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Mandi News: उधार में खरीदी देवदार लकड़ी की कीमत चुकाने के आदेश
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मंडी। देवदार के दरवाजे, खिड़कियां और चौखटें उधार पर खरीदकर भुगतान नहीं करने वाले लाहौल-स्पीति निवासी व्यक्ति को मंडी की अदालत से झटका लगा है। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश मंडी की अदालत ने सिस्सू निवासी विनोद कुमार को औट क्षेत्र के रोपा निवासी एवं मैसर्ज शीतल टिंबर एंटरप्राइजेज के स्वामी गुरदास के 64,320 रुपये ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। अदालत ने प्रतिवादी को वाद व्यय भी अदा करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत में दायर वाद के अनुसार पांच जून 2021 को विनोद कुमार ने गुरदास से देवदार के दरवाजे, खिड़कियां और वेंटिलेटर चौखटें उधार पर खरीदी थीं। सामान की कुल कीमत 64,320 रुपये थी, जिसे वाहन के माध्यम से सिस्सू पहुंचाया गया था। प्रतिवादी ने एक सप्ताह के भीतर भुगतान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन कई बार मांग करने और कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद राशि का भुगतान नहीं किया।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ और न ही उसने वादी के दावों का कोई जवाब दिया। अदालत ने माना कि वादी की ओर से प्रस्तुत बिल, चालान, कानूनी नोटिस और गवाहों की गवाही से यह साबित होता है कि सामान की आपूर्ति की गई थी और भुगतान लंबित था। अदालत ने यह भी माना कि प्रतिवादी ने कानूनी नोटिस का जवाब नहीं दिया और न ही अदालत में अपना पक्ष रखा। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश असलम बेग ने अपने निर्णय में कहा कि वादी का दावा साक्ष्यों से पूरी तरह सिद्ध होता है। इसके आधार पर अदालत ने 64,320 रुपये की वसूली पांच जून 2021 से अदायगी तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज तथा वाद व्यय अदा करने के आदेश पारित किए।
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अदालत में दायर वाद के अनुसार पांच जून 2021 को विनोद कुमार ने गुरदास से देवदार के दरवाजे, खिड़कियां और वेंटिलेटर चौखटें उधार पर खरीदी थीं। सामान की कुल कीमत 64,320 रुपये थी, जिसे वाहन के माध्यम से सिस्सू पहुंचाया गया था। प्रतिवादी ने एक सप्ताह के भीतर भुगतान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन कई बार मांग करने और कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद राशि का भुगतान नहीं किया।
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सुनवाई के दौरान प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ और न ही उसने वादी के दावों का कोई जवाब दिया। अदालत ने माना कि वादी की ओर से प्रस्तुत बिल, चालान, कानूनी नोटिस और गवाहों की गवाही से यह साबित होता है कि सामान की आपूर्ति की गई थी और भुगतान लंबित था। अदालत ने यह भी माना कि प्रतिवादी ने कानूनी नोटिस का जवाब नहीं दिया और न ही अदालत में अपना पक्ष रखा। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश असलम बेग ने अपने निर्णय में कहा कि वादी का दावा साक्ष्यों से पूरी तरह सिद्ध होता है। इसके आधार पर अदालत ने 64,320 रुपये की वसूली पांच जून 2021 से अदायगी तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज तथा वाद व्यय अदा करने के आदेश पारित किए।
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