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‘सोचता है समंदर नदी हो जाऊं मैं...अब मीठा बन जाऊं’
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मंडी के वल्लभ कॉलेज में भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय यशपाल जयंती के अवसर ?
- फोटो : Mandi
मंडी। मनुष्य के रूप और दिव्या जैसे कालजयी उपन्यासों के रचयिता एवं हिमाचल के पुरखे साहित्यकार यशपाल को मंडी में प्रदेशभर के साहित्यकारों ने कविताओं के माध्यम से याद किया। राज्यस्तरीय साहित्य समारोह में शनिवार को कवि गोष्ठी का आयोजन वल्लभ कॉलेज मंडी में वरिष्ठ कवयित्री एवं सांझ फिल्म की नायिका रूपेश्वरी शर्मा की अध्यक्षता में किया।
इस दौरान यशपाल की भतीजी गोगी सरोज पाल विशेष रूप से मौजूद रहीं। इसमें प्रदेश के करीब 50 कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया। कवि आत्मा रंजन ने सहमति और असहमति के इस दौर पर कटाक्ष कर कहा, यह सहमति का समय है, सहमति से सिर हिलाते रहने दुम हिलाते रहने का। वरिष्ठ कवयित्री हरिप्रिया शर्मा ने नए वर्ष की आहट कविता में कुछ यूं कहा, नए वर्ष की आहट पाकर न जाने क्यों बैठे थे उदास, जैसे खो गया है कोई।
रूपेश्वरी शर्मा ने रंग थे जो गडमड हो गए भावपूर्ण कविता का पाठ किया। युवा कवि श्याम अजनबी ने कहा, सोचता है समंदर नदी हो जाऊं मैं, बड़ा बनकर खारा हो गया अब मीठा बन जाऊं मैं। जावेद इकबाल ने फिर किले बनेंगे फिर तोड़ दिए जाएंगे। डॉ. मनोज शर्मा, सुरेखा, दीनाक्षी, यादव किशोर गौतम, राजीव शर्मा, शिवानी, सुमन, ध्यान सिंह, हरीराम धीमान, सरिता हांडा, कृष्णा ठाकुर, अजीत दीवान, युद्धवीर, डॉ. मनोहर अनमोल, आशा ठाकुर, वेद कुमार, भूपेंद्र, बलवंत, विद्या शर्मा, राजेंद्र ने अपनी-अपनी रचनाओं से प्रभावित किया। युवा कवि शिवा पंचकरण और युवा कवयित्री संतोष गर्ग ने भी कविता बखान किया।
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रूपेश्वरी शर्मा ने कहा कि यशपाल जैसे क्रांतिकारियों ने प्रतिकूल परिस्थितियों में क्रांति की मशाल जलाए रखी। उनके त्याग और बलिदान से आज हम आजाद हैं। विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. सुरेश जसवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया। विभाग की ओर से सहायक निदेशक अलका एवं जिला भाषा अधिकारी मंडी प्रोमिला गुलेरिया आदि ने भाग लिया।
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इस दौरान यशपाल की भतीजी गोगी सरोज पाल विशेष रूप से मौजूद रहीं। इसमें प्रदेश के करीब 50 कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया। कवि आत्मा रंजन ने सहमति और असहमति के इस दौर पर कटाक्ष कर कहा, यह सहमति का समय है, सहमति से सिर हिलाते रहने दुम हिलाते रहने का। वरिष्ठ कवयित्री हरिप्रिया शर्मा ने नए वर्ष की आहट कविता में कुछ यूं कहा, नए वर्ष की आहट पाकर न जाने क्यों बैठे थे उदास, जैसे खो गया है कोई।
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रूपेश्वरी शर्मा ने रंग थे जो गडमड हो गए भावपूर्ण कविता का पाठ किया। युवा कवि श्याम अजनबी ने कहा, सोचता है समंदर नदी हो जाऊं मैं, बड़ा बनकर खारा हो गया अब मीठा बन जाऊं मैं। जावेद इकबाल ने फिर किले बनेंगे फिर तोड़ दिए जाएंगे। डॉ. मनोज शर्मा, सुरेखा, दीनाक्षी, यादव किशोर गौतम, राजीव शर्मा, शिवानी, सुमन, ध्यान सिंह, हरीराम धीमान, सरिता हांडा, कृष्णा ठाकुर, अजीत दीवान, युद्धवीर, डॉ. मनोहर अनमोल, आशा ठाकुर, वेद कुमार, भूपेंद्र, बलवंत, विद्या शर्मा, राजेंद्र ने अपनी-अपनी रचनाओं से प्रभावित किया। युवा कवि शिवा पंचकरण और युवा कवयित्री संतोष गर्ग ने भी कविता बखान किया।
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रूपेश्वरी शर्मा ने कहा कि यशपाल जैसे क्रांतिकारियों ने प्रतिकूल परिस्थितियों में क्रांति की मशाल जलाए रखी। उनके त्याग और बलिदान से आज हम आजाद हैं। विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. सुरेश जसवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया। विभाग की ओर से सहायक निदेशक अलका एवं जिला भाषा अधिकारी मंडी प्रोमिला गुलेरिया आदि ने भाग लिया।
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