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Mandi News: बंगलूरू में नौकरी छोड़ संजना शर्मा ने अपनाया स्वरोजगार
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संजना
नेरचौक (मंडी)। फिजिक्स परास्नातक संजना शर्मा ने अपने इंजीनियर पति सिद्धार्थ शर्मा के साथ स्वरोजगार स्थापित कर सफलता की प्रेरक कहानी रची है। बंगलूरू में दंपती ने नौकरी छोड़कर स्वरोजगार अपनाया। इसमें संजना ने अहम भूमिका निभाई। यह जोड़ी अब अपने रेस्तरां के माध्यम से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजित कर रही है और महिला सशक्तीकरण का भी संदेश दे रही है।
रत्ती नेरचौक की संजना (43) ने एमएससी, एमफिल व एमएड की है। निजी क्षेत्र में आगे बढ़ने के कई विकल्पों को पीछे छोड़कर मंडी का रुख किया। अब वह फोरलेन डडौर से नागचला स्थित रेस्तरां में उत्तर और दक्षिण भारतीय व्यंजनों के साथ चाइनीज खाने का स्वाद ग्राहकों को दे रहे हैं। संजना बंगलूरू में शिक्षक और डाइटीशियन थीं। उनके पति सिद्धार्थ इंजीनियर थे। बच्चों की पढ़ाई बंगलूरू में चल रही थी, लेकिन गांव लौटने और स्वरोजगार अपनाने का ख्याल हमेशा मन में था। आखिरकार उन्होंने दिसंबर 2021 में बड़ा कदम उठाया और अब आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर दी।
रेस्तरां में संजना ने 21 अन्य लोगों को रोजगार भी दिया, जिनमें 9 स्थानीय महिलाएं शामिल हैं। वोकल फॉर लोकल और स्थानीय स्वादों पर संजना काम कर रही हैं। मक्की की रोटी, साग और लस्सी की मांग भी है। साथ ही उनके पास डोसा बनाने का कोई पेशेवर अनुभव नहीं था, लेकिन दक्षिण भारत में रहने के अनुभव ने इसे सफल बनाया। अब रोजाना 200 से अधिक डोसे बिकते हैं।
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उधर, संजना ने बताया कि बंगलूरू से मंडी का सफर आसान नहीं था। यहां काम शुरू किया और अच्छा रिस्पांस मिला। इससे खुशी मिली। अब लगातार नई चीजें सीखकर खुद के साथ दूसरों को आत्मनिर्भरता की तरफ आगे बढ़ाने में जुटी हूं।
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रत्ती नेरचौक की संजना (43) ने एमएससी, एमफिल व एमएड की है। निजी क्षेत्र में आगे बढ़ने के कई विकल्पों को पीछे छोड़कर मंडी का रुख किया। अब वह फोरलेन डडौर से नागचला स्थित रेस्तरां में उत्तर और दक्षिण भारतीय व्यंजनों के साथ चाइनीज खाने का स्वाद ग्राहकों को दे रहे हैं। संजना बंगलूरू में शिक्षक और डाइटीशियन थीं। उनके पति सिद्धार्थ इंजीनियर थे। बच्चों की पढ़ाई बंगलूरू में चल रही थी, लेकिन गांव लौटने और स्वरोजगार अपनाने का ख्याल हमेशा मन में था। आखिरकार उन्होंने दिसंबर 2021 में बड़ा कदम उठाया और अब आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर दी।
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रेस्तरां में संजना ने 21 अन्य लोगों को रोजगार भी दिया, जिनमें 9 स्थानीय महिलाएं शामिल हैं। वोकल फॉर लोकल और स्थानीय स्वादों पर संजना काम कर रही हैं। मक्की की रोटी, साग और लस्सी की मांग भी है। साथ ही उनके पास डोसा बनाने का कोई पेशेवर अनुभव नहीं था, लेकिन दक्षिण भारत में रहने के अनुभव ने इसे सफल बनाया। अब रोजाना 200 से अधिक डोसे बिकते हैं।
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उधर, संजना ने बताया कि बंगलूरू से मंडी का सफर आसान नहीं था। यहां काम शुरू किया और अच्छा रिस्पांस मिला। इससे खुशी मिली। अब लगातार नई चीजें सीखकर खुद के साथ दूसरों को आत्मनिर्भरता की तरफ आगे बढ़ाने में जुटी हूं।
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