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Mandi News: बर्फ में पैदल निकला दूल्हा, दो फीट बर्फ की चादर के बीच लिए सात फेरे
Sun, 25 Jan 2026 11:43 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sun, 25 Jan 2026 11:43 PM IST
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थुनाग (मंडी)। जिला मंडी में कुदरत के सफेद पहरे पर एक दूल्हे का जज्बा भारी पड़ गया। सराज विधानसभा क्षेत्र की केओली पंचायत के बुनालीघार गांव में भारी बर्फबारी के कारण जब रास्ते बंद हुए और वाहनों के पहिये थम गए तो दूल्हे गितेश ठाकुर ने पैदल ही बरात लेकर निकल गए। शून्य से नीचे तापमान और दो फीट मोटी बर्फ की चादर के बीच संपन्न हुई यह शादी आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
दूल्हे के पिता देवेंद्र ठाकुर ने बताया कि शादी के निर्धारित दिन यानी 23 जनवरी को कुदरत ने अपना रौद्र रूप दिखाया। इससे क्षेत्र की सड़कें पूरी तरह अवरुद्ध हो गईं। गाड़ियों का चलना नामुमकिन था, लेकिन शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए दूल्हा गितेश अपने कुछ बरातियों के साथ पैदल ही भैचड़ी गांव की ओर निकल पड़ा। घुटनों तक जमी बर्फ के बीच लगभग सात किलोमीटर का यह कठिन और बर्फीला रास्ता तय करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था, जिसे दूल्हे और उसके साथियों ने हिम्मत के साथ पार किया।
जब बरात दुल्हन उषा ठाकुर के घर पहुंची तो वहां भी चारों ओर दो फीट तक बर्फ जमी हुई थी। कड़ाके की ठंड और सीमित संसाधनों के बावजूद बर्फ की उसी सफेद चादर के बीच विवाह की सभी रस्में पूरी की गईं। 23 और 24 जनवरी की रात तक चली इस अनोखी शादी के बाद 25 जनवरी यानी रविवार सुबह यह नवविवाहित जोड़ा फिर से उसी बर्फीले रास्ते से पैदल चलते हुए अपने घर बुनालीघार पहुंचा, जहां ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ इस जांबाज जोड़े का स्वागत किया।
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दूल्हे के पिता देवेंद्र ठाकुर ने बताया कि शादी के निर्धारित दिन यानी 23 जनवरी को कुदरत ने अपना रौद्र रूप दिखाया। इससे क्षेत्र की सड़कें पूरी तरह अवरुद्ध हो गईं। गाड़ियों का चलना नामुमकिन था, लेकिन शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए दूल्हा गितेश अपने कुछ बरातियों के साथ पैदल ही भैचड़ी गांव की ओर निकल पड़ा। घुटनों तक जमी बर्फ के बीच लगभग सात किलोमीटर का यह कठिन और बर्फीला रास्ता तय करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था, जिसे दूल्हे और उसके साथियों ने हिम्मत के साथ पार किया।
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जब बरात दुल्हन उषा ठाकुर के घर पहुंची तो वहां भी चारों ओर दो फीट तक बर्फ जमी हुई थी। कड़ाके की ठंड और सीमित संसाधनों के बावजूद बर्फ की उसी सफेद चादर के बीच विवाह की सभी रस्में पूरी की गईं। 23 और 24 जनवरी की रात तक चली इस अनोखी शादी के बाद 25 जनवरी यानी रविवार सुबह यह नवविवाहित जोड़ा फिर से उसी बर्फीले रास्ते से पैदल चलते हुए अपने घर बुनालीघार पहुंचा, जहां ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ इस जांबाज जोड़े का स्वागत किया।
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