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Mandi News: सुकेती खड्ड में पानी से ज्यादा बह रही सिल्ट, जलचरों के अस्तित्व पर संकट

Sun, 20 Sep 2026 11:38 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2026 11:38 PM IST
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Silt flowing in Suketi Khad exceeds water volume; aquatic life faces an existential threat.
मच्छली, घयोल, केकड़े जैसे जलचरों पर मंडराया खतरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। बरसात के मौसम में सुकेती खड्ड में पानी का प्रवाह बढ़ने के बजाय इस बार कई स्थानों पर भारी मात्रा में सिल्ट बहती नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बीबीएमबी क्षेत्र से आने वाली सिल्ट के कारण खड्ड का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है और घयोल, केकड़े सहित अन्य स्थानीय जलीय जीवों के अस्तित्व पर संकट पैदा हो गया है।
किसान दूनी चंद, राम कृष्ण और भगत राम के अनुसार, पहले सुकेती खड्ड में इन जलचरों की संख्या पर्याप्त थी, लेकिन लगातार जमा हो रही सिल्ट और गंदले पानी के कारण इनके प्राकृतिक आवास प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि खड्ड के कई हिस्सों में पानी के साथ बड़ी मात्रा में सिल्ट का बहाव दिखाई दे रहा है।
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स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से सिल्ट के स्रोत की जांच करने, खड्ड की स्थिति का निरीक्षण करने और जलीय पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो स्थानीय जलीय प्रजातियों के अस्तित्व पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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बीएसएल झील से सिल्ट बहने का आरोप
हिमाचल किसान सभा का आरोप है कि बीएसएल परियोजना सुंदरनगर की झील से बड़ी मात्रा में सिल्ट बहने के कारण सुकेती खड्ड में पानी की अपेक्षा सिल्ट अधिक दिखाई दे रही है। सभा के अनुसार, सिल्ट जमा होने और गंदले पानी के कारण सुकेती खड्ड में पाई जाने वाली पारंपरिक जलीय प्रजातियों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। किसान सभा का कहना है कि उसने कई बार बीबीएमबी प्रबंधन से सिल्ट के उचित निस्तारण की मांग की है। इसके बावजूद बरसात के दौरान दिन-रात सिल्ट को खड्ड में बहाए जाने का आरोप है।

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30 सितंबर तक नियमानुसार निकाली जाती है सिल्ट : बीबीएमबी
नियमानुसार 30 सितंबर तक बीएसएल झील से सिल्ट निकाली जा रही है। इसमें किसी तरह की कोताही नहीं बरती जा रही है। कोर्ट के आदेश के अनुसार ही बरसात के दौरान जुलाई से सितंबर तक झील से सिल्ट निकाली जाती है। -कश्मीर सिंह ठाकुर, उप मुख्य अभियंता, बीएसएल परियोजना, सुंदरनगर
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