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स्मार्ट मीटर प्रदेश और उपभोक्ताओं के हित में नहीं, पड़ेगा बोझ : कामेश्वर दत्त
Thu, 05 Sep 2024 08:07 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 05 Sep 2024 08:07 PM IST
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मंडी में आयोजित राज्य विद्युत बोर्ड यूनियन की बैठक में मौजूद सदस्य। स्त्रोत विभाग
मंडी में राज्य बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने बोर्ड की बिगड़ती वित्तीय स्थिति पर किया मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने वीरवार को मंडी में हुई में बिजली बोर्ड की बिगड़ती वित्तीय स्थिति, कर्मचारियों की घटती संख्या और पुरानी पेंशन बहाली को लेकर मंथन किया। यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कामेश्वर दत्त ने बताया कि प्रदेश में निजी कंपनी की भागीदारी से लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर प्रदेश और उपभोक्ताओं के हित में नहीं हैं। इससे विद्युत दरों में वृद्धि होगी और बिजली वितरण का काम निजी कंपनी के पास जाने से बोर्ड के निजीकरण की ओर एक कदम होगा।
प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि बोर्ड ने प्रदेश के सभी 26 लाख इलेक्ट्रॉनिक मीटर को निजी कंपनी के माध्यम से स्मार्ट मीटर से बदलने का फैसला लिया है। इस पर लगभग 3100 करोड़ रुपये की लागत आएगी जो उपभोक्ताओं से वसूली जाएगी। जबकि वर्तमान में बिजली बोर्ड गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। कर्मचारियों व पेंशनर्स के वित्तीय लाभ रुके पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्तीय संकट का कारण राज्य सरकार की ओर से दी जा रही सब्सिडी का बिजली बोर्ड को समय पर अदायगी न होना है।
यूनियन के महासचिव हीरा लाल वर्मा ने प्रदेश सरकार और जनता से बिजली बोर्ड को बचाने के लिए आगे आने की अपील की है। कहा कि बिजली बोर्ड वर्तमान में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को 2300 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रही है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वह बिजली बिलो में दी जा रही सब्सिडी न लेकर बोर्ड को इस वित्तीय संकट से बाहर निकालने में मदद करें।
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स्टाफ की कमी, हर साल 45 कर्मचारी हो रहे हादसे का शिकार
पदाधिकारियों ने कहा कि बोर्ड में कर्मचारियों के अभाव से अकेले कर्मचारी के लाइन पर कार्य करने के कारण दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई है। प्रति वर्ष 30-45 कर्मचारी हादसे का शिकार हो रहे हैं। पिछले साल 9 नियमित, 5 आउटसोर्स कर्मचारियों की काम करते आकस्मिक मृत्यु हुई है। इस साल अभी तक 7 की आकस्मिक मृत्यु हुई है। उन्होंने कहा कि दूसरे विभागों को पुरानी पेंशन मिल रही है। जबकि उन्हें वंचित कर दिया है।
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तथ्य तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहे अफसर
पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार की अफसरशाही पर आरोप लगाया कि वह तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर बिजली बोर्ड के ऊपर 2980 करोड़ रुपये ऋण थोपा जा रहा है। जबकि यह राशि भारत सरकार द्वारा त्रिपक्षीय समझौते के तहत बिजली बोर्ड को एक वित्तीय पैकेज के रूप में दी गई थी। पदाधिकारियों का कहना है कि इस राशि के बिजली बोर्ड के ऊपर डलने से बोर्ड का दिवालिया निकलना निश्चित है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने वीरवार को मंडी में हुई में बिजली बोर्ड की बिगड़ती वित्तीय स्थिति, कर्मचारियों की घटती संख्या और पुरानी पेंशन बहाली को लेकर मंथन किया। यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कामेश्वर दत्त ने बताया कि प्रदेश में निजी कंपनी की भागीदारी से लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर प्रदेश और उपभोक्ताओं के हित में नहीं हैं। इससे विद्युत दरों में वृद्धि होगी और बिजली वितरण का काम निजी कंपनी के पास जाने से बोर्ड के निजीकरण की ओर एक कदम होगा।
प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि बोर्ड ने प्रदेश के सभी 26 लाख इलेक्ट्रॉनिक मीटर को निजी कंपनी के माध्यम से स्मार्ट मीटर से बदलने का फैसला लिया है। इस पर लगभग 3100 करोड़ रुपये की लागत आएगी जो उपभोक्ताओं से वसूली जाएगी। जबकि वर्तमान में बिजली बोर्ड गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। कर्मचारियों व पेंशनर्स के वित्तीय लाभ रुके पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्तीय संकट का कारण राज्य सरकार की ओर से दी जा रही सब्सिडी का बिजली बोर्ड को समय पर अदायगी न होना है।
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यूनियन के महासचिव हीरा लाल वर्मा ने प्रदेश सरकार और जनता से बिजली बोर्ड को बचाने के लिए आगे आने की अपील की है। कहा कि बिजली बोर्ड वर्तमान में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को 2300 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रही है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वह बिजली बिलो में दी जा रही सब्सिडी न लेकर बोर्ड को इस वित्तीय संकट से बाहर निकालने में मदद करें।
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स्टाफ की कमी, हर साल 45 कर्मचारी हो रहे हादसे का शिकार
पदाधिकारियों ने कहा कि बोर्ड में कर्मचारियों के अभाव से अकेले कर्मचारी के लाइन पर कार्य करने के कारण दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई है। प्रति वर्ष 30-45 कर्मचारी हादसे का शिकार हो रहे हैं। पिछले साल 9 नियमित, 5 आउटसोर्स कर्मचारियों की काम करते आकस्मिक मृत्यु हुई है। इस साल अभी तक 7 की आकस्मिक मृत्यु हुई है। उन्होंने कहा कि दूसरे विभागों को पुरानी पेंशन मिल रही है। जबकि उन्हें वंचित कर दिया है।
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तथ्य तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहे अफसर
पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार की अफसरशाही पर आरोप लगाया कि वह तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर बिजली बोर्ड के ऊपर 2980 करोड़ रुपये ऋण थोपा जा रहा है। जबकि यह राशि भारत सरकार द्वारा त्रिपक्षीय समझौते के तहत बिजली बोर्ड को एक वित्तीय पैकेज के रूप में दी गई थी। पदाधिकारियों का कहना है कि इस राशि के बिजली बोर्ड के ऊपर डलने से बोर्ड का दिवालिया निकलना निश्चित है।