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Mandi News: जोगिंद्रनगर अस्पताल में हांफी व्यवस्था, एक बेड पर तीन मरीज
Tue, 23 Jul 2024 11:57 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Tue, 23 Jul 2024 11:57 PM IST
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अस्पताल में घंटों इंतजार के बाद बिना टेस्ट करवाए लौट रहे मरीज, ग्लूकोज की भी किल्लत
पीलिया के मरीज बढ़ने से हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ रहे हालात
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। नागरिक अस्पताल जाेगिंद्रनगर में पीलिया के मरीज बढ़ने से हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। सीमित संसाधनों के चलते व्यवस्था चरमरा गई है। आरक्षित सभी रोगी वार्डों में वायरल फीवर, उल्टी, दस्त और डायरिया के मरीजों के दाखिले बढ़ जाने से अब आपातकालीन वार्ड में भी एक बिस्तर पर तीन-तीन मरीज उपचार करवाने को मजबूर हो गए हैं।
वहीं अस्पताल में ग्लूकोज की किल्लत का सामना भी मरीजों को करना पड़ रहा है। जोगिंद्रनगर अस्पताल में हालात ऐसे हैं कि ओपीडी में उपचार हासिल करने से पहले पर्ची बनाने और फिर टेस्ट करवाने के लिए भी मरीजों के पसीने छूट रहे हैं। मंगलवार को नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में फैली इस अव्यवस्था पर कुछ तीमारदारों का आक्रोश देखने को मिला।
स्वास्थ्य विभाग के अथक प्रयासों के बाद भी मरीजों को स्वास्थ्य क्षेत्र की सभी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट को लेकर उमड़ रही मरीजों की भीड़ के चलते यहां पर मशीनरी भी हांफ रही है। घंटों इंतजार के बाद रोगी बिना टेस्ट भी लौट रहे हैं। निजी प्रयोगशालाओं की बात करें तो यहां पर भी धक्का-मुक्की जैसे हालात बने हुए हैं। तीमारदार अपने गंभीर मरीजों के साथ जब उपचार और टेस्ट करवाने के लिए पहुंच रहे तो उन्हें फर्श पर अपनी बारी का इंतजार करते हुए कई परेशानियां भी झेलनी पड़ रही है। दशकों बाद नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में ऐसे हालात देखने को मिल रहे हैं। अस्पताल में मरीजों की भीड़ देखकर मरीज और तीमारदार निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हो रहे हैं। नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में एनएस डीएनएस, विटामिन सी की टैबलेट, दस एमएल की सीरिंज, आईबी सेट नहीं मिल रहे हैं। यह सब मरीजों को बाजार से ही खरीदकर लाने पड़ रहे हैं।
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बॉक्स
अस्पताल में उपचार को पहुंच रहे मरीजों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए कृतसंकल्प है। पीलिया मरीजों को उपचार दिलाने के लिए चिकित्सकों की एक विशेष टीम निगरानी कर रही है। आपातकालीन वार्ड के सीमित संसाधनों के चलते गंभीर मरीजों को उपचार दिलाने के लिए कई बार दाखिले भी क्षमता से अधिक करने पड़ रहे हैं।
-डॉ. रोशन लाल कौंडल, एसएमओ, नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर
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पीलिया के मरीज बढ़ने से हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ रहे हालात
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। नागरिक अस्पताल जाेगिंद्रनगर में पीलिया के मरीज बढ़ने से हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। सीमित संसाधनों के चलते व्यवस्था चरमरा गई है। आरक्षित सभी रोगी वार्डों में वायरल फीवर, उल्टी, दस्त और डायरिया के मरीजों के दाखिले बढ़ जाने से अब आपातकालीन वार्ड में भी एक बिस्तर पर तीन-तीन मरीज उपचार करवाने को मजबूर हो गए हैं।
वहीं अस्पताल में ग्लूकोज की किल्लत का सामना भी मरीजों को करना पड़ रहा है। जोगिंद्रनगर अस्पताल में हालात ऐसे हैं कि ओपीडी में उपचार हासिल करने से पहले पर्ची बनाने और फिर टेस्ट करवाने के लिए भी मरीजों के पसीने छूट रहे हैं। मंगलवार को नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में फैली इस अव्यवस्था पर कुछ तीमारदारों का आक्रोश देखने को मिला।
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स्वास्थ्य विभाग के अथक प्रयासों के बाद भी मरीजों को स्वास्थ्य क्षेत्र की सभी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट को लेकर उमड़ रही मरीजों की भीड़ के चलते यहां पर मशीनरी भी हांफ रही है। घंटों इंतजार के बाद रोगी बिना टेस्ट भी लौट रहे हैं। निजी प्रयोगशालाओं की बात करें तो यहां पर भी धक्का-मुक्की जैसे हालात बने हुए हैं। तीमारदार अपने गंभीर मरीजों के साथ जब उपचार और टेस्ट करवाने के लिए पहुंच रहे तो उन्हें फर्श पर अपनी बारी का इंतजार करते हुए कई परेशानियां भी झेलनी पड़ रही है। दशकों बाद नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में ऐसे हालात देखने को मिल रहे हैं। अस्पताल में मरीजों की भीड़ देखकर मरीज और तीमारदार निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हो रहे हैं। नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में एनएस डीएनएस, विटामिन सी की टैबलेट, दस एमएल की सीरिंज, आईबी सेट नहीं मिल रहे हैं। यह सब मरीजों को बाजार से ही खरीदकर लाने पड़ रहे हैं।
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अस्पताल में उपचार को पहुंच रहे मरीजों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए कृतसंकल्प है। पीलिया मरीजों को उपचार दिलाने के लिए चिकित्सकों की एक विशेष टीम निगरानी कर रही है। आपातकालीन वार्ड के सीमित संसाधनों के चलते गंभीर मरीजों को उपचार दिलाने के लिए कई बार दाखिले भी क्षमता से अधिक करने पड़ रहे हैं।
-डॉ. रोशन लाल कौंडल, एसएमओ, नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर