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Mandi News: देव महाकुंभ में पहुंचे पंजीकृत 190 समेत 300 से अधिक देवी देवता
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अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव की पहली जलेब से पूर्व चौहटा बाजार में विराजमान सराज घाटी क
मंडी। धूप के बीच झूमते हुए सोने चांदी से सुसज्जित कई देव रथ...। वाद्य यंत्र करनाल, रणसिंघे, ढोल नगाड़े की थाप और शहनाई की गूंज पर नाचते गाते हुए सैकड़ों देवलू। गण्यमान्य के सिरों पर सजी रंग बिरंगी पगड़ियां। सभी एक साथ पड्डल मैदान में बढ़ते हुए। यह नजारा अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव की पहली जलेब में दिखा। इस नजारे को सैकड़ों लोगों ने कैमरे में कैद किया। देवता के आगे हर किसी का सिर झुका और प्रणाम करते हुए देव आस्था का परिचय दिया।
शहर में देवी-देवताओं के पहुंचने तथा वाद्य यंत्रों की ध्वनि की गूंज से स्वर्ग लोक का अहसास हुआ। पूर्वाह्न 11 बजे से लेकर देर शाम छह बजे तक देव ध्वनि कानों में गूंजती रही। शाम ढलने के बाद सेरी मंच पर सजे सांस्कृतिक संध्या के पंडाल में शहनाई के साथ डीजे की धुनों से छोटी काशी सराबोर हुई।
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में सोमवार को 190 पंजीकृत सहित करीब 300 से अधिक देवी-देवता पहुंचे। पड्डल मैदान में सभी पंजीकृत देवी-देवताओं को बैठने के लिए स्थान उपलब्ध करवाया गया है। गैर पंजीकरण वाले देवी-देवता वल्लभ महाविद्यालय परिसर में ही विराजमान हैं।
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पुरानी मंडी में त्रिलोकीनाथ मंदिर में आस्था को आघात
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में पहुंचे देवी-देवताओं तथा उनके देवलुओं के रात्रि ठहराव की अलग-अलग स्थानों में व्यवस्था की गई है। संस्कृति सदन में भी 50 देवी-देवताओं का ठहराव है। यजमानों के घरों के अलावा शहर के मंदिरों में भी देवी-देवताओं और देवलुओं के रात्रि ठहराव की व्यवस्था है। त्रिलोकीनाथ मंदिर में आस्था को आघात पहुंचा है। परिसर में एक शराब की बोतल और छह गिलास मिलने से देव समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले आहत हैं। त्रिलोकीनाथ का मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि के दौरान देवताओं को ठहराने की व्यवस्था होती है। रविवार रात करीब साढ़े नौ बजे शराब की बोतल और छह गिलास पड़े हुए पाए गए हैं।
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190 पंजीकृत देवी देवता अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में शिरकत करने के लिए पहुंचे। देवी-देवताओं और देवलुओं के रात्रि ठहराव की समुचित व्यवस्था की गई है। त्रिलोकीनाथ मंदिर में पेश आई घटना पर सख्त चेतावनी दी गई है। इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
-शिवपाल शर्मा, अध्यक्ष, सर्व देवता सेवा समिति
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शहर में देवी-देवताओं के पहुंचने तथा वाद्य यंत्रों की ध्वनि की गूंज से स्वर्ग लोक का अहसास हुआ। पूर्वाह्न 11 बजे से लेकर देर शाम छह बजे तक देव ध्वनि कानों में गूंजती रही। शाम ढलने के बाद सेरी मंच पर सजे सांस्कृतिक संध्या के पंडाल में शहनाई के साथ डीजे की धुनों से छोटी काशी सराबोर हुई।
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अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में सोमवार को 190 पंजीकृत सहित करीब 300 से अधिक देवी-देवता पहुंचे। पड्डल मैदान में सभी पंजीकृत देवी-देवताओं को बैठने के लिए स्थान उपलब्ध करवाया गया है। गैर पंजीकरण वाले देवी-देवता वल्लभ महाविद्यालय परिसर में ही विराजमान हैं।
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पुरानी मंडी में त्रिलोकीनाथ मंदिर में आस्था को आघात
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में पहुंचे देवी-देवताओं तथा उनके देवलुओं के रात्रि ठहराव की अलग-अलग स्थानों में व्यवस्था की गई है। संस्कृति सदन में भी 50 देवी-देवताओं का ठहराव है। यजमानों के घरों के अलावा शहर के मंदिरों में भी देवी-देवताओं और देवलुओं के रात्रि ठहराव की व्यवस्था है। त्रिलोकीनाथ मंदिर में आस्था को आघात पहुंचा है। परिसर में एक शराब की बोतल और छह गिलास मिलने से देव समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले आहत हैं। त्रिलोकीनाथ का मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि के दौरान देवताओं को ठहराने की व्यवस्था होती है। रविवार रात करीब साढ़े नौ बजे शराब की बोतल और छह गिलास पड़े हुए पाए गए हैं।
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190 पंजीकृत देवी देवता अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में शिरकत करने के लिए पहुंचे। देवी-देवताओं और देवलुओं के रात्रि ठहराव की समुचित व्यवस्था की गई है। त्रिलोकीनाथ मंदिर में पेश आई घटना पर सख्त चेतावनी दी गई है। इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
-शिवपाल शर्मा, अध्यक्ष, सर्व देवता सेवा समिति
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