2 साल के बच्चे में पोलियो के लक्षण, स्वास्थ्य विभाग में मंचा हड़कंप
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क्षेत्र की पंचायत मशोग के खमारला में एक दो साल के बच्चे में पोलिया के लक्ष्ण(एक्यूट फ्लैसीड पैरालिसिस एएफपी) पाया गया है। यह मामला आईजीएमसी शिमला में ट्रेस हुआ है। सूचना जिला स्वास्थ्य विभाग को दी गई।
सूचना मिलते ही शुक्रवार को करसोग स्वास्थ्य विभाग की पांच टीमें गांव में जांच के लिए जुट गई हैं। बच्चे में पोलियों के लक्षण न हो इसके लिए विभाग ने टेस्ट के लिए बच्चे के मल के नमूने लेकर पोलियो टेस्ट लैब कसौली में भी भेजे हैं।
वहीं, करसोग स्वास्थ्य विभाग ने संदिग्ध गांव के आसपास के तीन किलोमीटर के दायरे में आने वाले करीब एक दर्जन गांवों में 0 से पांच साल तक के बच्चों को दोबारा से एहतियात के तौर पर विभाग की पांच टीमें पोलियो की दवाई पिलाने में भी जुट गई हैं।
उधर, पंचायत कलाशन की प्रधान पार्वती व बार्ड सदस्य बिमला ने बताया कि इस तरह का एक और मामला इस गांव में है, जिसका इलाज पीजीआई से चल रहा है।
विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
देशभर में पोलियो के खात्मे के लिए सरकार के द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, ताकि कोई भी बच्चा इस बीमारी की चपेट में न आ सके। वहीं इसके लिए बहुत बड़ा अभियान सरकार के द्वारा चलाया जा रहा है।
देश के हर कोने में रहने वाले 0 से पांच वर्ष तक के हर बच्चे को ढूंढ-ढूंढकर पोलियो की दवाई पिलाई जाती है। लेकिन इस प्रकार का मामला सामने आने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, इस मामले के सामने आने से विभाग के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं।
मामले में क्या कहते हैं अधिकारी
इस बारे में डीआईओ अनुराधा शर्मा ने बताया कि पोलियो सर्विलेंस टीम उपरोक्त गांव में जाकर मामले की पूरी जांच में लग चुकी है। वहीं, इस गांव के आसपास सभी गांवों में पोलियो की खुराक भी पिलाई जा रही है। पोलियों की पुष्टि के लिए सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही कहा जा सकता है कि बच्चे में पोलियो है या नहीं। वहीं, इस बारे में सीएमओ मंडी डा. देशराज शर्मा ने बतबाया कि इस प्रकार के रेयर केस होते हैं। करसोग में एक दो साल के बच्चे में कुछ लक्षण पाए गए हैं। विभाग ने इसके सैंपल लैब में भेज दिए हैं। मामले की पूरी तरह से जांच की जाएगी कि आखिर इस प्रकार का मामला कैसे सामने आया है।