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Mandi News: शानन पोस्ट ऑफिस को बंद करने के फैसले पर भड़का जन आक्रोश
Thu, 19 Feb 2026 06:05 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 19 Feb 2026 06:05 AM IST
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जोगिंद्रनगर के शानन स्थित पोस्ट ऑफिस के बाहर प्रदर्शन करते लोग। स्त्रोत- जागरूक पाठक
जोगिंद्रनगर/लडभड़ोल (मंडी)। ऐतिहासिक शानन सब-पोस्ट ऑफिस को घाटे का हवाला देकर बंद करने के डाक विभाग के निर्णय के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। निर्णय के खिलाफ शानन संघर्ष समिति और स्थानीय निवासियों ने विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। साथ ही फैसले को तुगलकी फरमान करार देते हुए इसके खिलाफ बड़े जन-आंदोलन की चेतावनी दी है।
शानन संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश धरवाल ने डाक अधीक्षक मंडी पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि मंडी शहर के घाटे वाले डाकघरों को छोड़कर केवल ऐतिहासिक शानन केंद्र को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जमाने से चल रहे इस पोस्ट ऑफिस में वर्तमान में 4000 से अधिक सक्रिय खाते हैं और करोड़ों रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) जमा है।
क्षेत्र के फार्मेसी, बीए, नर्सिंग कॉलेज और शानन पावर हाउस जैसे प्रमुख संस्थान भी अपने वित्तीय लेनदेन के लिए इसी केंद्र पर निर्भर हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो वे गांव-गांव जाकर लोगों को अपनी जमा पूंजी निकालने और डाकघर के बजाय बैंकों का रुख करने के लिए प्रेरित करेंगे। संघर्ष समिति का कहना है कि वे विभाग की अकुशलता का खामियाजा जनता को नहीं भुगतने देंगे और जरूरत पड़ने पर इस लड़ाई को सड़कों पर उतारा जाएगा।
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शानन संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश धरवाल ने डाक अधीक्षक मंडी पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि मंडी शहर के घाटे वाले डाकघरों को छोड़कर केवल ऐतिहासिक शानन केंद्र को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जमाने से चल रहे इस पोस्ट ऑफिस में वर्तमान में 4000 से अधिक सक्रिय खाते हैं और करोड़ों रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) जमा है।
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क्षेत्र के फार्मेसी, बीए, नर्सिंग कॉलेज और शानन पावर हाउस जैसे प्रमुख संस्थान भी अपने वित्तीय लेनदेन के लिए इसी केंद्र पर निर्भर हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो वे गांव-गांव जाकर लोगों को अपनी जमा पूंजी निकालने और डाकघर के बजाय बैंकों का रुख करने के लिए प्रेरित करेंगे। संघर्ष समिति का कहना है कि वे विभाग की अकुशलता का खामियाजा जनता को नहीं भुगतने देंगे और जरूरत पड़ने पर इस लड़ाई को सड़कों पर उतारा जाएगा।
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