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Mandi News: बीर सड़क अवरोध मामले में दो भाइयों को दो साल कैद
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मंडी। स्पेशल जज फैमिली कोर्ट मंडी की अदालत ने बहुचर्चित बीर गांव सड़क अवरोध मामले में फैसला सुनाते हुए दो भाइयों रूप लाल और जितेंद्र कुमार को दो साल कठोर कारावास की सजा का फैसला सुनाया। पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना भरने के आदेश दिए। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में छह-छह महीने की अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वर्ष 2021 में ग्राम पंचायत बीर में विशेष बस्ती को जोड़ने वाली सार्वजनिक सड़क को अवरुद्ध कर दिया गया था। यह सड़क हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने लगभग 40 लाख रुपये से वर्ष 2018 से 2020 के बीच बनाई थी। यह लिंक रोड आंशिक रूप से दोनों भाइयों की निजी भूमि से होकर जाता था।
पंचायत चुनावों में हार के बाद दोनों आरोपियों ने उक्त मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। इससे विशेष बस्ती की आवाजाही प्रभावित हुई। महिला मंडल की अध्यक्ष विद्या देवी ने थाना सदर मंडी में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी।
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सुनवाई के बाद अदालत ने धारा 431 आईपीसी (सार्वजनिक रास्ते को क्षति पहुंचाना) और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। फैसले में अदालत ने कहा कि यदि कोई सड़क वर्षों तक सार्वजनिक उपयोग में रही हो और सार्वजनिक धन से निर्मित हुई हो, तो निजी भूमि होने का दावा कर उसे बाद में रोकना कानून का उल्लंघन है। आरोपियों को निर्माण के समय आपत्ति दर्ज करवानी चाहिए थी, न कि तीन साल बाद अवरोध करना चाहिए था। संवाद
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अभियोजन पक्ष के अनुसार वर्ष 2021 में ग्राम पंचायत बीर में विशेष बस्ती को जोड़ने वाली सार्वजनिक सड़क को अवरुद्ध कर दिया गया था। यह सड़क हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने लगभग 40 लाख रुपये से वर्ष 2018 से 2020 के बीच बनाई थी। यह लिंक रोड आंशिक रूप से दोनों भाइयों की निजी भूमि से होकर जाता था।
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पंचायत चुनावों में हार के बाद दोनों आरोपियों ने उक्त मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। इससे विशेष बस्ती की आवाजाही प्रभावित हुई। महिला मंडल की अध्यक्ष विद्या देवी ने थाना सदर मंडी में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी।
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सुनवाई के बाद अदालत ने धारा 431 आईपीसी (सार्वजनिक रास्ते को क्षति पहुंचाना) और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। फैसले में अदालत ने कहा कि यदि कोई सड़क वर्षों तक सार्वजनिक उपयोग में रही हो और सार्वजनिक धन से निर्मित हुई हो, तो निजी भूमि होने का दावा कर उसे बाद में रोकना कानून का उल्लंघन है। आरोपियों को निर्माण के समय आपत्ति दर्ज करवानी चाहिए थी, न कि तीन साल बाद अवरोध करना चाहिए था। संवाद