मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना: साढ़े पांच लाख विद्यार्थियों को अब हफ्ते में दो दिन मिलेगा अंडा या फल
प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत बच्चों को नियमित मिड-डे मील के साथ सप्ताह में बुधवार और शुक्रवार को पौष्टिक टॉप-अप दिया जाएगा।
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हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के करीब साढ़े पांच लाख विद्यार्थियों को अब सप्ताह में दो दिन अतिरिक्त पौष्टिक आहार मिलेगा। प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत बच्चों को नियमित मिड-डे मील के साथ सप्ताह में बुधवार और शुक्रवार को पौष्टिक टॉप-अप दिया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को उनकी या उनके अभिभावकों की पसंद के अनुसार उबला हुआ अंडा या ताजा फल दिया जाएगा। फल के विकल्प में उपलब्धता के अनुसार केला या सेब शामिल रहेगा।
पहले पौष्टिक आहार सप्ताह में एक दिन मिलता था
पहले यह पौष्टिक आहार सप्ताह में केवल एक दिन दिया जाता था। अब इसकी आवृत्ति बढ़ाकर दो दिन कर दी गई है। सरकार का उद्देश्य बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना और उनके स्वस्थ शारीरिक विकास एवं समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है। यह अतिरिक्त आहार नियमित मिड-डे-मील का पूरक होगा। अतिरिक्त पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी स्कूल स्तर पर मिड-डे-मील प्रभारी शिक्षक की होगी। कुक-कम-हेल्पर्स की सहायता से बच्चों को निर्धारित दिनों में समय पर आहार उपलब्ध करवाया जाएगा।
आवश्यक खाद्य सामग्री की खरीद स्थानीय बाजार से होगी
इसके लिए आवश्यक खाद्य सामग्री की खरीद स्थानीय बाजार से की जाएगी। इसमें स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों और स्कूल प्रबंधन समितियों का सहयोग लिया जा सकेगा। इससे योजना के संचालन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को देखते हुए खाद्य सामग्री की स्वच्छता पर विशेष जोर दिया गया है। अंडों को उचित तरीके से उबालकर ही विद्यार्थियों को दिया जाएगा, जबकि फलों को वितरण से पहले अच्छी तरह साफ किया जाएगा। खाद्य सामग्री की खरीद, भंडारण, तैयारी और वितरण में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों और निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
हर महीने होगी खर्च की निगरानी
योजना के लिए बजट विद्यार्थियों के दाखिले के आधार पर कोषागार के माध्यम से ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों (बीईईओ) को उपलब्ध करवाया जाएगा। बीईईओ विद्यार्थियों की संख्या और निर्धारित प्रति विद्यार्थी दर के आधार पर स्कूलों को त्रैमासिक धनराशि जारी करेंगे। स्कूलों को अतिरिक्त पौष्टिक आहार पर होने वाले खर्च का अलग रिकॉर्ड रखना होगा और बीईईओ को मासिक व त्रैमासिक व्यय विवरण देना होगा। इसके बाद बीईईओ समेकित रिपोर्ट प्रारंभिक शिक्षा उप निदेशकों को भेजेंगे और जिला स्तर की रिपोर्ट प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को भेजी जाएगी।
इन अधिकारियों की रहेगी निगरानी
योजना की निगरानी प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापक, केंद्र मुख्य शिक्षक, मुख्य शिक्षक, स्कूल प्रबंधन समितियां और संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी करेंगे। सरकार ने योजना के प्रभावी संचालन के लिए निगरानी, सामुदायिक सहभागिता और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन को महत्वपूर्ण माना है।