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समाज में बदलाव के लिए पहले स्वयं को बदलना जरूरी : जतिन
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरकाघाट की प्रमुख जन गोष्ठी मौजूद लोग। स्रोत - संगठन
सरकाघाट में प्रमुख जन गोष्ठी आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
सरकाघाट (मंडी)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिला सरकाघाट की ओर से मंगलवार को शिव विलास होटल के सभागार में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी श्याम सिंह गुलेरिया ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि उत्तर क्षेत्र प्रचारक जतिन मुख्य वक्ता रहे।
गोष्ठी में सरकाघाट उपमंडल के प्रमुख नागरिकों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, व्यापारियों, समाजसेवियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। मुख्य वक्ता जतिन ने उपस्थित लोगों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शुरू किए गए पंच परिवर्तन को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए सबसे पहले स्वयं को बदलना आवश्यक है।
इस दौरान समाज के विभिन्न वर्गों से आए लोगों ने भी अपने सुझाव साझा किए। अपने संबोधन में जतिन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा, संगठन के निरंतर विस्तार तथा राष्ट्र जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में संघ के योगदान पर विस्तार से जानकारी दी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरकाघाट (मंडी)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिला सरकाघाट की ओर से मंगलवार को शिव विलास होटल के सभागार में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी श्याम सिंह गुलेरिया ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि उत्तर क्षेत्र प्रचारक जतिन मुख्य वक्ता रहे।
गोष्ठी में सरकाघाट उपमंडल के प्रमुख नागरिकों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, व्यापारियों, समाजसेवियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। मुख्य वक्ता जतिन ने उपस्थित लोगों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शुरू किए गए पंच परिवर्तन को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए सबसे पहले स्वयं को बदलना आवश्यक है।
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इस दौरान समाज के विभिन्न वर्गों से आए लोगों ने भी अपने सुझाव साझा किए। अपने संबोधन में जतिन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा, संगठन के निरंतर विस्तार तथा राष्ट्र जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में संघ के योगदान पर विस्तार से जानकारी दी।
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