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Mandi News: कैनियों और बोतलों में डीजल न मिलने से मुश्किल में किसान
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कृषि कार्य ठप, होटल-ढाबा संचालकों पर भी संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
चौंतड़ा (मंडी)। उपमंडल के पेट्रोल पंपों पर कैनियों और बोतलों में डीजल-पेट्रोल की बिक्री बंद होने से किसानों, बागवानों और छोटे कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इसका असर खेती-बाड़ी, बागवानी और होटल-ढाबा कारोबार पर पड़ने लगा है।
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इन दिनों कृषि कार्यों का महत्वपूर्ण समय चल रहा है। पावर टिलर, स्प्रे मशीन और वाटर पंप जैसे उपकरणों के संचालन के लिए डीजल की आवश्यकता होती है, लेकिन कैनियों में ईंधन न मिलने से कई काम प्रभावित हो रहे हैं। किसान कई किलोमीटर दूर पेट्रोल पंपों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां से ईंधन नहीं मिलने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है। इससे किसानों और बागवानों में नाराजगी बढ़ रही है।
किसानों ने प्रशासन और सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि कृषि कार्यों के लिए आवश्यक ईंधन उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
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डीजल की कमी का असर होटल, रेस्तरां और ढाबा कारोबार पर भी पड़ने लगा है। पहले से ही व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडरों की कमी से जूझ रहे कारोबारियों के सामने अब डीजल की अनुपलब्धता नई समस्या बनकर सामने आई है। डीजल भट्टियों का इस्तेमाल करने वाले कई प्रतिष्ठानों में कामकाज प्रभावित हो गया है। स्थानीय कारोबारी मनीष, कमल और अमित ने बताया कि कैनियों में डीजल नहीं मिलने से व्यवसाय चलाना मुश्किल हो गया है। कुछ ढाबा संचालकों के सामने कारोबार बंद करने जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
बॉक्स
नए निर्देशों से बढ़ी परेशानी
जोगिंद्रनगर स्थित भारत पेट्रोल पंप के प्रबंधक ओम प्रकाश ने बताया कि केंद्र सरकार और पेट्रोलियम विभाग के नए निर्देशों के तहत कैनियों और बोतलों में डीजल-पेट्रोल की बिक्री पर रोक लगाई गई है। इससे किसानों और अन्य उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भारी व्यावसायिक वाहनों को भी निर्धारित सीमा के तहत प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर ईंधन उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसे में पेट्रोल पंप संचालक सरकारी नियमों का पालन करने के लिए बाध्य हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चौंतड़ा (मंडी)। उपमंडल के पेट्रोल पंपों पर कैनियों और बोतलों में डीजल-पेट्रोल की बिक्री बंद होने से किसानों, बागवानों और छोटे कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इसका असर खेती-बाड़ी, बागवानी और होटल-ढाबा कारोबार पर पड़ने लगा है।
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इन दिनों कृषि कार्यों का महत्वपूर्ण समय चल रहा है। पावर टिलर, स्प्रे मशीन और वाटर पंप जैसे उपकरणों के संचालन के लिए डीजल की आवश्यकता होती है, लेकिन कैनियों में ईंधन न मिलने से कई काम प्रभावित हो रहे हैं। किसान कई किलोमीटर दूर पेट्रोल पंपों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां से ईंधन नहीं मिलने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है। इससे किसानों और बागवानों में नाराजगी बढ़ रही है।
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किसानों ने प्रशासन और सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि कृषि कार्यों के लिए आवश्यक ईंधन उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
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डीजल की कमी का असर होटल, रेस्तरां और ढाबा कारोबार पर भी पड़ने लगा है। पहले से ही व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडरों की कमी से जूझ रहे कारोबारियों के सामने अब डीजल की अनुपलब्धता नई समस्या बनकर सामने आई है। डीजल भट्टियों का इस्तेमाल करने वाले कई प्रतिष्ठानों में कामकाज प्रभावित हो गया है। स्थानीय कारोबारी मनीष, कमल और अमित ने बताया कि कैनियों में डीजल नहीं मिलने से व्यवसाय चलाना मुश्किल हो गया है। कुछ ढाबा संचालकों के सामने कारोबार बंद करने जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
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नए निर्देशों से बढ़ी परेशानी
जोगिंद्रनगर स्थित भारत पेट्रोल पंप के प्रबंधक ओम प्रकाश ने बताया कि केंद्र सरकार और पेट्रोलियम विभाग के नए निर्देशों के तहत कैनियों और बोतलों में डीजल-पेट्रोल की बिक्री पर रोक लगाई गई है। इससे किसानों और अन्य उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भारी व्यावसायिक वाहनों को भी निर्धारित सीमा के तहत प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर ईंधन उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसे में पेट्रोल पंप संचालक सरकारी नियमों का पालन करने के लिए बाध्य हैं।