते हैं। लेकिन फुल्याच मेले का अपना अलग महत्व है। मेले में लोग नाच गाकर खूब मनोरंजन करते हैं। लोग साल भर अपने खेतों में होने वाले सभी कामों को निपटाने के बाद फुल्याच मेला मनाते हैं। समाजसेवक दौलत राम नेगी ने कहा कि बदलते दौर में भी किन्नौर जिले में मेले और त्यौहार परंपरा के अनुसार मनाए जाते हैं।
विज्ञापन
किन्नौर जिले के भावावैली के विभिन्न गांवों में इन दिनों ऐतिहासिक फुल्याच मेला धूमधाम से मनाया जा रहा है। क्षेत्र के लोग अपने-अपने देवालय में तीन दिन तक अपने ईष्ट देवी-देवताओं के साथ नाटी डाली। भावावैली के कटगांव महेश्वर मंदिर, कामशू नारायण मंदिर काफनू और नाग देवता मंदिर यांगपा में ग्रामीणों ने रविवार को फुल्याच मेला हर्षोल्लास से मनाया। ग्रामीणों ने ईष्ट देवता के सामने शीश नवाया और सुख समृद्धि की कामना की।
किन्नौर जिले में मेले और त्यौहार साल भर मनाए जाते हैं। लेकिन फुल्याच मेले का अपना अलग महत्व है। मेले में लोग नाच गाकर खूब मनोरंजन करते हैं। लोग साल भर अपने खेतों में होने वाले सभी कामों को निपटाने के बाद फुल्याच मेला मनाते हैं। समाजसेवक दौलत राम नेगी ने कहा कि बदलते दौर में भी किन्नौर जिले में मेले और त्यौहार परंपरा के अनुसार मनाए जाते हैं।
विज्ञापन