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रसूख से बीएसएल परियोजना में डेपुटेशन पर डटे हैं शिक्षक
मंडी
Updated Wed, 02 Nov 2016 06:46 PM IST
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Girl Student's hand broken by teacher
- फोटो : demo
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सुंदरनगर (मंडी)। प्रदेश में डेपुटेशन पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति रद्द करने के 20 जुलाई के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निर्देशों का सुंदरनगर में पालन नहीं हुआ है। यहां बीबीएमबी की बीएसएल परियोजना में सालों से डटे हिमाचल प्रदेश के शिक्षक अब भी अपने स्थान पर तैनात हैं। मुख्यमंत्री के डेपुटेशन रद्द करने के आदेश से स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होने की आस जगी थी। लेकिन राजनीतिक तौर पर रसूख रखने वाले शिक्षकों पर मुख्यमंत्री के आदेश का कोई असर नहीं पड़ा है।
वर्तमान में प्रदेश के शिक्षा विभाग से 990 मेगावाट की बीबीएमबी की सुंदरनगर स्थित बीएसएल परियोजना में एक-दो व तीन वर्ष के लिए प्रतिनियुक्ति पर आए शिक्षक नियमों को दरकिनार कर वर्षों से शाही ठाठ से यहां पर नौकरी कर रहे हैं। हिमाचल के शिक्षा विभाग के कर्मचारी होने के कारण यह प्रदेश के शिक्षकों की गिनती में तो आते है परंतु अपनी सेवाएं बीबीएमबी में दे रहे हैं। अगर इनकी सेवाएं हिमाचल प्रदेश में होती तो कई स्कूलों में चल रही अध्यापकों की कमी दूर होती। बीबीएमबी की बीएसएल परियोजना में वर्तमान में प्रदेश के शिक्षा विभाग से करीब 50 शिक्षक और एचपीएसईबीएल व अन्य विभागों से करीब 100 कर्मचारी व अधिकारी डेपुटेशन पर एक, दो और तीन वर्ष के आए थे, लेकिन वह वर्षों से यहीं पर जमे हुए हैं।
इस समय शिक्षा विभाग से करीब 50 शिक्षक टीजीटी साइंस, टीजीटी आर्ट्स, जेबीटी, डीपीई आदि यहां डेपुटेशन पर तैनात हैं। जिनमें से 10 (पांच टीजीटी और पांच जेबीटी) बीएसएल स्कूल सलापड़ में, 17 (4 प्रवक्ता, एक डीपीई, 7 टीजीटी और 5 जेबीटी) बीएसएल सीसे स्कूल सुंदरनगर में, 11(2 प्रवक्ता, पांच टीजीटी और चार जेबीटी) बीएसएल मॉडल स्कूल सुंदरनगर और 6 (3-3 प्रवक्ता व जेबीटी) बीएसएल स्कूल पंडोह में नियुक्त हैं।
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इसके अलावा आधा दर्जन शिक्षकों के डेपुटेशन के आवेदन हाल में सरकार ने मंजूर कर बीबीएमबी को भेजे हैं। डेपुटेशन के आदेशों में शिक्षा विभाग ने साफ लिखा है कि डेपुटेशन एक साल, दो साल और किसी का तीन साल का है, उन्हें इसके उपरांत किसी भी सूरत में डेपुटेशन पीरियड का रिन्यूल नहीं मिलेगा, लेकिन ये शिक्षक आदेशों को ठेंगा दिखा कर बीबीएमबी में ही डटे हुए हैं। डेपुटेशन पर गए इन कर्मचारियों के न लौटने का प्रमुख कारण बीबीएमबी में मिलने वाली अधिक सुविधाओं का लाभ और स्थानांतरण के झंझट से बचना रहता है।
उधर, मंडी में तैनात उपनिदेशक (उच्च शिक्षा) अशोक शर्मा से संपर्क करने पर उन्होंने बीएसएल परियोजना में डेपुटेशन पर तैनात शिक्षकों के रिकार्ड की जांच कर इस मामले को शिक्षा विभाग के संज्ञान में लाने की बात कही है।
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वर्तमान में प्रदेश के शिक्षा विभाग से 990 मेगावाट की बीबीएमबी की सुंदरनगर स्थित बीएसएल परियोजना में एक-दो व तीन वर्ष के लिए प्रतिनियुक्ति पर आए शिक्षक नियमों को दरकिनार कर वर्षों से शाही ठाठ से यहां पर नौकरी कर रहे हैं। हिमाचल के शिक्षा विभाग के कर्मचारी होने के कारण यह प्रदेश के शिक्षकों की गिनती में तो आते है परंतु अपनी सेवाएं बीबीएमबी में दे रहे हैं। अगर इनकी सेवाएं हिमाचल प्रदेश में होती तो कई स्कूलों में चल रही अध्यापकों की कमी दूर होती। बीबीएमबी की बीएसएल परियोजना में वर्तमान में प्रदेश के शिक्षा विभाग से करीब 50 शिक्षक और एचपीएसईबीएल व अन्य विभागों से करीब 100 कर्मचारी व अधिकारी डेपुटेशन पर एक, दो और तीन वर्ष के आए थे, लेकिन वह वर्षों से यहीं पर जमे हुए हैं।
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इस समय शिक्षा विभाग से करीब 50 शिक्षक टीजीटी साइंस, टीजीटी आर्ट्स, जेबीटी, डीपीई आदि यहां डेपुटेशन पर तैनात हैं। जिनमें से 10 (पांच टीजीटी और पांच जेबीटी) बीएसएल स्कूल सलापड़ में, 17 (4 प्रवक्ता, एक डीपीई, 7 टीजीटी और 5 जेबीटी) बीएसएल सीसे स्कूल सुंदरनगर में, 11(2 प्रवक्ता, पांच टीजीटी और चार जेबीटी) बीएसएल मॉडल स्कूल सुंदरनगर और 6 (3-3 प्रवक्ता व जेबीटी) बीएसएल स्कूल पंडोह में नियुक्त हैं।
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इसके अलावा आधा दर्जन शिक्षकों के डेपुटेशन के आवेदन हाल में सरकार ने मंजूर कर बीबीएमबी को भेजे हैं। डेपुटेशन के आदेशों में शिक्षा विभाग ने साफ लिखा है कि डेपुटेशन एक साल, दो साल और किसी का तीन साल का है, उन्हें इसके उपरांत किसी भी सूरत में डेपुटेशन पीरियड का रिन्यूल नहीं मिलेगा, लेकिन ये शिक्षक आदेशों को ठेंगा दिखा कर बीबीएमबी में ही डटे हुए हैं। डेपुटेशन पर गए इन कर्मचारियों के न लौटने का प्रमुख कारण बीबीएमबी में मिलने वाली अधिक सुविधाओं का लाभ और स्थानांतरण के झंझट से बचना रहता है।
उधर, मंडी में तैनात उपनिदेशक (उच्च शिक्षा) अशोक शर्मा से संपर्क करने पर उन्होंने बीएसएल परियोजना में डेपुटेशन पर तैनात शिक्षकों के रिकार्ड की जांच कर इस मामले को शिक्षा विभाग के संज्ञान में लाने की बात कही है।