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Mandi News: पांगणा में गूंज रहे गुग्गा गाथा के मार्मिक गीत

Wed, 21 Aug 2024 05:25 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Wed, 21 Aug 2024 05:25 PM IST
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Poignant songs of Gugga saga resonating in Pangana
गुग्गा गाथा की प्राचीन पारंपरिक गायन शैली का महीने भर होगा निर्वहन
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संवाद न्यूज एजेंसी
करसोग (मंडी)। सतलुज घाटी के सुकेत क्षेत्र में सिद्ध नाथ परंपरा के तहत गुग्गा छत्री की पूजा-अर्चना और गाथा गायन का प्रचलन रहा है। सुकेत की राजधानी पांगणा में गुग्गा सिंहासनी के विग्रह को दिनभर कंधे पर उठाए लोग घर-घर पहुंचकर गुग्गा गाथा के गायन के साथ नाथ समुदाय बाग के लोग महीनेभर इस समृद्ध प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हैं।

संस्कृति मर्मज्ञ डाॅ. जगदीश शर्मा का कहना है कि गुग्गा गाथा का गायन हिमाचल में श्रावण पूर्णिमा से लेकर गुग्गा अष्टमी तक होता है और नवमी को मेले का आयोजन होता है। पांगणा के सिंहासनी गुग्गा भाद्रपद मास के एक पखवाड़े से लेकर पूरे महीने तक देव समुदाय की अनुपस्थिति में क्षेत्र के भ्रमण पर रहते हैं। इस दौरान वे कुचाली और द्वेषी शक्तियों से क्षेत्र का रक्षण करते हैं। गुग्गा जी के जन्म, चमत्कारों, जीवन की विशिष्ट घटनाओं पर आधारित इन गाथाओं को सुनने के बाद भक्त परिजन गुग्गा की पूजा-अर्चना कर ऋतुफल, अन्न, दानराशि और मिष्ठान अर्पित करते हैं। बदले में गुग्गा के पुजारी इसी थाली से अन्न की एक मुट्ठी लेकर गुग्गा-गुग्गी के देव रथों से स्पर्श कर पारिवारिक सुख समृद्धि और मनोकामना की पूर्ति की अरदास कर भक्त परिजनों को लौटा देते हैं। वहीं, सुकेत संस्कृति, साहित्य और जन-कल्याण मंच पांगणा-सुुकेत के अध्यक्ष डाॅ. हिमेंद्र बाली हिम का कहना है कि सुकेत में गुग्गा गाथा का प्रारंभ सृष्टि के आरंभ से मिलता है।
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