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Mandi News: शैटाधार में उल्लास के साथ सायरी मेले का आगाज
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शैटाधार में सायरी मेला में पहुंचे श्रद्धालु व देवता। संवाद
देव दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
थुनाग (मंडी)। सराज घाटी के प्रसिद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र शैटाधार में सायर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भादों माह के देव शयन काल के एक माह बाद सराज क्षेत्र के देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही क्षेत्र जयकारों, शंखध्वनि और घंटियों से गूंज उठा।शैटाधार में तीन दिवसीय सायरी मेले का शुभारंभ देव शैटीनाग महाराज के भव्य रथ के मंदिर प्रांगण पहुंचने के साथ हुआ। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर हजारों श्रद्धालुओं ने देवता का स्वागत किया। इस बार देव शैटीनाग बूंग कोठी से अपने हरियानों के साथ मेले में पहुंचे हैं। श्रद्धालुओं ने नई फसल के प्रतीक अखरोट देवता को अर्पित कर सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की। देव शैटीनाग के मुख्य कारदार हिम्मत राम ठाकुर के अनुसार, संक्रांति पर नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों को दूर करने के लिए चारों दिशाओं में अखरोटों की बौछार की जाती है। स्थानीय परंपरा के अनुसार भादों में मायके गई नवविवाहिताएं सायर संक्रांति पर ससुराल लौटती हैं। मेले में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के साथ व्यापारिक गतिविधियां भी तेज हैं। पहली बार 300 से अधिक व्यापारी पहुंचे हैं और मेले में खरीदारी को लेकर लोगों में खासा उत्साह है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
थुनाग (मंडी)। सराज घाटी के प्रसिद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र शैटाधार में सायर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भादों माह के देव शयन काल के एक माह बाद सराज क्षेत्र के देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही क्षेत्र जयकारों, शंखध्वनि और घंटियों से गूंज उठा।शैटाधार में तीन दिवसीय सायरी मेले का शुभारंभ देव शैटीनाग महाराज के भव्य रथ के मंदिर प्रांगण पहुंचने के साथ हुआ। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर हजारों श्रद्धालुओं ने देवता का स्वागत किया। इस बार देव शैटीनाग बूंग कोठी से अपने हरियानों के साथ मेले में पहुंचे हैं। श्रद्धालुओं ने नई फसल के प्रतीक अखरोट देवता को अर्पित कर सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की। देव शैटीनाग के मुख्य कारदार हिम्मत राम ठाकुर के अनुसार, संक्रांति पर नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों को दूर करने के लिए चारों दिशाओं में अखरोटों की बौछार की जाती है। स्थानीय परंपरा के अनुसार भादों में मायके गई नवविवाहिताएं सायर संक्रांति पर ससुराल लौटती हैं। मेले में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के साथ व्यापारिक गतिविधियां भी तेज हैं। पहली बार 300 से अधिक व्यापारी पहुंचे हैं और मेले में खरीदारी को लेकर लोगों में खासा उत्साह है।