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चिड़िया के बहाने उजागर हुआ व्यवस्था का कुटिल चेहरा
मंडी
Updated Tue, 20 Sep 2016 06:39 PM IST
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मंडी में नाट्योत्सव की दूसरी संध्या में एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन की ओर से चिडिय़ा के बहाने नाटक का मंचन किया गया।
- फोटो : अमर उजाला
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मंडी। मंडी में नाट्योत्सव की दूसरी संध्या में एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन की ओर से ‘चिड़िया’ नाटक का मंचन किया गया। केहर सिंह ठाकुर की ओर से लिखित एवं निर्देशित हास्य-व्यंग्य प्रधान इस नाटक में चिड़िया के बहाने भ्रष्ट और कुटिल व्यवस्था को बेनकाब किया है। लोकतंत्र के नाम पर देश में जारी यह व्यवस्था किस तरह से एक वर्ग विशेष की गुलाम बनकर रह गई है और आम आदमी का शोषण कर रही है।
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आम आदमी के प्रतीक के रूप में चिड़िया को दर्शाया गया है। जो अपने हक के लिए इस कुटिल व्यवस्था से जूझती है और अंत में कामयाब भी होती है। मगर तब तक वह इतनी टूट चुकी होती है कि उसका मोहभंग हो जाता है।
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चिड़िया के बहाने नाटक में हास्य-व्यंग्य के बीच देश में फैले भ्रष्ट तंत्र पर प्रहार किया गया है। किसी बाहरी मुल्क से आई चिड़िया को यहां की सुबह बहुत लुभाती है। उसे एक मटर का दाना मिलता है। जिसे वह नहा धोकर पूजा पाठ के बाद ही खाना चाहती है। वह अपने इस दाने को बढ़ई के पास रखती है। मगर जब वह वापस आती है तो बढ़ई उसे दाना देने से मना करता है। वह दाना गुम होने का बहाना बनाता है। बस यहीं से चिड़िया का संघर्ष शुरू हो जाता है।
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यह चिड़िया नहीं बल्कि देश के आम आदमी का संघर्ष है। जो रोजी रोटी के लिए दर दर की ठोकरें खाता है। चिड़िया सिपाही से शिकायत करती है, मगर वह टरका देता है। थानेदार से बात करती है तो थानेदार सिपाही से अपनी कोई पुरानी दुश्मनी निकालने के लिए उसे गवाही देने को कहता है। बेचारी चिड़िया मंत्री के काफिले को रोक कर उससे फरियाद करती है। मगर थानेदार मंत्री को उसी तरह गुमराह कर देता है जैसे लालफीताशाही राजनीतिज्ञों को भ्रमित करती है। मंत्री भी राजा साहब के स्वागत सत्कार की बात कर चिड़िया को अकेला छोड़ कर काफिले के साथ चला जाता है। मगर जिद्दी चिड़िया अब सीधे राजा साहब से बात करना चाहती है। इसके लिए भी उसे काफिला रोकना पड़ता है। राजा से जब वह अपना मटर का दाना ढुंढवाने की गुहार लगाती है तो राजा बिगड़ जाता है। एक देश का राजा भला चिड़िया का मटर का दाना ढूंढेगा? आखिरकार चिड़िया चिंटी और घोड़े की मदद से राजा को विवश करती है कि वह चिड़िया का दाना ढुंढवाए और फिर व्यवस्था ऊपर से नीचे तक सक्रिय होती है। और चिड़िया का खोया हुआ दाना नीचे से ऊपर राजा तक पहुंच जाता है। मगर अब चिड़िया की भूख मर जाती है। वह राजा के स्थानीय नागरिकता के प्रस्ताव को ठुकरा कर वापस अपने देश जाना चाहती है।
इस नाटक में चिड़िया की भूमिका को आरती ठाकुर ने बेहतरीन तरीके से निभाया है। वहीं मंत्री के रूप में केहर सिंह और राजा के रूप में जीवानंद का किरदार भी लाजवाब रहा। इसके अलावा दीन दयाल, आशा, रेवत राम, श्याम, ओम प्रकाश, कविता, सीता, रेखा, भूषण देव आदि ने भी अपने किरदार बखूबी निभाए। पार्श्व ध्वनि युक्ति और प्रकाश व्यवस्था मीनाक्षी एवं वैभव ठाकुर ने की थी।